समस्तीपुर: “अभूतपूर्व” पूर्व मध्य रेलवे का समस्तीपुर मंडल जो कि “मस्तीपुर” मंडल से विख्यात है और विख्यात इसलिए हैं क्योंकि यहां मस्ती करने वाले अधिकारियों की भरमार है और तभी तो यहां भ्रष्टाचार और अत्याचार की अनियंत्रित रफ्तार है और लगता है मजबूत इच्छाशक्ति के धनी मंडल रेल प्रबंधक महोदय भी लाचार है!
समस्तीपुर मंडल के वरीय मंडल अभियंता समन्वय संजय कुमार लम्बे समय से समस्तीपुर मंडल में ही विराजमान हैं और जब लम्बे समय से समस्तीपुर मंडल में ही विराजमान हैं तो अपने आप को समझ बैठे शक्तिमान है! भले ही अपने आप को “शक्तिमान” समझ बैठे है लेकिन “अनियंत्रित” अभियंत्रण की व्यवस्था इनसे परेशान हैं।
आपको बताते चलें कि संजय कुमार दिसम्बर 2019 से लेकर फरवरी 2023 तक Dy.CE.CONS.SPJ के पद पर आसीन थे फिर फरवरी 2023 से जून 2023 तक SR.DEN.(2)SPJ के पद पर आसीन रहे थे और फिर जून 2023 से लेकर आज तक SR.DEN.CORD.SPJ के पद पर विराजमान हैं।
इन्होंने अपने कारनामों से भारतीय रेल को तो लूटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है लेकिन शर्म की बात है कि इन्होंने कर्मचारियों को तो आर्थिक रूप से लूटा ही है उनके भावनाओं एवं भविष्य के साथ भी खिलवाड़ कर अपने कुत्सित मानसिकता का दर्शन कराया है।
रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ, पटना द्वारा आयोजित GDCE/ALP/ 2023 के माध्यम से समस्तीपुर मंडल के 34 अभ्यर्थियों का चयन ALP/Elect.(OP) के पद पर हुआ। इन 34 अभ्यर्थियों को 25.05.2026 तक आगे की ज्वायनिंग/प्रशिक्षण के लिए मंडल के कार्मिक विभाग में रिपोर्ट करना था, अन्य विभाग ने तो अपने यहां से चयनित अभ्यर्थियों को विरमित कर दिया लेकिन “अनियंत्रित” अभियंत्रण विभाग के “शक्तिमान”वरीय मंडल अभियंता समन्वय संजय कुमार ने टालमटोल एवं मोलभाव की नियत से स्टाफ की कमी बता कर अभियंत्रण विभाग से चयनित 28 अभ्यर्थियों को विरमित नहीं किया। यह तो चयनित अभ्यर्थियों के साथ सरासर अत्याचार हैं और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ ही तो किया गया है।यह भी विचारणीय है कि सभी चयनित अभ्यर्थी जो ट्रैकमैन के पद पर आसीन हैं, एक ही सेक्शन के तो नहीं है!


और सबसे बड़ी बात यदि अभियंत्रण विभाग में स्टाफ की कमी है तो “शक्तिमान” वरीय मंडल अभियंता समन्वय संजय कुमार के आवास पर दर्जन भर ट्रैकमैन क्या कर रहे हैं??
कहते हैं ना 02 लाख की नौकरी और 10 लाख का चाकर!
क्या यह वरीय मंडल अभियंता समन्वय की अंग्रेजियत नहीं?
खैर इनके कुकर्मों और कारनामों का पर्दाफाश Railwellwishers अवश्य ही करेगा।
इस मामले में अभ्यर्थियों के साथ न्याय की व्यवस्था शीघ्रता शीध्र सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रमुख मुख्य अभियंता महोदय की है और उम्मीद करते हैं वो ऐसा करेंगे भी क्योंकि रेलवे बोर्ड का स्पष्ट फरमान है कि पदोन्नति पाए कर्मियों को विरमित करने में अनावश्यक विलम्ब नहीं होना चाहिए और विरमित नहीं करने वाले पर न्यायोचित कारवाई भी सुनिश्चित होना चाहिए।
उम्मीदें हैं तो जिंदगी है..
सफ़र जारी है…





