आरएसी टिकट यात्रियों के साथ छल, सिस्टम की चूक या साजिश!

आरएसी टिकट यात्रियों के साथ छल, सिस्टम की चूक या साजिश!

आदमी मुसाफिर है…आता है.. जाता है..लेकिन जब बात यात्रा की आती है तो सबसे पहला ख्याल रेल का ही आता है और चिंता कन्फर्म टिकट की होती है। जब टिकट कन्फर्म मिल जाए तो यात्री यात्रा के लिए आश्वस्त हो जाता है और टिकट आर ए सी में हो तो यात्री इस उम्मीद में टिकट लेता है कि यात्रा तिथि को चार्ट बनने पर कन्फर्म हो जाएगा और ऐसा होता भी है और यदि टिकट प्रतीक्षा सूची में हों तो यात्री सशंकित होते हुए भी प्रतीक्षा सूची का टिकट इस उम्मीद में ले लेता है कि यात्रा तिथि तक टिकट कन्फर्म हो जाएगा। यात्रा तिथि को ट्रेन खुलने के लगभग चार घंटे पहले ट्रेन का आरक्षण चार्ट जारी हो जाता है और बहुत सारे प्रतीक्षा सूची वाले यात्रियों का टिकट आर ए सी में ही रह जाता है, प्रतीक्षा सूची वाले यात्रियों के पास टिकट रद्द करने के अलावा सामान्य श्रेणी के डब्बे में यात्रा का विकल्प होता है लेकिन आर ए सी टिकट वाले यात्रियों को आरक्षित कोच के साइड लोअर बर्थ पर दो यात्रियों के बैठने का विकल्प होता है। आर ए सी टिकट वाले बहुत सारे यात्री भी अपनी सुविधानुसार टिकट को रद्द करा यात्रा स्थगित कर देते हैं लेकिन जिन्हें अपने गंतव्य पर पहुंचना होता है वो तो किसी भी तरह अपने गंतव्य पर पहुंचना चाहते हैं और आर ए सी टिकट पर भी यात्रा इस उम्मीद से करते हैं कि ट्रेन में टिकट कन्फर्म हो जाएगा क्योंकि चार्ट बन जाने के बाद भी बहुत सारे यात्री अपनी यात्रा को रद्द कर देते हैं। लेकिन इसका लाभ आर ए सी टिकट वाले यात्रियों को नहीं मिल पाता और लाभ इसलिए नहीं मिल पाता है क्योंकि भारतीय रेलवे की वाणिज्य विभाग की मंशा ही शंका के घेरे में है।

प्रायः ट्रेन खुलने के चार घंटे पहले आरक्षण चार्ट जारी किया जाता है और सभी यात्रियों को उनके मोबाइल नंबर पर उनके टिकट की यथास्थिति का विवरण भेज दिया जाता है, बहुत सारे यात्रियों का टिकट आर ए सी में रह जाता है और आर ए सी टिकट वाले यात्री भी बर्थ मिल जाने के उम्मीद से यात्रा करते हैं लेकिन उन्हें निराशा मिलती है। यात्रा सम्पन्न होने पर शासन और प्रशासन को शुभ संदेश देते हुए आर ए सी टिकट पर किए गए यात्रा को भूल जाते है और अपने यात्रा के उद्देश्य में लग जाते है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि ट्रेन खुलने के चार घंटे पहले जारी हुए आरक्षण चार्ट के बाद जो भी यात्री अपनी कन्फर्म यात्रा टिकट को रद्द करा देते हैं तो उसका लाभ किस यात्री को मिला। प्राथमिकता पर आर ए सी टिकट वाले यात्रियों को मिलना चाहिए। सिस्टम के अनुसार मिलता भी है लेकिन हकीकत में नहीं मिलता है। क्यों नहीं मिलता है इसके पीछे कारण वाणिज्य विभाग की मंशा है जो कि पूरी तरह से भ्रष्ट हैं और भ्रष्ट क्यों है और कैसे है इसे समझने के लिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। बस आप इतना ही जान लिजिए कि ट्रेन खुलने के चार घंटे पहले जारी हुए आरक्षण चार्ट बनने के बाद जो आर ए सी टिकट किसी यात्री द्वारा टिकट रद्द करने पर कन्फर्म हुआ क्या इसकी सूचना यात्रियों को दी जाती है तो हकीकत यह है कि प्रथम आरक्षण चार्ट जारी होने के बाद जो भी आर ए सी टिकट कन्फर्म हो जाता है उसका कोई भी संदेश यात्री को नहीं जाता है। जब यात्री को बर्थ कन्फर्म का संदेश नहीं जाता है तो यात्री भी क्या करे । सिर्फ एक ही काम बच जाता है टीटीई के सामने हाथ जोड़कर गुहार लगाए लेकिन गुहार लगाने पर भी उसे कुछ नहीं मिलता है। इसलिए नहीं मिलता है क्योंकि उनसे टीटीई को कुछ नहीं मिलना होता है।

