पटना: भारतीय रेल का पूर्व मध्य रेलवे अपने उपलब्धियों के बजाय अपने कारनामों के लिए विख्यात है और विख्यात इसलिए ही है क्योंकि यहां कुख्यात अधिकारियों की भरमार है! ऐसा लगता है कि रेलवे बोर्ड ने भी इसे अपनी नियति पर छोड़ दिया है , क्योंकि यहां पर रेलवे बोर्ड के आदेशों का अनुपालन भी सुनिश्चित नहीं होता है, संज्ञान में लायें जाने पर भी रेलवे बोर्ड की चुप्पी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है!

एक कहावत है “अल्लाह मेहरबान तो गदहा पहलवान”,जिसका अर्थ है कि जब ईश्वर की कृपा हो जाए तो अयोग्य या कमजोर व्यक्ति भी शक्तिशाली या सफल बन सकता है। पूर्व मध्य रेलवे के एसडीजीएम (वरिष्ठ उप महाप्रबंधक सतर्कता) एवं पीसीएमएम (प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक) के पोस्टिंग में उपरोक्त कहावत चरितार्थ हो रहा है। वर्तमान एसडीजीएम (वरिष्ठ उप महाप्रबंधक सतर्कता) श्रीमान पंकज कुमार सिन्हा पूर्व मध्य रेलवे के पूराने शातिर खिलाड़ी रहे हैं और सारे दांव पेंच के ज्ञाता हैं, ऐसा लगता है कि सारा जीवन पूर्व मध्य रेलवे में ही बिताने का इरादा है। एक बार दो साल के लिए डीआरएम की पोस्टिंग पर पूर्व मध्य रेलवे से बाहर जाकर इन्होंने भारतीय रेल पर इतना एहसान कर दिया कि डीआरएम के कार्यकाल के बाद इन्हें अविलंब वापस लाया गया और पूर्व मध्य रेलवे का एसडीजीएम बना दिया गया।एसडीजीएम का पद संवेदनशील श्रेणी में आता है और एक ऐसा अधिकारी जो ताउम्र एक ही रेलवे में अपनी पूरी नौकरी की हो ,उसको उसी रेलवे में एसडीजीएम बनाना नियम और नैतिकता दोनों के विरूद्ध है।

महाशय की नियुक्ति स्टोर सेवा में हुई थी, लेकिन इनको एच ए जी में प्रमोट करने के लिए पूर्व मध्य रेलवे के एसडीजीएम के पोस्ट को ही अपग्रेड कर दिया गया, आखिर एक व्यक्ति के लिए नियम में इतनी ढील क्यों दी जा रही है?
इसके पहले भी महोदय पूर्व मध्य रेलवे में उप मुख्य सतर्कता अधिकारी के पद पर पांच साल काम कर चुके हैं और अपने संस्कार में भ्रष्टाचार का प्रमाण दे चुके हैं, और उसके बाद सोनपुर मंडल में एडीआरएम और बेला में भी अपने संस्कारों का दर्शन करा चुके हैं । इनके कारनामों की फेहरिस्त लंबी है, कैसे अपनी जाति के CAO का वरदहस्त प्राप्त कर चक्का कारखाना,बेला में इन्होंने लूट के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। सोनपुर मंडल का एडीआरएम रहते हुए ठीकेदारों का ऐसा सिंडिकेट बनाया था कि वो आज भी चर्चा का विषय है। पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर में उप मुख्य सतर्कता अधिकारी रहते हुए इन्होंने ऐसे ऐसे केस बनाए कि कहिए मत, यदि उन सभी केसों की स्वतंत्र जांच हो जाए तो कारागृह में जाने से कोई भी रोक नहीं सकता है!
मुंह में राम बगल में छुरी वाली कहावत भी साहब पर सटीक बैठती है।कहा जा सकता है कि साहब ईमानदारी का चोला ओढ़कर कंबल में बैठकर घी पीने वाले शातिर चोर है। इनके द्वारा एसडीजीएम का पदभार संभालने के बाद पूर्व मध्य रेलवे में सीबीआई की 8- 9 रेड पड़ चुकी है लेकिन इनके सेहत पर कोई भी फर्क नहीं पड़ा है, बल्कि रेलवे बोर्ड ने इनकी अकर्मण्यता को पुरस्कृत करने का अपराध किया है, इनको पदोन्नति देकर उसी लूट तंत्र का हिस्सा बनाए रखा है,जिसके ये पुराने शातिर खिलाड़ी रहे हैं।

