पटना: भारतीय रेलवे का वाणिज्य विभाग जिस पर रेलवे के “आय” की महती जिम्मेदारी है लेकिन दुर्भाग्यवश “आय” एवं “अन्य आय” के लिए “अन्याय” इस विभाग की नियति बन चुकी है! रेलवे के एक सजग कर्मयोगी कर्मचारी ने कहा कि जिस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी आम आदमी के शौच शुल्क में भी कमीशन की सोच रखते हैं,उस विभाग की दशा और दिशा क्या हो सकती है,सोचा और समझा जा सकता है! इसी सोच को परिलक्षित कर रहे हैं दक्षिण पूर्व रेलवे, चक्रधरपुर मंडल के वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान आदित्य चौधरी जो “अन्य आय” के लिए भारतीय रेलवे को राजस्व की चपत लगाने में कोई कोर छोड़ने को तैयार नहीं है!
पदस्थापना एवं स्थानांतरण आदेश जारी करने में “मनमानी” एवं अवैध वसूली तो एक सामान्य दिनचर्या है, लेकिन 11 जून 2026 को दक्षिण पूर्व रेलवे के टाटानगर स्टेशन पर गाड़ी संख्या 12833 जो कि अहमदाबाद से चलकर हावड़ा को जाती है, लीज पार्सल भान में लगभग दो टन ओवरलोडिंग को स्थानीय मीडिया ने अपने स्टिंग में उजागर किया है, और यह उनके कारनामों का दर्शन करने के लिए पर्याप्त है।
ऐसा भी नहीं है कि यह एक दिन का खेल है, पार्सल कर्मियों ने ही बताया कि लीज पार्सल भान में ओवरलोडिंग का खेल वर्षों से जारी है और टाटानगर स्टेशन से गुजरने वाली भिन्न-भिन्न गाड़ियों से लीज पार्सल भान से ओवरलोड माल टाटानगर स्टेशन पर उतार लिया जाता है और फिर दूसरे ट्रेन से गंतव्य स्थान तक बुक कर भेज दिया जाता है। ट्रेन संख्या 22824 नई दिल्ली भुवनेश्वर तेजस राजधानी एक्सप्रेस, ट्रेन संख्या 12876 नीलांचल एक्सप्रेस जो आनंद विहार टर्मिनल से पुरी, एवं ट्रेन संख्या 12129 आजाद हिन्द एक्सप्रेस जो पुणे से चलकर हावड़ा तक जाती है, उपरोक्त वर्णित सभी ट्रेनों के लीज पार्सल भान से ओवरलोड माल टाटानगर स्टेशन पर उतार लिया जाता है और फिर दूसरे ट्रेन से गंतव्य तक के लिए बुक कर भेजा जाता है।
भले ही स्थानीय मीडिया द्वारा ट्रेन संख्या 12833 अहमदाबाद हावड़ा एक्सप्रेस के पार्सल भान में ओवरलोडिंग के मामले को उजागर करने पर, लीजधारक को ₹ 78000 रूपए का दंड लगाकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया है लेकिन क्या यह संभव है कि पार्सल सिंडिकेट बिना रेलकर्मियों के मिलीभगत के ओवरलोडिंग कर सकता है? या यह ओवरलोड सामान टाटानगर में उतारा जा सकता है ?
चक्रधरपुर मंडल के वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान आदित्य चौधरी द्वारा पार्सल कर्मियों पर कोई भी कार्रवाई नहीं करना उनकी मंशा को परिलक्षित करता है! कारवाई करें भी कैसे करें क्योंकि इसी काम को सुरक्षित ढंग से सम्पादित करने के लिए ही तो उन्होंने खासमखास अमित चौधरी को टाटानगर स्टेशन पर पार्सल सुपरवाइजर के पद पर आसीन किया हुआ है, जबकि यदि ईमानदारी से इस मामले की जांच हो जाए तो ओवरलोडिंग के इस खेल का आसानी से पर्दाफाश हो सकता है। सिर्फ इस बात की जांच कर ली जाए कि उपरोक्त वर्णित ट्रेनों के जाने पर कितना माल उन ट्रेनों के गंतव्य स्टेशन के लिए टाटानगर स्टेशन से बुक कर भेजा गया है या भेजा जाता है।
खैर पार्सल सिंडिकेट का ओवरलोडिंग का खेल भारतीय रेल की संरक्षा एवं यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है फिर भी वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान आदित्य चौधरी की अनदेखी उनकी मंशा को परिलक्षित करता है जो कि एक शर्मशार करने वाली घटना है। तबादलों मे मनमानी का जो खुलासा railwellwishers.com ने किया था उसके बाद एक पत्र जारी कर नियमों का अनुपालन श्रीमान आदित्य चौधरी ने किस तरह कराया यह अपने आप में बड़ी गाथा साबित होगी जिसका खुलासा भी जल्द किया जायेगा. सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि चक्रधरपुर डिवीजन के वाणिज्य विभाग में तबादला-पोस्टिंग, ओवरलोडिंग, टेंडर, मैनुपुलेशन जैसे मामलों में दक्षिण पूर्व रेलवे का सतर्कता विभाग कब तक सोया रहेगा ?
सवाल तो यह भी उठता है कि जब वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान आदित्य चौधरी अपना निर्धारित कार्यकाल चक्रधरपुर मंडल में पूरा कर चुके हैं तब फिर एक्सटेंशन का आधार क्या है? क्या दक्षिण पूर्व रेलवे में आईआरटीएस अधिकारियों का कमी है ?
खैर इसका जबाब तो दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक महोदय को देना ही चाहिए! Railwellwishers का दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक महोदय से विनम्र निवेदन हैं कि इस मामले की तहकीकात कराकर न्यायोचित कारवाई कर अपनी सुचिता का दर्शन कराए।
उम्मीद है तो जिंदगी है..
सफ़र जारी है..





