दानापुर: भारतीय रेलवे का पूर्व मध्य रेलवे,हाजीपुर, ज़ोन अभूतपूर्व ज़ोन के लिए विख्यात है और विख्यात इसलिए हैं क्योंकि यहां के कुख्यात “धृतराष्ट्र”महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह जो “महाभ्रष्ट” एवं मति भ्रष्ट हैं, ने अपने कारनामों से पूर्व मध्य रेलवे की प्रशासनिक व्यवस्था को ध्वस्त करने में कोई कोर कसर छोड़ने को तैयार नहीं है, ऐसा लगता है कि रेल सेवा से अवकाश प्राप्त करने के पहले पूर्व मध्य रेलवे को अवशेष बनाकर ही छोड़ेंगे।
कहानी के शीर्षक “माल महाराज का, मिर्ज़ा खेले होली” वैसे तो एक कहावत है लेकिन इस कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं दानापुर मंडल के मंडल विधुत अभियंता (सामान्य) फैयाज हसन जो कि अभी विधुत विभाग (सामान्य) के प्रभारी की भूमिका में हैं और जब प्रभारी की भूमिका में हैं तो सब पर भारी भी है! जहां एक ओर कर्मचारियों की कमी दिखाकर ठेका संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर रेलवे कर्मचारियों का घरेलू कार्यों में उपयोग एवं शोषण किया जा रहा है।
जहां एक ओर अधिकारियों के संरक्षण में ठीकेदार श्रमिकों का उत्पीड़न कर रहा है वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की पत्नियां और बच्चे रेलकर्मियों का शोषण कर रहे हैं। लगभग सारे अधिकारियों के यहां रेल कर्मचारियों की ड्यूटी घरेलू कार्यों में लगाया गया है, लेकिन कुछेक अधिकारी नवाबी के नशें में 7-9 कर्मचारियों को घरेलू कार्यों में लगाकर उनका शोषण कर रहे हैं।
आए दिन हो रहे हादसे , फेलियर के लिए मैनपावर की कमी को एक कारण बना दिया जाता है लेकिन दानापुर मंडल के लगभग 170 -180 स्टाफ अधिकारियों के आवास पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कहते हैं ना कि अंग्रेज देश से चलें गए लेकिन रेल अधिकारियों की अंग्रेजियत नहीं गई। सबसे बड़ी बात यह है कि इसकी जानकारी सबको है क्यूंकि सब इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं और भारतीय रेल का बेड़ा ग़र्क कर रहे हैं।
मंडल विधुत अभियंता (सामान्य) जो प्रभारी है के आवास पर
राकेश शर्मा, हेल्पर
प्रेम सागर, हेल्पर
विराट, हेल्पर
अमित, हेल्पर
नसीम, टेक्निशियन 1
रहमान, टेक्निशियन 1
बी के वर्मा, टेक्निशियन 1 ,
आदि घरेलू काम कर रहे हैं, और इस बात की पुष्टि सबके मोबाइल लोकेशन से की जा सकती है। उपरोक्त वर्णित सभी कर्मचारियों द्वारा पिछले 6 महीने में कौन-कौन से काम किए गए हैं,उसका सम्पूर्ण विवरण संबंधित सुपरवाइजर से अविलंब मांगा जाना चाहिए ।इन कर्मचारियों द्वारा कौन कौन सा फेलियर अटेंड किया गया है,उसका पूरा विवरण के साथ जानकारी को साझा किया जाना चाहिए। विधुत विभाग का बेड़ा ग़र्क करने में फैयाज हसन जैसे अधिकारियों का बहुत बड़ा हाथ है,इस बात से सारे लोग वाकिफ हैं लेकिन हमाम में सारे नंगे हैं।
एक बात तो तय है कि भारतीय रेल के टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रेट रेलमंत्री ने 52 सप्ताह 52 सुधार की बात कह कर चली आ रही विसंगतियों को स्वीकार तो कर ही लिया है लेकिन देखने वाली बात यह है कि 09 जनवरी 2026 को रेलमंत्री ने 52 सप्ताह 52 सुधार की बात कही थी लेकिन 20 सप्ताह बीत जाने के बाद भी सुधार की शुरुआत नहीं होना एक जुमला ही लगता है!
क्या यह एक गंभीर मामला नहीं है और इस व्यवस्था में सुधार नहीं होना चाहिए?
देखिए आगे आगे क्या होता है!
सफ़र जारी है…





