पटना: भारतीय रेल के पूर्व मध्य रेलवे जोन को “अभूतपूर्व ज़ोन” वैसे ही नहीं कहा जाता है, क्योंकि यहां के अभूतपूर्व महान महाप्रबंधक श्रीमान छत्रसाल सिंह ने जिस तरह से “धृतराष्ट्र” की भूमिका को चरितार्थ किया है, इनके मातहत अधिकारियों ने ही इनका नाम “बटोरन सिंह” रख दिया है। भारतीय इतिहास में 06 दिसम्बर बाबरी विध्वंस के रूप में दर्ज है लेकिन पूर्व मध्य रेलवे के इतिहास में 06 दिसम्बर 2025 व्यवस्था विध्वंस के रूप में दर्ज हों चुका है,जब महान् महाप्रबंधक श्रीमान छत्रसाल सिंह ने बेटे के शादी के नाम पर जो लूट का ग़दर मचाया था, आज़ भी कर्मचारियों और अधिकारियों के जेहन में है।साहब 31 अगस्त को रेल सेवा से अवकाश प्राप्त कर रहे हैं और अवकाश करने तक श्रीमान ने व्यवस्था को अवशेष बनाने की पूरी व्यवस्था कर दी है।
साहब का विशेष अभियान “लूट चले हम” अभियान अब अपने अंतिम दौर में है । सोनपुर , धनबाद और समस्तीपुर के धन उगाही कार्यक्रम की भारी सफलता के बाद भ्रष्ट कुनबे में उत्साह का माहौल है । और हो भी क्यों नहीं सरकारी मशीनरी का खुलेआम दुरुपयोग के बाद और सबसे बड़ी बात इसकी ऊपर तक जानकारी होने के बाद किसी भी तरह कार्यवाही नहीं होना ऐसे लोगों का मनोबल बढ़ाना जैसा है । खैर इस काहिल व्यस्था जो खुद ही भ्रष्टाचार में आकंठ तक डूबा है उससे क्या उम्मीद कर सकते हैं । दानापुर और दीन दयाल उपाध्याय मंडल में उत्सव की तैयारी अपने अंतिम चरण में है । बाकी मंडलों से बढ़ कर करने की चुनौती है, दानापुर मंडल जैसा भ्रष्ट मंडल भ्रष्टाचार की नई परिभाषा गढ़ने वाला है । दानापुर मंडल में भ्रष्टाचार चरम पर है और उसी की कमाई से जीएम और उनकी पत्नी की झोली भरने की तैयारी है । विभागों में भी होड़ मचा हुआ है, सारे विभागाध्यक्ष अपने अपने लूट की कमाई से जीएम और उनकी महारानी को महंगे महंगे तोहफ़ों से नवाज़ रहे हैं ।

ये मौक़ा कोई भी भ्रष्ट विभागाध्यक्ष छोड़ना नहीं चाहता है क्यूँकि यह कमाई का एक अतिरिक ज़रिया बन गया है । ठीकेदारों से मनमाफिक वसूली का मौक़ा मिल गया है । जीएम के सार्वजनिक श्राद्ध कार्यक्रम के नाम वसूली कर अपना भी उल्लू सीधा कर रहे है। कुछ विभाग पूरे कार्यक्रम को गुप्त तरीके से अंजाम दे रहे ताकि किसी को भनक ना लगे । ठीकेदारों और कर्मचारियों से खुल कर वसूली की जा रही है और उनको साफ़ बताया जा रहा कि उनका कोई मन नहीं है लेकिन जीएम का दवाब है कि उनकी पत्नी को महंगे गिफ्ट चाहिए । आपदा में अवसर , मौक़ा पर चौका अब पुरानी बात हो चुकी है , नया नारा है लूट की छूट , जितना मन उतना लूट । लूट चले हम अभियान के पैरोकारों का कहना है की गिफ्ट लेने वाले को कोई दिक्कत नहीं है गिफ्ट देने वालों को कोई दिक्कत नहीं है फिर बाकी लोगों के पेट में क्यों दर्द है । दिक्कत गिफ्ट लेने और देने की नहीं है बल्कि इस नाम पर चल रही लूट की खुली छूट से है , सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से है और की जा रही जबरदस्ती से है ।



