लम्बी अवधि तक एक ही जगह पदस्थापना : पूर्व मध्य रेलवे का एक असाध्य रोग !

ऐसा सुना है कि लम्बी अवधि तक एक ही जगह पदस्थापना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता हैं, भ्रष्टाचार को बढ़ावा तो देता ही हैं अत्याचार को भी बढ़ावा देता हैं। संवेदनशील श्रेणी के पदों पर पदस्थापना का एक समय सीमा निर्धारित भी हैं, फिर भी पूर्व मध्य रेलवे का कोई भी विभाग इससे अछूता नहीं हैं। ऐसा भी नहीं हैं कि इस रोग का इलाज नहीं हैं, इलाज तो हैं, पर यह रोग जो सबको दिखता हैं उनको नहीं दिखता हैं जिन्हें दिखना चाहिए और दिखें भी तो कैसे दिखें जहां न्याय और नीति दोनों लक्ष्मी के खिलौने हैं ,वह जैसे चाहती हैं, नचाती हैं! भारतीय रेल का निर्माण संगठन जिस पर नव निर्माण की जिम्मेवारी हैं वो भी इस बीमारी से अछूता नहीं हैं। निर्माण संगठन का विधुत विभाग इस गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं, भले ही निर्माण संगठन इस बीमारी से ग्रस्त हैं लेकिन इस बीमारी को फैलाने वाले मस्त हैं और काहे मस्त हैं यह भी कोई कहनें की बात हैं!


लेकिन यह बात तो कहने लायक है कि आखिर क्या कारण हैं कि श्री जैकी अनवर सहायक विद्युत अभियंता (उत्तर) अपने पद पर 29.03.2019 से लेकर आज तक कैसे आसीन हैं! सहायक विद्युत अभियंता के पद पर पदोन्नति के पूर्व श्रीमान जैकी अनवर जी ने लगातार चौदह सालों तक निर्माण संगठन में रहकर ही निर्माण किया है। खैर, railwellwishers के द्वारा नींद से जगाने पर तबादला आदेश तो निर्गत हुआ है लेकिन तबादला आदेश का क्रियान्वयन अभी तक तो नहीं हुआ है, क्रियान्वयन पर अंदेशा इसलिए कि क्योंकि जब पूर्व के तबादला आदेश का क्रियान्वयन अभी तक नहीं हुआ है तो इसका भी क्या भरोसा! श्री वाई के यादव,एस ई ई,( उत्तर) 24.10.2018 से ही निर्माण संगठन में पदस्थापित हैं, वैसे इनके तबादले का आदेश निर्गत हुए महीना बीत चुका हैं अभी निर्माण संगठन से मुक्त नहीं किया गया है शायद एक कारण यह भी हो सकता है कि “अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं”। श्रीमान दीनानाथ तिवारी भी 12.11.2018 से ही सहायक विद्युत अभियंता (दक्षिण) के पद पर विराजमान हैं, लम्बी अवधि से एक ही पद पर स्थिर मान हैं और जब लम्बी अवधि से स्थिर मान हैं तभी तो शक्तिमान है।


यह तो चिंतन का विषय हैं कि जब निर्माण संगठन ही इस रोग से ग्रस्त हैं तो स्वस्थ निर्माण कैसे संभव है!सिस्टम को दुरुस्त और तंदुरुस्त रखने की जिम्मेवारी कार्मिक की हैं जो कि खुद इस असाध्य रोग से ग्रस्त हैं और सिस्टम के आगे नतमस्तक हैं! अब ले देकर बचता है रेलवे का “सतर्कता विभाग” जिन्हें कारवाई करने में अतिरिक्त सतर्कता बरतना पड़ता है काहे कि सवाल कैडर का हैं!तब इस रोग का जो असाध्य बन चुका हैं, उपचार क्या है,यह विचार करने की जिम्मेवारी महाप्रबंधक महोदय की बनती हैं!


Railwellwishers पूर्व मध्य रेलवे के “ईमानदार”महाप्रबंधक महोदय से विनम्र अनुरोध और उम्मीद करता है कि इस असाध्य रोग का शीध्र ही उपचार कर निर्माण संगठन को स्वस्थ और मजबूत करने का प्रयास करेंगे। उम्मीदें हैं तो जिंदगी हैं.. सफ़र जारी है..!

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4 Comments

    • अरविंद कुमार

      केवल पैसा के लिए ब्लैक करना

  1. Suresh Kandwal

    भ्रष्टाचार के विरुद्ध आपका एक सराहनीय प्रयास।

  2. अरविंद कुमार

    केवल पैसा के लिए ब्लैक करना

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