अभी के ही ऑर्डर का उदाहरण लें लिजिए, पूर्व मध्य रेलवे में पीसीएमएम का पद एच ए जी का है और एसडीजीएम का पद एस ए जी का है लेकिन साहब के लिए नियम उलट दिया गया है ।
पूर्व मध्य रेलवे में भ्रष्टाचार के इतनी तेजी से फलने फूलने में इन महाशय का भी योगदान है। कैश और कास्ट आधारित भ्रष्टाचार के संपोषक की भूमिका में हैं।जाति के आधार पर भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों का संरक्षण और ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न इनके कार्यप्रणाली का एक काला सच है। गैर बिरादरी के कर्मचारियों के प्रति इनकी नफरत और अपनी जाति के भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को बचाने के लिए किसी भी स्तर तक गिरना इनकी फितरत है।
यह भी सुनने में आया है कि शातिर एसडीजीएम जिसके कारनामों से नटवरलाल भी शर्मिंदा हो जाए, ने अपने गुर्गों का इस्तेमाल कर पूर्व मध्य रेलवे के अभूतपूर्व महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह जो आज कल “बटोरन सिंह” के नाम से चर्चित है, के खिलाफ ठोस सबूत जमा कर रखा है और उसको ब्लैकमेल कर अपना और अपनों का सारा काम कराए जा रहे हैं।
यह बात भी समझ से परे है कि एक एस ए जी अधिकारी को SWR का पीसीएमएम बनाया गया, आखिर एसडीजीएम ईसीआर महोदय को स्टोर के पोस्ट कोड पर ही एच ए जी में प्रमोट कर विजिलेंस में ही क्यों छोड़ दिया गया? इनमें ऐसी क्या खासियत है कि इनको ईसीआर से बाहर पोस्ट नहीं किया जा सकता है। प्रमोशन के बाद उसी पोस्ट पर बने रहने के पीछे उनकी क्या मंशा है,यह तो रेलवे बोर्ड वाले लाभार्थी ही बता पाएंगे। इनके एक विभागीय गुर्गे ने एक इलेक्ट्रिकल अधिकारी का झूठा केस बनाकर उसका जीवन नर्क कर दिया,भला हो उस मेम्बर का और सीवीसी का जिसने उसको दोषमुक्त किया। नियम के आड़ में इस तरह का शोषण इनके कार्यकाल में आम बात हो गया है। पिछले डेढ़ साल में सीबीआई ने अगर किसी एक रेलवे में सबसे ज्यादा छापा मारा है या दबिश दी है, गिरफ्तारियां की है तो वो ईसीआर है। कम से कम यह एसडीजीएम के लिए शर्म से डूब मरने के जैसा है, लेकिन निर्लज्जों को शर्म नहीं आती है। सीबीआई द्वारा की गई कार्रवाई इस बात को प्रमाणित करता है कि पूर्व मध्य रेलवे के सतर्कता विभाग ने अपने निहितार्थ ही काम कर सतर्कता विभाग के प्रतिष्ठा को मटियामेट कर दिया है। सतर्कता विभाग के अधिकारी एवं सतर्कता निरीक्षक सिर्फ खानापूर्ति में लगे हैं और कागजी खानापूर्ति करने के लिए एक दो कमजोर कर्मचारियों और ठीकेदारों के खिलाफ केस बनाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। पूर्व मध्य रेलवे के इस महाभ्रष्ट एसडीजीएम के पूरे कार्यकाल की जांच होनी चाहिए कि इन्होंने किस तरह से सतर्कता विभाग को एक जाति के अधिकारियों और कर्मचारियों के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का काम दे रखा है और किस तरह बड़े बड़े पैसे वाले ठीकेदारों के आगे नतमस्तक बना रखा है।
लेकिन एक बात तो तय है कि महोदय के पापों का घड़ा भर चुका है और बस इंतजार इस बात का है कि इनके पापों का घड़ा कब फूटता है लेकिन फूटना तो तय है।
अब जरूरत इस बात की है कि माननीय रेल मंत्री मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए पूर्व मध्य रेलवे का शुद्धिकरण अभियान की शुरुआत करें।
सफ़र जारी है…




