पटना: रेलवे का सतर्कता विभाग जिसे विजिलेंस विभाग भी कहा जाता है, भारतीय रेलवे में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को रोकने और उनका पता लगाने के लिए जिम्मेदार है। रेलवे का सतर्कता विभाग रेलवे में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए काम करता है। रेलवे ने 155201 हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया हुआ है जिस पर काॅल करके शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या शिकायत पर कार्रवाई भी होती है तो इसका जबाब जानने के लिए सतर्कता विभाग के इतिहास को जानना होगा और इतिहास इनका दागदार है और इनका दागदार इतिहास परिलक्षित करता है कि सतर्कता विभाग भ्रष्टाचारियों का “पहरेदार” बन कर रह गया है।
ज्यादा दिन पहले की बात नहीं है, लोकप्रिय अखबार दैनिक भास्कर ने म्यूचुअल स्थानांतरण में फर्जीवाड़ा का अनोखा मामला उजागर किया जिसमें एक लोको पायलट ने वीडियो में स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में सतर्कता विभाग ने पूछताछ की थी और सच्चाई से अवगत कराया था, सतर्कता विभाग में मामला दर्ज भी है फिर भी क्या कारवाई हुई, जानने का विषय है, ऐसा नहीं है कि यह अकेला मामला है।
पूर्व मध्य रेलवे का समस्तीपुर मंडल जो कि मंडल रेल प्रबंधक विनय श्रीवास्तव के भ्रष्ट नीतियों के कारण “लूटेरों का सिंडिकेट”बन चुका है। मंडल में हुए एक बड़े लूटकांड की शिकायत पूर्व मध्य रेलवे के सतर्कता विभाग हाजीपुर में की गई, शिकायत करने के लगभग 15 दिनों बाद सतर्कता विभाग द्वारा एक पत्र जारी किया गया जिसमें शिकायतकर्ता से शिकायत की पुष्टि की बात थी, शिकायतकर्ता ने पत्र मिलते ही अपनी शिकायत की पुष्टि कर दी.
शिकायतकर्ता के द्वारा शिकायत की पुष्टि के बाद सतर्कता विभाग ने मामले की जांच उप मुख्य सतर्कता अधिकारी (यातायात) को सौंपा लेकिन उप मुख्य सतर्कता अधिकारी ( यातायात) की अति तत्परता के कारण जांच उप मुख्य सतर्कता अधिकारी ( कार्मिक) को सौंपा गया, पिछले दिनों उप मुख्य सतर्कता अधिकारी कार्मिक का तबादला वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी के पद पर दीनदयाल उपाध्याय मंडल में कर दिया गया और अब उप मुख्य सतर्कता अधिकारी (लेखा) उस मामले को देखेंगे ।
मामले को देखेंगे या दबाने का काम करेंगे यह देखने की बात होगी क्योंकि लगभग पिछले एक साल से मामले को दबाने में “लूटेरों का सिंडिकेट” अभी तक तो कामयाब है लेकिन कामयाब होंगे नहीं क्योंकि मामला Railwellwishers के संज्ञान में है और परिणामी निराकरण तक Railwellwishers का प्रयास निरंतर जारी रहेगा।
परन्तु, Railwellwishers के प्रयासों को देखते हुए पूर्व मध्य रेलवे, सतर्कता विभाग के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक पी के सिन्हा ने railwellwishers.com के सम्पादक रणजीत कुमार मिश्र के मोबाइल एवं whatsapp नंबर 7482033380 को ब्लैकलिस्टेड कर दिया है। बात तो सोचने वाली है कि पूर्व मध्य रेलवे के सतर्कता विभाग के प्रमुख वरिष्ठ उप महाप्रबंधक अपने सरकारी नंबर पर एक आरटीआई एक्टिविस्ट के नंबर को ब्लैकलिस्टेड कर दे, कहां तक उचित है!
आप सबों की जानकारी में लाना उचित होगा कि Railwellwishers के मोबाइल एवं whatsapp नंबर 7482033380 को पूर्व मध्य रेलवे के बहुत सारे अधिकारियों ने ब्लैकलिस्टेड कर दिया है और इसका कारण क्या हो सकता है समझा जा सकता है लेकिन आरपीएफ विभाग के प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त श्री अमरेश कुमार द्वारा एक आरटीआई एक्टिविस्ट के नंबर को ब्लैकलिस्टेड कर देना उनके भ्रष्ट आचरण को परिलक्षित करता है जो कि चिंता का विषय है।
इस चिंता का निवारण करने की जिम्मेदारी माननीय रेल मंत्री की है और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि “टेक्नोक्रेट और ब्यूरोक्रैट” रेलमंत्री टेक्नोलॉजी से हो रहे इस भ्रष्टाचार पर लगाम कब तक लगा पाते हैं!






सर हम साथ है देश की सम्पति को को नुकसान होने नहीं देंगे