पटना: भारतीय रेल का पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर ज़ोन एक “अभूतपूर्व” ज़ोन के रूप में विख्यात है और विख्यात इसलिए हैं क्योंकि यहां के कारनामे अभूतपूर्व है। यहां के नीति निर्धारकों ने एक ऐसी नीति बनाई है कि जिससे सभी परेशान हैं, नीति है ‘पहले दाम,तब काम’, चाहे जाना पड़े कृष्ण धाम!
पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह जो “धृतराष्ट्र” की भूमिका को चरितार्थ कर रहे हैं , और ऐसा प्रतीत होता है कि अवकाश प्राप्त करने के पहले पूर्व मध्य रेल की व्यवस्था को अवशेष बनाकर ही छोड़ेंगे।
भारतीय रेल के इतिहास में संभवतः ऐसा कभी नहीं हुआ होगा जैसा पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह के कार्यकाल में देखने को मिल रहा है। महान् महाप्रबंधक श्रीमान छत्रसाल सिंह के कार्यकाल में सीबीआई की दसवीं रेड दीनदयाल उपाध्याय मंडल के बिक्रमगंज में पड़ी है ।
कहते हैं ना कि जब अति होता है तब छति होना तय है और ऐसा ही हुआ है पूर्व मध्य रेलवे के दीनदयाल उपाध्याय मंडल के बिकमगंज में जहां अभियंत्रण विभाग के सहायक मंडल अभियंता संवेदक से घूस की रकम लेते पकड़े गए हैं। मामला 29.07.2026 का है। बलिया (उत्तरप्रदेश) निवासी संवेदक श्रीमान राकेश कुमार पांडे द्वारा संविदा का काम 20.012026 को ही समाप्त हो गया था और निर्धारित समय पूरा होने पर अपने द्वारा जमा Earnest Money Deposit (EMD), Performance Guarantee (PG) एवं Security Deposit (SD) की वापसी के लिए प्रयासरत थे, बिक्रमगंज के सहायक मंडल अभियंता श्रीमान भोला शंकर कुमार ने EM,PG एवं SD की रकम को रिलीज करने के बदले में संवेदक से इनवर्टर एवं बैटरी की मांग कर दी और संवेदक को यह नागवार गुजरा और उसने इसकी लिखित शिकायत सीबीआई पटना के एंटी करप्शन ब्यूरो में कर दी और जब शिकायत दर्ज हो गई तो कारवाई होना भी सुनिश्चित था और सीबीआई पटना के एंटी करप्शन ब्यूरो ने अपने कारवाई में बिक्रमगंज के सहायक मंडल अभियंता श्रीमान भोला शंकर कुमार को ₹ 7000 रूपए लेते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।इस संबंध में सीबीआई की एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा एफआईआर संख्या RCO 232026A0015 दिनांक 29.07.2026,ACT P C Act 1988(As amended in 2018 ) Sections 07 के तहत Offence relating to public servant demanding bribe and being ready to accept bribe का केस दर्ज करते हुए गिरफ्तार सहायक मंडल अभियंता श्रीमान भोला शंकर कुमार को जेल भेज दिया है।
प्राप्त जानकारी अनुसार श्रीमान भोला शंकर कुमार लगभग एक साल पहले ही पदोन्नति पाकर सहायक मंडल अभियंता के पद पर आसीन हुए थे और लगभग दो साल में ही अवकाश प्राप्त करने वाले थे, लेकिन “पहले दाम तब काम” की नीति ने इनका नींद हराम कर दिया है और कैरियर का काम तमाम कर दिया है लेकिन फिर भी पूर्व मध्य रेलवे में अनियंत्रित भ्रष्टाचार का रफ्तार रूकने को तैयार नहीं दिख रहा है।
इस संबंध में जब एक अभियंता से बात हुई तो उन्होंने कहा कि संवेदक ने ग़लत किया है और यह तो अभियंता का अधिकार है तो आप सोच सकते हैं कि किस तरह से भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन चुका है।
लेकिन एक गंभीर सवाल है कि जिस तरह से सीबीआई की एंटी करप्शन ब्यूरो ने पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक श्रीमान छत्रसाल सिंह के कार्यकाल में दसवीं रेड की है और कारवाई सुनिश्चित हुई है, पूर्व मध्य रेलवे के सतर्कता विभाग के अस्तित्व पर गंभीर सवाल खड़े करता है, स्पष्ट प्रतीत होता है कि पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर का सतर्कता विभाग भ्रष्टाचार का हिस्सेदार और संरक्षक हैं।
अब समय आ गया है कि माननीय रेल मंत्री महोदय रेलवे के सतर्कता विभाग की गंभीरता से समीक्षा करें, क्योंकि बिल्ली के जिम्मे दुध की रखवाली नहीं दी सकती।
एक और सीबीआई रेड के इंतजार में…
सफ़र जारी है..





