पटना: सफ़र के दौरान रेलवे के एक कर्मयोगी कर्मचारी ने कहा था कि वेतन के अलावा किसी भी भत्ता के भुगतान के लिए पहले भुगतान करना पड़ता है क्योंकि कार्मिक का मूल मंत्र है “पहले भुगतान तब निदान”! और पूर्व मध्य रेलवे का डीडीयू मंडल कार्मिक विभाग के उपरोक्त मूल मंत्र को परिलक्षित करता दिखाई दे रहा है! पूर्व मध्य रेलवे के डीडीयू मंडल में साइकिल अलाउंस एरियर भुगतान को लेकर कर्मचारियों में लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा है। विडंबना यह है कि एक समय कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को भी साइकिल अलाउंस का लाभ दिया जा रहा था, जबकि वास्तविक फील्ड में कार्य करने वाले पात्र कर्मचारी आज तक अपने वैध एरियर के भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार यह एरियर वर्ष 2017 से ही देय है।
कर्मचारी संगठनों के निरंतर प्रयास, वार्ता और दबाव के परिणामस्वरूप कई मंडलों में इस दिशा में प्रगति हुई है। सोनपुर और धनबाद मंडल में कर्मचारियों को साइकिल अलाउंस का एरियर भुगतान किया जा चुका है, लेकिन डीडीयू मंडल में स्थिति अब भी निराशाजनक बनी हुई है।
25 मार्च 2026 को संबंधित पत्र जारी होने के बाबजूद आज़ तक भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है, जबकि अन्य मंडलों में पिछले महीने ही एरियर का भुगतान कर दिया गया। कर्मचारियों को लगातार आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन वास्तविक भुगतान नहीं हो रहा। वर्षों से लंबित और विलम्बित इस मामले में फाइलों का अनावश्यक रूप से लटकाना और प्रक्रिया में देरी होना गंभीर प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
कर्मचारियों का कहना है कि कुछ स्तरों पर मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जिसके कारण वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों का भी अपेक्षित अनुपालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है।इसका सीधा नुकसान उन कर्मचारियों को उठाना पड़ रहा है जो वर्षों से अपने वैधानिक अधिकार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
साइकिल अलाउंस का एरियर प्रत्येक पात्र कर्मचारी का अधिकार है, इसलिए इस मामले में रेल प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करते हुए लंबित एवं विलंबित भुगतान की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को उनका वैध हक बिना किसी और विलम्ब के प्राप्त हो सकें।
सबसे आश्चर्यजनक और चिंताजनक बात यह है कि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति वर्ष 2018,2019 और वर्ष 2020 में हुई थी तथा हाल ही में वर्ष 2025 – 26 में उनका प्रमोशन हो गया, उनके मामले में भी समय रहते भुगतान नहीं किया गया, परिणामस्वरूप प्रमोशन के बाद उनके साइकिल अलाउंस एरियर का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो गया। इससे संबंधित कर्मचारियों को 5-6 वर्षों के एरियर का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि कर्मचारियों के वैध अधिकारों की उपेक्षा का भी गंभीर उदाहरण है। यदि समय पर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई होती तो कर्मचारियों को अपने हक के इस आर्थिक नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता।
सवाल यह भी उठता है कि जब सोनपुर और धनबाद जैसे मंडलों में कर्मचारियों को एरियर का भुगतान किया जा चुका है तो आखिर डीडीयू मंडल ही हर बार इतना पीछे क्यूं रह जाता है?हर आवश्यक मामले में अनावश्यक देरी, फाइलों का लंबित रहना और निर्देशों के अनुपालन में शिथिलता का क्या कारण है?जब अन्य मंडल समयबद्ध तरीके से कर्मचारियों के वैध दावों का निपटारा कर सकते हैं तो डीडीयू मंडल में ही बार बार ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न होती हैं?यह एक गंभीर प्रश्न है जिसका उत्तर प्रभावित कर्मचारी जानना चाहते हैं। प्रशासनिक स्तर पर इस प्रकार की उदासीनता और अनुशासनहीन कार्यप्रणाली न केवल कर्मचारियों का भरोसा कमजोर करती है, बल्कि विभाग की कार्यक्षमता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि डीडीयू मंडल के मंडल रेल प्रबंधक कर्मचारियों को शीघ्र एरियर भुगतान हेतु कितना त्वरित कार्रवाई करते हैं।
मंडल रेल प्रबंधक महोदय के त्वरित संज्ञान एवं त्वरित निदान की प्रतीक्षा में..
सफ़र जारी है..





