ECR: “धृतराष्ट्र” महाप्रबंधक की “धृष्टता” परवान पर! कमिशन के लिए GELF के SSE ने संविदाकर्मी को जड़ा थप्पड़!

ECR: “धृतराष्ट्र” महाप्रबंधक की “धृष्टता” परवान पर! कमिशन के लिए GELF के SSE ने संविदाकर्मी को जड़ा थप्पड़!
सांकेतिक तस्वीर AI

दानापुर: भारतीय रेल के अभूतपूर्व ज़ोन पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के “अभूतपूर्व” महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह जो धृतराष्ट्र की भूमिका को चरितार्थ कर रहे हैं और रेल सेवा से अवकाश प्राप्त करने से पहले बचे खुचे दिनों में उद्घाटन और चढ़ावा बटोरने में व्यस्त हैं और इधर पूरी व्यवस्था मदमस्त हैं।

जब पूरी व्यवस्था वसूली में मदमस्त हैं तो व्यवस्था ध्वस्त होना स्वाभाविक है और उसी ध्वस्त व्यवस्था का बानगी देखने को मिला है दानापुर स्थित GELF कार्यालय में, घटना 10.08.2026 को हुई है। रेलवे के GELF Marhaura में Tender No- CAO -DLF -MEW-AMCSS -25-26 में आउटसोर्सिंग कम्पनी के द्वारा Manning (Staff Outsourcing)का काम किया जा रहा है। जिसमें संविदाकर्मियों का भुगतान वहां के वरीय प्रशाखा अभियंता GELF Marhaura रूपक कुमार के उपस्थिति रजिस्टर साइन करने के बाद कंपनी द्वारा किया जाना था।

लेकिन GELF Marhaura के वरीय प्रशाखा अभियंता रूपक कुमार द्वारा उपस्थिति रजिस्टर साइन नहीं किया गया और उपस्थिति रजिस्टर पर साइन करने के लिए स्टाफ से एकमुश्त ₹ 2,00,000 का मांग किया गया। जिसके बाद CAO/GELF/Madhepura के हस्तक्षेप होने के बाद स्टाफ उपस्थिति रजिस्टर साइन हुआ और फिर स्टाफ का भुगतान हुआ।

पुनः जब भुगतान करने के समय उपस्थिति रजिस्टर साइन होने गया तो हर महीने के उपस्थिति रजिस्टर साइन करने के लिए ₹20,000 की रिश्वत की मांग की गई।

जब वरीय प्रशाखा अभियंता रूपक कुमार को पैसा नहीं दिया गया तो उपस्थिति रजिस्टर पर ग़लत कमेंट के साथ साइन कर रहे थे,जिसे आउटसोर्सिंग कम्पनी के स्टाफ राहुल कुमार द्वारा नहीं लिखने का अनुरोध किया गया, लेकिन पैसा नहीं मिलने के आवेश में वरीय प्रशाखा अभियंता रूपक कुमार ने राहुल कुमार को कुछ अन्य संवेदक के सामने थप्पड़ जड़ दिया और फिर उपस्थिति रजिस्टर और अन्य कागज अपने बैग में रखकर राहुल कुमार को भगा दिया।

यह तो सरासर नाइंसाफी की पराकाष्ठा है क्योंकि राहुल कुमार एक गरीब आदमी है जो मेहनत से काम करता है। रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी पैसे के लिए हिंसा पर उतारू हो गए हैं। यह मामला इसी ओर इशारा कर रहा है कि “धृतराष्ट्र” महाप्रबंधक अपने अंतिम दिनों में पैसा कमाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। पैसे की उगाही के लिए उपर से जबरदस्त दबाव है और इसका फायदा नीचे के कर्मचारी ग़रीब मजदूरों को मार पीट कर वसूल रहे हैं।

इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर अविलंब कारवाई भी सुनिश्चित होना चाहिए जिससे कि इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।

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