अब सोचने वाली बात यह है कि जब आर ए सी टिकट वाले यात्रियों को बर्थ कन्फर्म होने का कोई संदेश नहीं मिलता है तो यात्रियों के पास टीटीई के भरोसे के अलावा क्या विकल्प है?

ट्रेन खुलने के पांच दस मिनट पहले आरक्षण चार्ट का फाइनल चार्ट जारी किया जाता है और यह ट्रेन के टीटीई के HAND HELD TERMINAL SYSTEM पर उपलब्ध होता है और तब तो यह जिम्मेदारी टीटीई की बनती है कि वह आर ए सी टिकट वाले यात्रियों को टिकट कन्फर्म होने की सूचना दें और उन्हें बर्थ दें लेकिन ऐसा होता नहीं है।

जिस भी ट्रेन में टीटीई प्रस्थान वाले स्टेशन से ट्रेन के गंतव्य स्टेशन तक जाते है उन ट्रेनों में ऐसा खेल होता है कि आप सोच कर दंग रह जाएंगे। आपका आर ए सी टिकट कन्फर्म हो गया है लेकिन आप अपने साइड लोअर बर्थ पर यात्रा करने को मजबूर है और आपके आरक्षित बर्थ पर टीटीई “अपने यात्री”को यात्रा करा रहा है तो आप सोचेंगे कि यह “अपना यात्री” कौन है!अपना यात्री इसलिए कि क्योंकि उसने टीटीई को भुगतान किया है और आपने रेलवे को।
“अपना यात्री” का खेल भारतीय रेलवे के सभी वैसे ट्रेनों में बदस्तूर वर्षों से जारी हैं जिस ट्रेन में टीटीई प्रस्थान वाले स्टेशन से गंतव्य स्टेशन तक जाते हैं।

इस खेल का खुलासा तब हुआ जब 05.01.2025 को राजेन्द्र नगर स्टेशन से नई दिल्ली को जाने वाली ट्रेन 12309 तेजस राजधानी एक्सप्रेस के कोच संख्या बी 08/ 47 के यात्री ने इसकी लिखित शिकायत दानापुर के वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक महोदय से की, यात्री द्वारा लिखित शिकायत दर्ज कराने पर दानापुर मंडल के सहायक वाणिज्य प्रबंधक द्वारा यात्री से सम्पर्क किया गया। यह सच्चाई जानकर कि आर ए सी टिकट वाले यात्री का बर्थ कन्फर्म हो जाने पर भी यात्री को बर्थ नहीं दिया गया और आर ए सी टिकट वाले यात्री के बर्थ पर टीटीई का “अपना यात्री” यात्रा किया तो शिकायत पर कार्रवाई करते हुए दानापुर मंडल के वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री अभिनव सिद्धार्थ ने राजेन्द्र नगर स्टेशन पर पदस्थापित तेजस राजधानी कोच संख्या बी 08 के टीटीई श्री अमर कुमार को संस्पेंड कर दिया है।

