ECR: “लेखा” का “खेला”! “खलनायक” को बनाया “नायक”

ECR: “लेखा” का “खेला”! “खलनायक” को बनाया “नायक”

हाजीपुर: भारतीय रेलवे का “अभूतपूर्व” ज़ोन पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर अपनी उपलब्धियों के बजाए अपने काले कारनामों के लिए हमेशा ही चर्चा के केंद्र में रहा है।कारण जो भी हो लेकिन जब पूर्व मध्य रेलवे के महामहिम महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह के कार्यकाल में सीबीआई की सात सात रेड़ पड़ी तो पूर्व मध्य रेलवे की हकीकत “लूट चले हम”अभियान का पर्दाफाश हो गया, और जब अधिकारियों के कारनामों का पर्दाफाश हो गया तो अधिकारियों के कुकर्मों पर पर्दा डालने के लिए एकमुश्त 110 लेखा कर्मियों का स्थानांतरण आदेश जारी कर महाप्रबंधक महोदय ने अपनी सुचिता का दर्शन कराने का प्रयास किया लेकिन क्या है न सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के दीवारों से, ठीक वही हुआ है जो कि शासन एवं प्रशासन के लिए शर्मशार करने वाली है।

पीएफए कार्यालय द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश संख्या O/O No: NG/37 of 2026 dated 25.05.2026 जो कि AFA/Admin राजीव कुमार द्वारा जारी किया गया है, पूर्व मध्य रेलवे के लेखा विभाग की दशा दिशा और दुर्दशा का दर्शन करने के लिए पर्याप्त है।

उपरोक्त वर्णित स्थानांतरण आदेश के माध्यम से जिन दस कर्मियों का स्थानांतरण आदेश जारी किया गया है उसमें से क्रम संख्या 08 से लेकर 10 तक वर्णित कर्मियों का इतिहास दागदार ही नहीं सीबीआई द्वारा की गई कार्रवाई में दर्ज है लेकिन फिर भी फर्जी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर लेखा के “खलनायक” जो कि पीएफए के लिए मुख्य “नायक” की भूमिका में हैं AFA/Admin राजीव कुमार द्वारा क्रम संख्या 08 पर वर्णित विनय कुमार Sr SO (A)का स्थानांतरण डीडीयू से हाजीपुर ,क्रम संख्या 09 पर वर्णित कुंदन कुमार Sr SO (A) का स्थानांतरण समस्तीपुर से हाजीपुर एवं क्रम संख्या 10 पर वर्णित सतीश कुमार Sr SO (A) समस्तीपुर से सोनपुर कर दिया गया है जबकि विदित है कि उपरोक्त वर्णित सभी कर्मचारियों का स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर किया गया था तो अब सोचने और समझने वाली बात है कि यह कैसे संभव हुआ है?

बात सोचने और समझने वाली है कि जिन तीन कर्मियों को सीबीआई ने अपनी कार्रवाई में दर्ज किया है और प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण आदेश जारी किया गया,सीटीजी का भी भुगतान हो गया और फिर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट आधार पर मुख्यालय में पदस्थापना क्या दर्शाता है स्पष्ट है उपरोक्त स्थानांतरण आदेश जारी करने में भारी लेन देन हुआ है और इस आरोप से पीएफए भी नहीं बच सकते क्योंकि AFA/Admin राजीव कुमार पीएफए के खासमखास “दुलरुआ” अधिकारी हैं !

पीएफए के खासमखास “दुलरुआ”इसलिए क्योंकि अधिकारियों के उपलब्धता के बाबजूद राजीव कुमार दोहरे प्रभार में हैं और इनके जिम्मे प्रशासन के अलावा व्यय का भी जिम्मा है। बात तो सोचने वाली है कि अधिकारियों के उपलब्धता के बाबजूद दोहरा प्रभार पीएफए के अपरिमित प्यार को ही दर्शाता है और ऐसा हो भी तो क्यों न हो क्योंकि कुछ भी जो होता है परस्पर होता है, AFA/Admin राजीव कुमार जो दोहरे प्रभार में हैं पीएफए के श्रीमती जी के लिए “उड़नखटोला” चार चक्का वाहन के व्यवस्था के वाहक है तभी तो इन्हें “व्यय” जैसे विभाग का प्रभार है।

पीएफए के खासमखास दुलरुआ AFA/ Admin राजीव कुमार के कारनामों की फेहरिस्त लंबी है जो कि जांच का विषय है लेकिन क्या पूर्व मध्य रेलवे के “महाशरीफ” पीएफए इस बात का जबाब देंगे कि किस आधार पर AFA विमलेश कुमार सहित चार लेखा कर्मियों का पदस्थापना केन्द्रीय अस्पताल, पटना में किया गया क्योंकि आज़ भी केंद्रीय अस्पताल पटना के विपत्रों का भुगतान हाजीपुर मुख्यालय से ही हों रहा है तो बात सोचने वाली ही नहीं चिंता करने वाली है कि आखिर एक AFA सहित चार लेखा कर्मियों का पदस्थापना केन्द्रीय अस्पताल में क्यों किया गया?? क्योंकि जब कोई काम नहीं है और दाम नहीं है तो पांचों केंद्रीय अस्पताल में उपस्थिति दर्ज कर घर पर विश्राम कर रहे हैं!

तो क्या ऐसे ही चलेगा पूर्व मध्य रेल!

सफ़र जारी है…

Leave a Comment

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *