पटना: पूर्व मध्य रेल का अभियंत्रण विभाग पूरी तरह से डिरेल हो चुका है । मंडलों में ऐसे ऐसे कोआर्डिनेशन बिठाये हुए है जिनका खर्च ट्रैक मेंटेनरों के पैसे से चलता है । ठीकेदारों से की जा रही वसूली से उनके खर्चे पूरे नहीं हो पा रहे । अनियंत्रित अभियंत्रण मुख्यालय का भी हाल बुरा है । पाॅलिसी में कोई कंसिस्टेंसी नहीं है । अफसर और ठीकेदार देख पाॅलिसी डिसीज़न लिए जा रहे । ऐसे निर्णय जो रेलवे बोर्ड के निर्णय के उलट है ऐसे निर्णय जो अभियंत्रण मुख्यालय के पहले लिए निर्णय के उलट है ।
मामला जोनल रेलवेज़ में CPWD- DSR 2023 के इम्प्लीमेंटेशन का है । रेलवे बोर्ड ने जुलाई 2025 के अपने पत्र के माध्यम से सारे रेलवेज़ में सिविल इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन वर्क्स में DSR 2023 को लागू करने का निर्देश दिया था । पूर्व मध्य रेल ने इंजीनियरिंग मुख्यालय के पत्र के माध्यम से 18.03.26 बिल्डिंग कॉस्ट इंडेक्स को मंज़ूरी देने के साथ DSR 2023 को लागू करने का आदेश दिया था स्पष्ट किया था कि आगे से सारे एस्टीमेशन और टेंडर DSR 2023 पर होंगे और साथ साथ ये भी स्पष्ट किया था कि DSR-2021 को डिस्कंटीन्यू कर दिया गया है । आदत से मजबूर अभियंत्रण विभाग के निकम्मे अधिकारियों ने ये निर्देश नहीं पढ़ा होगा और सारे टेंडर DSR 2021 पर किए जा रहे थे ।
गलती सुधारने की जगह इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने एक बहुत बड़ी गलती कर दी अपने 30.04.2026 के पत्र के ज़रिए एक बहुत ही अजीब निर्णय लिया जो उसके पहले के निर्णय और रेलवे बोर्ड के निर्देश के उलट था , ये बताया गया कि 18.03.26 के पहले से अनुमोदित कार्य में DSR 2021 का प्रयोग होगा । ये बहुत ही बचकाना निर्णय था । पहले तो ये नहीं बताया गया कि काम अनुमोदित कब से मना जाए उसके प्रशासनिक अनुमोदन से या फिर उसके डिटेल एस्टीमेट के अनुमोदन से । रेलवे की जानकारी रखने वाले पुराने कर्मचारियों और अधिकारियों से बात करके पता चला है कि जब तक डिटेल एस्टीमेट सैंक्शन नहीं होता तब तक टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती है ।
बहुत सारे मामले में यह देखा गया है कि काम बहुत पहले से अनुमोदित होते है किसी किसी मामले में सालों पुराना अनुमोदन होता है बहुत सारे मामलों में महीने लग जाते है । इंजीनियरिंग विभाग के इस घटिया निर्णय के कारण IREPS में हमेशा कन्फ्यूज़न की स्थिति बनी रहेगी । दूसरी बात पुराने रेट और नए रेट पब्लिश होने के कारण संवेदकों में रेट को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहेगी । टेंडर कमेटी को रेट का निर्णय लेने में परेशानी होगी । कुल मिलाकर असमंजस अव्यस्था और ऊहापोह की स्थिति हो जाएगी । इंजीनियरिंग मुख्यालय को यह चाहिए था कि बिल्डिंग कॉस्ट इंडेक्स जारी होने की तिथि के बाद जारी सारे टेंडर नए इंडेक्स पर होने चाहिए था अगर कोई टेंडर पुराने DSR पर भी तो उसको कैंसिल कर कर नए DSR पर करना चाहिए था ।
पड़ताल करने के बाद पता चला है कि मंडल के अभियंत्रण विभागों ने 18.03.26 के पत्र को समय से लागू नहीं किया उसका कारण था टेंडर्स में फेवरेट कांट्रैक्टर्स का एल – 1 होना । भ्रष्ट अधिकारी कमीशन के चक्कर में पुराने DSR पर टेंडर खोलते गए और कमीशन खाते गए । उन्होंने अपने पाप में मुख्यालय को शामिल कर लिया । आश्चर्यजनक बात ये है कि जिसने सही किया मुख्यालय और रेलवे बोर्ड का निर्देश माना उसको प्रताड़ना झेलना पड़ा । ये सब एक साजिश का हिस्सा है । 18.03.26 के पत्र के माध्यम से बिल्डिंग कॉस्ट इंडेक्स को अपनाने की बात की गई थी DSR 2023 को लागू करने के निर्देश के साथ साथ DSR 2021 को बंद का आदेश दिया गया था । बाद में रिवर्स गियर लगा दिया गया । 30.04.26 का पत्र रेलवे बोर्ड के नियम के उल्लंघन है । कामचोर और भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने और रेलवे में कन्फ़्यूज़न की स्थिति को बढ़ाने के लिए 30.04.26 का पत्र जानबूझ कर जारी किया गया ।
ये भ्रष्ट अधिकारी और कतिपय भ्रष्ट ठीकेदारों का जोड़ी का काम है जिसने अभियंत्रण मुख्यालय शामिल है । अभियंत्रण मुख्यालय को इस पत्र को तुरंत वापस लेना चाहिए । रेलवे बोर्ड का इस मामले में 1970 से निर्देश जारी है जिसको 2022 के पत्र में भी स्पष्ट किया गया है। जो टेंडर 18.03.26 के पत्र के बाद DSR 2021 पर खोले गए और फाइनल किए उनको वैसे ही रहने दिया जाए । वैसे टेंडर जो DSR 2021 पर ओपन हुए है उनको भी वैसे ही फाइनल कर दिया जाए , वैसे टेंडर जो डीएसआर 2021 कॉल किए गए है और अभी तक ओपन नहीं हुए है उनको कैंसिल कर DSR 2023 कॉल करने का आदेश दिया जाए । रेलवे बोर्ड के आदेश के विपरीत जारी किए गए 30.04.26 के पत्र को अविलंब वापस लिया जाना चाहिए।
क्या ऐसे ही चलेगा पूर्व मध्य रेल??