ठीक है यात्री द्वारा शिकायत दर्ज कराने पर त्वरित कार्रवाई स्वागत योग्य है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आर ए सी वाले यात्रियों के साथ वाणिज्य विभाग छल कर रहा है और वर्षों से कर रहा है और यही तो कारण है कि ऐसी ट्रेनें जिसमें टीटीई प्रस्थान वाले स्टेशन से गंतव्य स्टेशन तक जाते हैं उसकी बोली लगती है और जो सिस्टम में फिट बैठते हैं वो लूटने में सुपरहिट होते हैं।

दानापुर मंडल से खुलने वाली 12309 तेजस राजधानी एक्सप्रेस,12393 सम्पूर्ण क्रान्ति एक्सप्रेस,12352 राजेन्द्र नगर हावड़ा एक्सप्रेस गाड़ियों में आर ए सी यात्रियों से लूट और अन्याय वर्षों से बदस्तूर जारी है। और इन ट्रेनों में चलने वाले टीटीई “साहब” कहलाते हैं क्योंकि “अपना यात्री” से हुई कमाई का जलवा ही अलग होता है और लोग आसानी से पहचान जाते हैं कि ये तो राजधानी के टीटीई है, खैर वो कुछ भी हो लेकिन आर ए सी की यह व्यवस्था यात्रियों के लिए दुखद है और सरकार के लिए शर्मशार करने वाली,सोच कर देखिए पटना नई दिल्ली तेजस राजधानी में एसी 3 का किराया ₹ 2415 और एसी 2 में ₹3345 रूपए भाड़ा देकर बारह घंटे की यात्रा बैठकर करने को मजबूर हैं और टीटीई “अपना यात्री” से अपनी कमाई में मस्त है और यात्री सिस्टम के नकारेपन से त्रस्त हो सरकार को कोसने के अलावा क्या कर सकता है लेकिन railwellwishers.com ने इस मामले में आर ए सी यात्रियों को उनका बर्थ उन्हें ही मिलें और सिस्टम से उन्हें सूचना मिले, अपने अभियान की शुरुआत की है, आपके HAPPY JOURNEY की कामना करता है।
आर ए सी टिकट पर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए किसी ने सच ही कहा है..
अभी रेल के सफर में
बहुत निहाल दोनों !
कहीं रोग न बन जाए
यही साथ दो घड़ी का !!
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आईआईटियन रेल मंत्री क्या कर रहे हैं क्या उनके संज्ञान में आर ए सी टिकट पर यात्रा करने वालों की दुर्दशा की जानकारी नहीं है। ऐसा तो हो नहीं सकता है लेकिन यदि फिर भी जानकारी नहीं है तो अब तो जानकारी हो गई। नींद से जागिए और सिस्टम में सुधार कीजिए जिससे आर ए सी टिकट वाले यात्रियों को टिकट कन्फर्म होने पर संदेश मिल जाए और टीटीई का अवैध कारोबार बंद हो।

वैसे इस मामले को संज्ञान में लाए जाने पर दानापुर मंडल के वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री अभिनव सिद्धार्थ ने टीटीई श्री अमर कुमार को निलम्बित तो किया ही है रेलवे बोर्ड को भी सिस्टम में सुधार की जरूरत से अवगत कराया है, उम्मीद किया जा सकता है कि रेलवे बोर्ड इस संबंध में आवश्यक कदम उठाकर आर ए सी टिकट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को उनका अधिकार दिलाने का प्रयास करें।
वैसे जब तक सिस्टम में सुधार नहीं हो जाता है और आर ए सी टिकट वाले यात्रियों को कन्फर्म होने का संदेश नहीं मिलता है तब तक के लिए railwellwishers.com यात्रियों से अनुरोध करता है कि ट्रेन में चल रहे टीटीई से अपने टिकट की जानकारी HAND HELD TERMINAL SYSTEM से लेते रहे।
आपकों HAPPY JOURNEY की मंगलकामनाएं .

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