पटना. पूर्व मध्य रेलवे का समस्तीपुर मंडल वर्तमान में लूट एवं अनियमितता का अखाड़ा बन गया है, “अखाड़ा” इसलिए क्योंकि रेल को लूटने के लिए मंडल के सभी विभागों में एक प्रतियोगिता चल रही है “लूट सको तो लूट” काहे कि लूटने की है छूट और जब लूटने की छूट हो तो कोई भी लूटने का मौका चूकना नहीं चाहते और इसका दर्शन समस्तीपुर मंडल के वाणिज्य विभाग द्वारा एकमुश्त 158 कर्मचारियों के तबादले में हो रहा है। यह तबादले संवेदनशील पदों पर किये गये है जिसके लिए रेलवे बोर्ड से स्पष्ट गाइड लाइन तक जारी की जाती रही है.
मंडल के कार्यालय आदेश संख्या 366/NG/2025/Comml/SPJ दिनांक 11.05.2025 का अवलोकन करने से यह स्पष्ट है कि 158 कर्मचारियों में से 83 कर्मचारियों का स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर किया गया है। स्थानांतरण आदेश का अवलोकन करने से यह परिलक्षित होता है कि विभिन्न कर्मचारियों को अलग-अलग नियम से स्थानांतरित किया गया है और ऐसा क्यूं किया गया है ? कहने की बात तो है नहीं, फिर भी आप आसानी से समझ सकते है। 
अनुरोध वाले जगह पर भी प्रशासनिक आधार पर किये गये स्थानांतरण
रेल प्रशासन ने इस बार वैसे जगहों पर भी प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण आदेश जारी किया गया जहां के लिए निजी अनुरोध उपलब्ध थे, इससे रेल राजस्व बचाया जा सकता है, जिसका विवरण इस प्रकार है।
(1) स्थानांतरण सूची में मुख्य चल टिकट निरीक्षक संवर्ग लेवल 08 ,क्रम संख्या 14 पर श्री इमदाद अहमद का नाम अंकित है,इनका निजी अनुरोध में पहला विकल्प समस्तीपुर रेड तथा दूसरा दरभंगा था। इनके दो विकल्पों के बाबजूद इनकी पदस्थापना सहरसा हुई है तथा टिप्पणी में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि इनका स्थानांतरण सहरसा किया जाता है क्योंकि इनका पूर्व कार्य स्थल दरभंगा था, इसका तात्पर्य यह हुआ कि स्थानांतरण में यही नियम सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगा परन्तु समस्तीपुर मंडल में यह नियम विभिन्न कर्मचारियों के लिए बदल जाते है इसके अनेकों उदाहरण है जैसे
(A) मुख्य चल टिकट निरीक्षक संवर्ग लेवल 08 क्रम संख्या 06 पर श्री शिव शंकर कुमार का नाम अंकित है,जो कि रक्सौल में कार्यरत थे। इनका स्थानांतरण मुजफ्फरपुर (उत्तर) में निजी अनुरोध पर हुआ है। श्री शिव शंकर कुमार रक्सौल में कार्यरत रहने से पहले मुजफ्फरपुर (उत्तर) में ही कार्यरत थे तो फिर सवाल यह उठता है कि श्री इमदाद अहमद की तरह पूर्व में कार्यरत स्टेशन पर स्थानांतरण नहीं किए जाने का नियम इन पर लागू क्यों नहीं हुआ?
(B) इसी प्रकार मुख्य चल टिकट निरीक्षक संवर्ग लेवल 08 , क्रम संख्या 11 श्री मुश्ताक अहमद पर भी श्री इमदाद अहमद पर लगने वाला नियम लागू नहीं हुआ।
(C) अन्य संवर्ग का भी यही हाल है जैसे – मुख्य टिकट निरीक्षक लेवल 07 क्रम संख्या 12 की भी यही स्थिति है ।इनका स्थानांतरण इनके पुराने कार्यरत स्टेशन समस्तीपुर में ही हुआ है।इनका वर्तमान कार्यस्थल दरभंगा है परन्तु यह समस्तीपुर रेड में ही कार्य कर रहे हैं।एक तरह से यह समस्तीपुर में ही किसी प्रकार से बने हुए है।इन पर भी पूर्व कार्य स्थल पर वापस पदस्थापना पर कोई नियम लागू नहीं होता है।
(D) प्रधान टिकट निरीक्षक,लेवल 06 संवर्ग में क्रम संख्या 38,39 एवं 40 श्री शोभनाथ राय का दरभंगा, श्री संजय कुमार सिंह का सहरसा एवं श्री विनय कुमार का दरभंगा वापस उनके पूर्व कार्यस्थल पर स्थानांतरित किया गया है।
(E) वाणिज्य अधीक्षक लेवल 08, क्रम संख्या 05, श्री देवेन्द्र नाथ त्रिपाठी का भी स्थानांतरण पुनः उनके पूर्व कार्यस्थल पर बेतिया किया गया है।
(F) वाणिज्य अधीक्षक लेवल 07, क्रम संख्या 13 श्री सर्वजीत कुमार श्रवण कई वर्षों से समस्तीपुर में ही कार्यरत है और इनका समस्तीपुर से समस्तीपुर में ही
स्थानांतरण किया गया है।
(G) वाणिज्य अधीक्षक लेवल 07 क्रम संख्या 14 श्री रमेश प्रसाद एवं 15 श्री रंजन कुमार सिंह का स्थानांतरण माल कार्यालय में हुआ है।यह दोनों पहले भी माल कार्यालय में लम्बे समय तक कार्यरत रहे हैं फिर भी इन सब को वापस माल कार्यालय में स्थानांतरित किया गया है। श्री रंजन कुमार सिंह पर नशें में ड्यूटी करते हुए वीडियो भी वायरल हुआ था परन्तु इन सब पर भी सामान्य नियम स्थानांतरण में लागू नहीं होते हैं।
