सुधी पाठकगण गोबराहा कीड़ा के बारे में जानते ही होंगे, और जो नहीं जानते उनकी जानकारी के लिए बता देते हैं कि कुछ कीड़े गोबर में ही जन्म लेते है, वहीं पनपते है, बढ़ते हैं और गोबर के बीच में ही रहते है। एक पल के लिए भी गोबर से बाहर रहना उन्हें गंवारा नहीं। यदि किसी कारणवश बाहर निकल भी गए तो फ़िर वापस उसी गोबर में।
ऐसे ही किसी गोबराहा कीड़े को देख किसी ने सोचा कि इस गोबराहा कीड़े को वहां से निकालते हैं, इसलिए उस कीड़े को गोबर से निकाल धो दिया और कीड़े को साफ़ पानी मे कुछ खाने-पीने के सामान के साथ रख दिया …
पर कुछ ही समय के बाद पाया कि ये कीड़े साफ़ पानी से निकलकर फिर गोबर के ढ़ेर में घुसकर वहीं मजे करने लग गये.. फ़िर उसे किसी ने समझाया कि अरे- ये गोबर के कीड़े गोबर में ही रहेंगे और इन्हें वहीं रहना अच्छा लगता है.. ये साफ़ जगह में नहीं रह सकते। ये यहां घुट कर मर जायेंगे।
ECR के भी कुछ चतुर – चालाक और जुगाड़ू अधिकारी भी गोबराहा कीड़े की तरह ही है जिनका स्थानांतरण ECR से बाहर हुआ पर वे जुगाड़ से घूम फिरकर फिर वापस ECR में भ्रष्टाचार का गोबर खाने आ जाते हैं।
ऐसे अधिकारियों का एक सिंडिकेट है इस सिंडिकेट में ग्रुप-ए के डायरेक्ट और ग्रुप-बी से प्रोन्नत दोनों किस्म के अधिकारी हैं, और दोनों एक दूसरे के पूरक और सहायक हैं- मिट्टी के ढेला और पेड़ के पत्ते की तरह।
ऐसे अधिकारी हर ग्रुप ,हर विभाग से हैं। कुछ तो ऐसे भी हैं जो गोबर (ECR) से निकले ही नहीं। इसी गोबर में जुनियर स्केल से HAG हो रिटायर हुए।
कुछ जो ज्यादा गोबर खाने के कारण बदनाम हुए, दूसरे रेलवे में ट्रांसफर हुआ, वह भी जुगाड़ तंत्र का सहारा ले फिर ECR के खटाल में आ पधारे है। लेखा विभाग में ऐसे गोबराहा कीड़े की भरमार है क्यूंकि इन गोबराहा कीड़ों पर महामहिम महाप्रबंधक (धृतराष्ट्र ) महोदय की कृपा कुछ ज्यादा ही बरसती है और ऐसे ही कीड़े इनके सानिध्य में ज्यादा ही पनपते है और इन्हें भी गोबर फल खाने को मिल जाता होगा।
ज्यादा दिन नहीं हुआ जब ऐसे ही एक प्रमुख गोबराहा कीड़ा ने एक समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में दूसरे रेलवे के सेवा से बर्खास्त दागी कीड़ा को विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मानित किया था। बात इतने में भी कहां खत्म होती है, गैर रेलवे खाते में टेन्डर का Earnest Money जमा लेने वाले एक दूसरे नामी गोबराहा कीड़ा का पदार्पण निर्माण विभाग में प्रमुख के रूप में हो गया है।
केवल कहने को ग्रुप-बी अधिकारी को ग्रुप-ए मिलने से दूसरे रेलवे में पोस्टिंग होती है, पर एक दूसरे नामी गोबराहा कीड़ा पर यह नियम लागू नहीं होता, घूम फिरकर पुनः गोबर में।
वैसे भी तुलसीदास जी कह गए हैं…
….समरथ को नहीं दोष गोसाईं..





