South Eastern Railway : RPF आईजी भी नहीं रोक सके ROURKELA और TATA की अवैध वेंडिंग, कमांडेंट और सहायक कमांडेंट का मौन संदिग्ध !

South Eastern Railway : RPF आईजी भी नहीं रोक सके ROURKELA और TATA की अवैध वेंडिंग, कमांडेंट और सहायक कमांडेंट का मौन संदिग्ध !
राउरकेला स्टेशन पर अवैध वेंडर और आरपीएफ आईजी (फाइल)
  • यात्रियों को ऊंची कीमत वसूलकर परोसा जा रहा बासी खाना, कैटरिंग और कॉमर्शियल के बड़े अधिकारी भी मौन
  • स्टेशन पर लगे कैमरों में आरपीएफ को क्यों नजर नहीं आते अवैध वेंडर, यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ क्यों?
  • राउरकेला में एक इंस्पेक्टर पर गिर चुकी है अवैध कृत्यों की गाज, आईजी संजय मिश्रा ने की थी कार्रवाई
  • RPF के सीआईबी और एसआईबी के अधिकारी और जवान किसके इशारे पर नहीं कर रहे इसकी रिपोर्ट

ROURKELA. दक्षिण पूर्व रेलवे में स्टेशनों से लेकर ट्रेनों तक अवैध वेंडरों की पहुंच का आलम यह है कि इनके खिलाफ आरपीएफ के सहायक कमांडेंट से लेकर सीनियर डीएससी तक आदेश देते से कतरा रहे हैं. नतीज है खड़गपुर से लेकर टाटानगर और फिर चक्रधरपुर से राउरकेला और झारसुगुड़ा तक ट्रेनों से लेकर स्टेशन तक अवैध वेंडरों की चिल्ला-पो मची हुई है. चक्रधरपुर में सीनियर डीएससी के मौन का आलम यह है कि आज तक उनके द्वारा अवैध वेंडरों की धरपकड़ को लेकर कोई आदेश तक जारी नहीं किया गया !

मजे की बात यह है कि राउरकेला स्टेशन पर तो अवैध वेंडर ही आरपीएफ की कमाई का मुख्य स्रोत बन गये है. बीते दिनों मीडिया में यह मामला सामने आने के बाद आरपीएफ के प्रभारी कमलेश समाद्दार ने एक दिन के लिए दिखावे की कार्रवाई जरूर की और अवैध वेंडरों को रोक दिया लेकिन दूसरे ही दिन नये दिशा-निर्देश के साथ वेंडरों को स्टेशन पर पहुंच की अनुमति दे दी गयी. हां, वेंडरों के सफेदपोश सरगनाओं का यह आदेश जरूर दिया गया कि फिलहाल अवैध वेंडरों की संख्या को एक चौथाई कम दी जाये. यानी 36 से अधिक चलने वाले अवैध वेंडरों की संख्या फिलहाल 8 से 10 कर दी गयी है.

आईजी ने की थी कार्रवाई लेकिन फिर सब कुछ हो गया यथावत

अब सवाल यह है कि क्या दक्षिण पूर्व रेलवे में अवैध वेंडिंग को रोक पाने में आरपीएफ के आईजी संजय कुमार मिश्रा भी बेबश है? क्या अवैध वेंडिंग की जानकारी उनके तक नहीं पहुंचायी जा रही? आरपीएफ सीआईबी और एसआईबी के अधिकारी व जवान किसके इशारे पर ड्यूटी बजा रहे हैं? स्टेशन पर लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की निगरानी कौन कर रहा है? रेलवे के राजस्व को नुकसान पहुंचाने और यात्रियों की सेहत से सीधे तौर पर खिलवाड़ करने वाले इस कृत्य पर आरपीएफ का पूरा महकमा क्यों मौन है? यह स्थिति तब है जबकि राउरकेला स्टेशन पर अवैध वेंडिंग को लेकर आईजी ने औचक जांच में आरपीएफ के तत्कालीन प्रभारी को एसएल मीणा कर निलंबित तक कर दिया गया था. तब आईजी ने सख्ती चेतावनी भी दी थी.

आईजी की इस कार्रवाई का असर आरपीएफ के प्रभारियों पर कभी दिखायी ही नहीं पड़ता. क्योंकि चेतावनी के बाद कुछ दिनों के लिए अवैध वेंडिंग पर रोक लगा दी जाती है लेकिन धीरे-धीरे इसे फिर से शुरू कर दिया जाता. कई बार इस मामले को लेकर जांच व कार्रवाई की गयी लेकिन हर बार जांच की दिशा को बदलकर आरपीएफ और वेंडरों के गठजोड़ को बचाने का प्रयास किया गया.

राउरकेला स्टेशन से होकर गुजरे डीआरएम, जारी रही अवैध वेंडिंग

मंगलवार को डीआरएम तरुण हुरिया झारसुगुड़़ा दौरे के क्रम में राउरकेला होकर गुजरे. इस दौरान आरपीएफ ने अवैध वेंडरों को प्लेटफॉर्म से दूर रखा. डीआरएम का सैलून आगे बढ़ते ही फिर से स्टेशन पर अवैध वेंडरों की फेरी शुरू हो गयी. दिलचस्प बात यह है कि अवैध वेंडिंग की अवैध कमाई में हाथ धोने वाले कॉमर्शियल और कैटरिंग से जुड़ लोग भी इसे लेकर मौन है और आरपीएफ के कुकृत्य के साझीदारे बन रहे.

वेंडरों में बिरयानी बेचने की होड़, आज नहीं बिका तो कल बेच देते हैं

गर्मी में आम तौर पर बासी खाना खाकर फूड प्वाइजनिंग की घटनाएं घटती रही है. अवैध वेंडरों की बड़ी कमाई बिरयानी से होती है. हालांकि अवैध वेंडरों की बिरयानी की जांच नहीं होती और अगर एक दिन माल नहीं बिका तो दूसरे दिन उसी बिरयानी को यात्रियों को बेच दिया जाता है.

एक साल पहले की घटना को भूल गया रेल प्रशासन

आज से ठीक एक साल पहले 25 अप्रैल 2024 की शाम यशवंतपुर-गोरखपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस में अंडा-करी व अंडा बिरयानी खाकर 100 से अधिक यात्रियों की तबीयत खराब हो गयी थी. इस घटना से रेलवे अधिकारियों ने अब तक सबक नहीं लिया. तो क्या यह मान लिया जाये कि चक्रधरपुर रेल मंडल प्रशासन क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है ?

स्टॉल संचालकों का हो रहा घाटा, बार-बार लिख रहे चिट्टी

हावड़ा-मुंबई रेल मार्ग के खड़पगुर और चक्रधरपुर रेल मंडल से गुजरने वाली कई ट्रेनों में व रेलवे स्टेशन पर अवैध वेंडर खाद्य सामग्री बेच रहे हैं. हालांकि इन पर रेलवे के अधिकारियों की नजर रहती है लेकिन कोई भी इन्हें रोकता नहीं है. रेलवे स्टेशन पर स्टाल संचालक भी अवैध वेंडरों से परेशान है. उनका कहना है कि अवैध रुप से रेलवे स्टेशन पर सामग्री बेचने से उनकी स्टालों पर कोई नहीं आता है.उनकी स्टाल का किराया भी नहीं निकल पा रहा है. ऐसा प्रतीत लगता है कि इस धंधे को पुलिस व रेलवे के अधिकारियों की मिली भगत के कारण इन्हें रोकने में नाकाम हो रहे है.

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  1. Santosh Kumar Singh

    Baat sahi hai lekin adhikari log bhi chup hai

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