(H) मुख्य वाणिज्य लिपिक लेवल 06 में 09,10,20 श्री प्रेम कुमार टुडु का समस्तीपुर से समस्तीपुर, श्री ब्रज किशोर प्रसाद का पूर्व स्टेशन रक्सौल में प्रशासनिक आधार पर एवं श्री सुनील कुमार रजक का पूर्व स्टेशन नरकटियागंज स्टेशन पर निजी अनुरोध पर स्थानांतरण हुआ है।
(I ) इसी प्रकार वाणिज्य निरीक्षक संवर्ग में श्री श्री हरि किशोर भक्ता का स्थानांतरण सीतामढ़ी खंड से पुनः उनके पूर्व पदस्थापना वाले खंड मुजफ्फरपुर (उत्तर) में पदस्थापना हुईं है।वो कई वर्षों से मुजफ्फरपुर (उत्तर) खंड देख रहे हैं जब उनकी पदस्थापना सीतामढ़ी हुई तो भी वो लम्बे समय तक वहां के लिए विरमित नहीं हुए। तत्कालीन वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक ने बहुत चालाकी से इनको सीतामढ़ी में योगदान के बाद कुछ ही महीनों बाद मौखिक आदेश पर सीतामढ़ी के साथ साथ मुजफ्फरपुर (उत्तर) का प्रभार दे दिया जबकि वहां के लिए निजी अनुरोध उपलब्ध थे।
वाणिज्य निरीक्षक संवर्ग में क्रम संख्या 04 पर श्री अमरेंद्र कुमार लाल का नाम अंकित है, इन्होंने मुजफ्फरपुर (उत्तर) हेतु निजी अनुरोध किया था परन्तु इनका स्थानांतरण यहां न कर श्री हरि किशोर भक्ता का स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर किया गया है। श्री भक्ता पर कई बार वसूली के आरोप लगते आए हैं।
बड़े पैमाने पर स्थानांतरण में गोलमाल, डीआरएम अंजान !
सवाल यह उठ रहा है कि उपरोक्त वर्णित सभी उदाहरण किसी मानवीय भूल का उदाहरण है ? या सभी भ्रष्टाचार का उदाहरण हैं ! इसमें स्थानांतरण समिति के अधिकारियों, वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी तक धन पहुंचता है। ऐसा कैसे संभव हो सकता है कि इतने बड़े स्तर पर स्थानांतरण होता है, अनियमितताएं होती है और डीआरएम को पता नहीं हो !
कॉमर्शियल विभाग में जारी किये गये तबादलों की सूची देखें

रात के अंधेरे में निकला आदेश, आखिर क्या था कारण ?
आदेश जारी होने का समय देखिए 11.05.2025, रात्रि के 01.27.00 दिन रविवार। आदेश जारी करने में ऐसी क्या जल्दबाजी थी की कार्य दिवस का इंतजार नहीं किया जा सकता था अथवा दिन होने का इंतजार नहीं किया जा सकता था।यह जल्दबाजी दिखाता है कि पैसों का खेल कितना बड़ा है, मंडल रेल प्रबंधक का कार्यकाल पूरा हो रहा था तथा उनको भी स्थानांतरण का डर सता रहा था। इसलिए जल्दबाजी में स्थानांतरण आदेश रात्रि में निकाला गया।
(सीटीजी) समग्र स्थानांतरण अनुदान जो कि मूल वेतन का 80 प्रतिशत प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण पर कर्मियों को मिलता है तब सोचा जा सकता है कि यदि एक कर्मचारी का मूल वेतन एक लाख रुपए के आस पास है तब प्रति कर्मचारी जोड़ लिजिए कितने लाख का चपत भारतीय रेलवे को लगाया गया है, सबसे रोचक बात तो यह है कि वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक को स्थानांतरण आदेश जारी करने का अधिकार नहीं था और यह आदेश मंडल रेल प्रबंधक के आदेश से ही जारी किया गया है।
अंधा-बहरा-गूंगा बन गया है रेलवे का सतर्कता विभाग
अब सोचने वाली बात यह है कि यदि मंडल रेल प्रबंधक स्तर से इतनी बड़ी अनियमितताएं की जाए और रेल मंत्री बढ़ते खर्चो का रोना रोए तो देखने वाली बात यह है कि सतर्कता विभाग क्या कर रहा है? सतर्कता विभाग सतर्कता पखवाड़ा मनाने के अलावा और कर ही क्या सकता है, सतर्कता विभाग का इतिहास तो यही कहता है । इन अनियमितताओं पर रोक और करने वाले पर कारवाई शासन का विषय है और जब शासन अनुशासन का पालन करने में अक्षम हो तो प्रशासन से क्या उम्मीद किया जा सकता है।
फिर भी भारतीय रेल को भ्रष्टाचार मुक्त करने का Railwellwishers का प्रयास जारी हैं…






Sab jagah loot hai
“I have already raised the matter with the DNR Division and served a legal notice on 12/05/2025 to the CRB, ED Vigilance Railway Board, GM/HJP, PCCM/HJP, DRM/DNR, and Sd GM/HJP; however, no action has been taken to date. I am now preparing to approach the Hon’ble Court to expose the corruption prevailing in the Commercial Department of DNR Division, supported by valid and admissible evidence.”