भले ही बहुत सारे मायनों में कमी के बाबजूद भी दानापुर रेलवे स्टेशन कुछेक मामलों में भारतीय रेल में अव्वल स्टेशन रखता हैं और वो है “ईएफटी” वाणिज्य विभाग “ईएफटी”के माध्यम से राजस्व उगाही करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता, दानापुर से खुलने वाली दो महत्वपूर्ण गाड़ियां,जो सिकंदराबाद और बैंगलोर को जाती हैं,उन दोनों ट्रेनों के खुलने के पहले तक वाणिज्य विभाग के कर्मी हर उस जगह पर मिल जाएंगे जहां से यात्रियों का प्लेटफार्म पर पदार्पण हों सकता हैं और आप उनकी नजरों से बच नहीं सकते बस उनका एक ही लक्ष्य है सामान्य श्रेणी के टिकट को शयनयान श्रेणी के टिकट में तब्दील करना, जबकि ऐसा नियम विरुद्ध हैं फिर भी तुगलकी फरमान हैं ।


जनरल डब्बा के पास वाणिज्य विभाग के कर्मी द्वारा यह आवाज लगाना “स्लीपर का टिकट बनवाना है”दानापुर के वाणिज्य विभाग की दशा और दिशा का दर्शन करने के लिए पर्याप्त हैं। जब पहले ही ट्रेनों में स्लीपर कोचों की संख्या कम कर दी गई हो लेकिन प्रतिक्षा सूची में कटने वाली टिकटों की सीमा में कटौती नहीं की गई हो और आवाज़ लगाकर सामान्य श्रेणी के टिकट को स्लीपर कोच में तब्दील कर शयनयान श्रेणी के यात्रियों के यात्रा को Happy Journey बनाने वाले विभाग को पुरस्कार तो मिलना भी चाहिए। शयनयान श्रेणी में यात्रा करने वाले यात्रियों का अनुभव भारतीय रेल की दशा और दिशा जानने के लिए पर्याप्त हैं।



ऐसा नहीं है कि ईएफटी कटौती में ही दानापुर स्टेशन अव्वल स्थान रखता हैं, शायद ही कोई ऐसा रेलवे स्टेशन होगा जहां सामने से गुजरने पर पार्किंग चार्ज का भुगतान करना पड़ता हो लेकिन यदि आप दानापुर स्टेशन के सामने से रिजर्व ऑटो या ई रिक्शा से गुजरते हैं तो ₹ 50 रूपए का भुगतान करना ही होगा क्योंकि वाणिज्य विभाग के कुप्रबंधन से पार्किंग चार्ज की वसूली आर ओ बी के पास होता हैं,ओला,उबेर एवं रिजर्व ऑटो से यात्रा करने वाले स्थानीय निवासी भी इस कुव्यवस्था का शिकार हो रहे हैं।



ऐसा नहीं है कि पार्किंग की व्यवस्था नहीं है, स्टेशन के उत्तर तरफ़ पार्किंग के लिए 2364 स्कावयर मीटर जगह ऑटो पार्किंग के लिए आवंटित हैं और जिससे भारतीय रेल को ₹ 63 लाख 22 हजार 436 रूपए की प्राप्ति हुई हैं,लेकिन परिचालन विभाग की अदूरदर्शिता और प्लेटफार्म नंबर 01ए पर ऐसे गाड़ियों को लेना जो दानापुर तक ही आती हैं, पार्किंग व्यवस्था को तार तार कर देता हैं।
दानापुर स्टेशन के बुकिंग कार्यालय की स्थिति ऐसी है कि यहां भीड़-भाड़ उत्पन्न किया जाता है,जब भीड़-भाड़ ज्यादा होता हैं तब कांउटर कर्मियों को प्यास और पेशाब ज्यादा लगता है बस एक ही लक्ष्य रहता है कि सामान्य श्रेणी के यात्रियों से “झापस” की वसूली कैसे हो, क्योंकि उन्हें भी शिफ्ट बदलते वक्त अधिकृत व्यक्ति को एक निश्चित रकम का भुगतान करना होता हैं जो कि “उपर” तक जाता है और यही कारण है कि बुकिंग काउंटर के बाहर तो सीसीटीवी कैमरे मिल जाएंगे लेकिन यदि कैमरे अंदर लग गए तो “झापस”की वसूली कैसे होगी ।
बुकिंग कार्यालय एवं स्टेशन के उत्तर तरफ़ बनें प्रतीक्षालय में बंद पड़े पंखे विद्युत विभाग की सजगता और उर्जा संरक्षण की चिंता को दर्शाता है।
फिर भी उम्मीदें हैं तो जिंदगी हैं ! सफ़र जारी हैं….




Bahut hi bura haal hai danapur railway station ka
सटीक जानकारी
Well said sir.. These are problems which is facing by daily passengers and reserved passengers who buys either sleeper or AC tickets.
Aap Bhartiya Railway App (Rail Madad) pe sikhayat darj kar sakte hai jo sidhe DRM tak jaati hai Commercial Vibhag ya phir Danapur control room mein aisi shikayatein darj hoti hai…
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