पटना: वर्ष 1980 में एक फिल्म आई थी “हम नहीं सुधरेंगे”, ठीक वही हाल देखने को मिल रहा है पूर्व मध्य रेलवे के आरपीएफ विभाग में, जहां सुरक्षा के बजाय शराब तस्करी, अवैध वसूली मुख्य कारोबार बन गया है।
पूर्व मध्य रेलवे का आरपीएफ विभाग अपनी उपलब्धियों के बजाय अपने “कुकर्मों” को लेकर फिर एक बार चर्चा में हैं और विभाग के प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त “मोगाम्बो खुश हुआ”की तर्ज पर कान में तेल डालकर सो रहे हैं और यदि नहीं सो रहे हैं तो फिर ऐसा क्यूं हो रहा है! जैसा दृश्य 20 दिसम्बर 2025 को रात्रि में सीमांचल एक्सप्रेस के यात्रियों को देखना पड़ा है।
हालिया फायरिंग की घटना गंभीर!
रेलवे सुरक्षा बल, दानापुर के क्षेत्राधिकार आरा – कुल्हड़िया के मध्य कि.मी. संख्या 586/19 पर गाड़ी संख्या 12488 (आनंद बिहार – जोगबनी सीमांचल एक्सप्रेस) को एसीपी कर शराब उतारने समय आरपीएफ के एस्कार्ट पार्टी द्वारा अपने कर्तव्यों का पालन करने के प्रयास के प्रतिरोध में शराब तस्करों द्वारा जो पत्थरबाजी एवं फायरिंग हुई वो तो चिंता का विषय है लेकिन आरपीएफ के प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त के लिए शर्म की बात है लेकिन जब मंशा ही हो कि “लूट सको तो लूट” तो इससे बुरा स्थिति क्या हो सकता है!
दानापुर मंडल एवं डीडीयू रेलखंड अन्तर्गत विशेषकर बिहटा, कुल्हड़िया, दिलदारनगर, बक्सर,आरा, दानापुर एवं पटना सेक्शन में वर्षों से एक संगठित शराब तस्करी एवं अपराध नेटवर्क सक्रिय हैं,जिसे दुर्भाग्यवश रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कुछ पदस्थ अधिकारियों का प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष संरक्षण प्राप्त है।इस कारण न केवल रेलवे की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि यात्रियों एवं आरपीएफ कर्मियों की जान पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
पूर्व में दो आरपीएफ कर्मियों की हत्या के बाबजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं!
यह अत्यंत चिंताजनक है कि लगभग एक वर्ष पूर्व दो आरपीएफ कर्मियों की वीभत्स हत्या हो चुकी है, फिर भी न तो संगठित तस्करी नेटवर्क ध्वस्त किया गया और न ही संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कोई प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई की गई। इसके विपरित, संलिप्त अधिकारियों को निकटवर्ती पोस्टों में समायोजित/स्थानांतरित कर दिया गया , जिससे संगठित अपराध निर्बाध रूप से चलता रहा। जो अधिकारी या स्टाफ इसमें शामिल नहीं थे, उन्हें ही दंडस्वरूप दूरस्थ मंडलों में भेजा गया।
डीडीयू – दानापुर सेक्शन में संगठित नेटवर्क
प्राप्त जानकारी के अनुसार दिलदारनगर क्षेत्र से ही शराब की खेप ट्रेनों में चढ़ाई जाती है, जहां पूर्व में भी कई बार बरामदगी हो चुकी है। वहां पदस्थ कुछ अधिकारियों द्वारा शराब तस्करों के विरूद्ध पूर्व में कारवाई की गई थी लेकिन उनका पनिशमेंट पोस्टिंग होने पर पुनः उसी नेटवर्क को संरक्षण मिल रहा है।
यह भी चर्चा में हैं कि सीआईबी स्तर तक नेटवर्क फैला हुआ है, जिसके माध्यम से डीडीयू से पटना तक अवैध संचालन किया जा रहा है। कुछ अधिकारी वर्षों से एक ही सेक्शन में जमें हुए हैं, जिससे अपराधियों का मनोबल अत्यधिक बढ़ गया है।
एस्कार्ट पार्टी की असहाय स्थिति!
जब तस्करों को विभिन्न स्टेशनों पर पदस्थ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त हो,तब सीमित संसाधनों वाली एस्कार्ट पार्टी किस प्रकार ऐसे हथियारबंद गिरोह का सामना करेगी? हस्तक्षेप करने पर उन्हें गोली का निशाना बनाया जाता है, और न करने पर विभागीय कार्रवाई का भय रहता है।यह स्थिति आरपीएफ कर्मियों को बलि का बकरा बना रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा एवं यात्री सुरक्षा का प्रश्न!
बिहटा एवं आसपास का क्षेत्र राष्ट्रीय महत्व का है, जहां IIT, PATNA,NIT, एयरफोर्स स्टेशन,NDRF मुख्यालय जैसे संस्थान स्थित है।ऐसे क्षेत्र में इस प्रकार का अपराध न केवल रेलवे बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।
मामला गंभीर एवं संगीन है फिर भी आरपीएफ विभाग प्रमुख को व्यवस्था रंगीन दिखाई दे रहा है जो कि यात्रियों एवं रेलकर्मियों के लिए गमगीन हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि भारतीय रेल के टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रेट रेलमंत्री यात्रियों एवं रेलकर्मियों को गमगीन माहौल से कैसे और कब बाहर निकालते हैं, और उनकी यात्रा को Happy journey में तब्दील करते हैं।






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