पिछले दिनों एक चर्चित फिल्म आई थी “द कश्मीर फाइल्स”, फिल्म में एक डायलॉग हैं,”सरकार किसी की भी हो, सिस्टम तो हमारा ही चलता है ” फिल्म के इस डायलॉग को चरितार्थ किया है पूर्व मध्य रेलवे, दानापुर के विद्युत विभाग के वरीय प्रशाखा अभियंताओं ने जो कि राजधानी के पटना जंक्शन पर वर्षों से पदस्थापित हैं। भले ही कार्यालय के दीवारों पर “कर्म ही पूजा हैं”लिखा पढ़ने को मिले लेकिन काम इनका दूजा हैं और अजुबा हैं, ड्यूटी के दौरान शराब की पार्टी करना और वो भी तब जबकि राज्य में शराब की बिक्री एवं सेवन निषेध हो, शराब पार्टी में शामिल रेलकर्मियों की सिस्टम पर पकड़ और उनकी अकड़ का दर्शन करने के लिए पर्याप्त हैं। विधुत विभाग के रेलकर्मियों द्वारा ड्यूटी के दौरान शराब पार्टी करना अन्य विभाग के कर्मियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। रेल कर्मियों के बीच इस बात की खुलेआम चर्चा हैं कि शराब पार्टी में शामिल अभियंताओं का अपना नेटवर्क हैं और शराब के अवैध कारोबार से अकुत धन सम्पत्ति तो अर्जित किया ही हैं , रेलवे को भी यात्रा भत्ता के माध्यम से चुना लगाया हैं।
मध निषेध विभाग ने भी दिलदारनगर और दीन दयाल उपाध्याय नगर स्टेशन से शराब लाने की पुष्टि की हैं।


Railwellwishers को भी ऐसी जानकारी मिली है कि शराब लाने के लिए एक रेलकर्मी को लगातार दिलदारनगर और दीन दयाल उपाध्याय नगर स्टेशन के लिए ड्यूटी लगाई जाती हैं और उपरोक्त कर्मी को यात्रा भत्ता का भुगतान किया जाता हैं ।
मध निषेध विभाग ने तो अपना काम कर दिया हैं,अब रेल प्रबंधन की जिम्मेवारी बनती हैं और मुश्किल भी नहीं हैं,बस उस कर्मचारी की यात्रा भत्ता की जांच और दिलदारनगर और दीन दयाल उपाध्याय नगर स्टेशन पर ड्यूटी लगाने वाले अभियंता की जांच पुरे मामले से पर्दा उठा सकता हैं । रेल प्रबंधन के लिए यह चिंतन का विषय हैं कि रेल कर्मियों द्वारा शराब का कारोबार और यात्रा भत्ता का भी भुगतान कहां तक उचित हैं!



Railwellwishers पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक महोदय से निवेदन करता है और उम्मीद करता हैं कि विधुत विभाग के अभियंताओं द्वारा लगाए गए इस “दाग” से जो कि सर्फ एक्सेल से छुटने वाला नहीं है, न्यायोचित कारवाई ही विद्युत विभाग को “अंधकार” से प्रकाश की दिशा में ले जा सकता हैं।
बाकी जो है सो तो हइए हैं।
सफ़र जारी हैं…




अंधेर नगरी चौपट राजा टका सेर भाजी टका शेर khaja
किसको कहा रहना है या कितना दिन से है ये रेलवे प्रशासनीक विभाग का है। मिश्रा जी आप रेलवे विभाग के युनियन में नहीं है और नहीं रेलवे के मेम्बर है। ऐसा लिखने के लिए कोई रेलवे के अफसर बोलता होगा जिसको एक दुसरे से नहीं पटता होगा, वैसे अधिकारी शायद आपको सेवा करता होगा या आप ब्लैंक मेल करके आप उससे सेवा लेने का प्रयास करते हैं।।