पटना: पूर्व मध्य रेलवे के लेखा विभाग में ट्रांसफर पोस्टिंग स्कैम कोई नई बात नहीं है लेकिन पिछले ५-६ सालों में बीच का कुछ समय छोड़कर ये स्कैम एक नए रूप में आया है । पूर्व मध्य रेलवे के शुरुआती सालों में यह खेल जिसकी लाठी उसकी भैंस के अनुसार होता था कुछेक मामलों में पैसे का खेल भी होता था । बाद में इस सदी के दूसरे दशक के शुरुआत में ये खेल जात-पात पर आकर टिक गया था।
२०२५ के शुरुआत में नए पीएफए के आने के बाद जो पूर्व मध्य रेलवे के पुराने खिलाड़ी रहे हैं ट्रांसफर स्कैम को एक नया आयाम दिया गया है । कर्मचारियों और कनिष्ठ अधिकारियों के मामले में यह पूरी तरह जात-पात के आधार पर हो रहा है लेकिन अधिकारियों के स्तर पर ये खेल पैसों का होकर रह गया है । ख़ासकर मंडल में जाने का रेट तय हो रहा है। इसके अलावा भी बहुत सारे फैक्टर ट्रांसफर पोस्टिंग तय कर रहे हैं । कर्मचारियों और कनिष्ठ अधिकारियों में कुछेक को लेन देन के पुराने संबधों के आधार पर भी फायदा मिला है

धनबाद मंडल में एक अधिकारी के ३ साल पूरा होते ही तुरंत हटा दिया गया लेकिन एक ऐसे अधिकारी की पोस्टिंग की गयी जिसका एक साल में SAG आने वाला है ऊपर से इसमें कोई गलती नहीं है लेकिन ये सवाल उठता है कि पाँच साल से हाजीपुर मुख्यालय में पोस्टेड अधिकारी को दरकिनार क्यों किया गया ? जिस अधिकारी को इनके आका ने बदनाम किया था आख़िर उसको कब तक सजा दी जाएगी? एक अधिकारी जिसको झूठे कंप्लेन के आधार पर सोनपुर से समय से पहले हटा दिया गया था उसको पोस्ट क्यों नहीं किया गया?
सवाल बहुत हैं लेकिन जवाब एक ही है यह पूरा खेल एक शातिराना अंदाज़ में खेला गया यहाँ बहुत चालाकी से बैकवर्ड फॉरवर्ड के जातिए बैलेंसिंग किया गया और पैसे के वसूली की गयी । दानापुर में जिस अधिकारी की पोस्टिंग की गयी वो पहले से मंडल में थे उनको मंडल से मंडल भेजा गया लेकिन उनसे पहले मंडल या फील्ड में पोस्टेड अधिकारियों को दानापुर के लायक नहीं समझा गया। इसका कारण सिर्फ और सिर्फ पीएफए ही बता पाएंगे । धनबाद के मामले में वो एक तीर से दो शिकार करने में सफल हुए लेकिन वो एक जाति विशेष को नाराज नहीं करना चाहते थे इसलिए उस जाति के एक अधिकारी जो पाँच साल से हाजीपुर में है उसको साइडलाइन करके उसी जाति के दूसरे अधिकारी को दानापुर में पोस्ट कर दिया ।
धनबाद में भी वो दो बार पोस्टिंग कर पाएंगे मतलब डबल इनकम । साहब पूर्व मध्य रेलवे निर्माण संगठन के पुराने खिलाड़ी रहे हैं और पिछले २२-२३ साल से पूर्व मध्य रेलवे में ही हैं और उसमें से भी लगभग ९-१० साल निर्माण संगठन में ही पोस्टेड रहें हैं । एक जाति विशेष के लोगों से विशेष लगाव रहा है । निर्माण संगठन में पोस्टेड एक वरीय अधिकारी का ट्रांसफर सिर्फ इसलिए कर दिया गया क्यूंकि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर में वो बाधा बन रहे थे।
पूर्व मध्य रेलवे में आने के बाद २५-२६ सालों में इनका कुल तीन बार ट्रांसफर हुआ है दो बार प्रमोशन पर और एक बार पनिशमेंट में लेकिन हर बार कुछ महीने में ही ये वापस आ जाते हैं जैसे कि इनके बिना पूर्व मध्य रेलवे चल ही ना पाएगा । ये पिछले २२-२३ सालों से पूर्व मध्य रेलवे में ही हैं। रेलवे बोर्ड को ऐसे अधिकारियों के बारे में अच्छे से सोचना होगा और रिटायरमेंट के नाम पर होम पोस्टिंग पर पुनर्विचार करना होगा।
अभी कुछ दिनों पहले ही रेलमंत्री महोदय ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2026 के 52 सप्ताह में 52 सुधार करेंगे तो क्या पूर्व मध्य रेलवे के लेखा विभाग में स्थानांतरण घोटाला जो एक कारोबार बन गया है, में सुधार करने का ईमानदार विचार करेंगे!





