- ट्रेनों की “अनिश्चितता” की तरह भारतीय रेल की”कुव्यवस्था” का परिचायक बन गया “स्थानांतरण” एवं “पदस्थापना”
- बेलगाम स्थानांतरण एवं पदस्थापना के कारोबार ने रेलवे के विकास से अधिक भ्रष्टाचार की रफ्तार को ही बढ़ाया है
- बच्चे की 10वीं की परीक्षा के नाम पर डीआरएम का पद लेने से इंकार कर अधिकारी ने व्यवस्था पर उठाया सवाल
पटना: जिस तरह से भारतीय रेल में ट्रेनों का समय पर परिचालन “अनिश्चितता” का परिचायक है, ठीक उसी तरह अधिकारियों एवं कर्मचारियों का “स्थानांतरण” एवं “पदस्थापना” भी भारतीय रेल की”कुव्यवस्था” का परिचायक बन गया है। बीते दिनों पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर के प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता का स्थानांतरण आदेश E(O)03-2025/TR/454 dated 04.09.2025 के माध्यम से जारी किया जाता है और ठीक तीन महीने के बाद रेलवे बोर्ड के आदेश संख्या E(O)03-2025/TR/454 dated 04.12.2025 के माध्यम से रद्द कर दिया जाता है।
पुनः ठीक एक सप्ताह के बाद रेलवे बोर्ड के आदेश संख्या E(O)03-2025/TR/593 dated 11.12.2025 के माध्यम से पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर के प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता आर के चौधरी का स्थानांतरण दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे कर दिया जाता है। जिस तरह से पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर के प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता आर के चौधरी का स्थानांतरण आदेश जारी किया गया, फिर तीन महीने बाद स्थानांतरण आदेश रद्द कर दिया गया और फिर सात दिन बाद स्थानांतरण आदेश जारी कर दिया गया, व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है लेकिन व्यवस्था में बैठे लोगों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि “स्थानांतरण” एवं “पदस्थापना” अवैध कमाई का जरिया बन गया है।
खैर उपरोक्त मामला कोई अकेला मामला नहीं है। रेलवे बोर्ड द्वारा आदेश संख्या E(O)03-2024/TR /460 dated 20.09.2024 के माध्यम से पूर्व मध्य रेलवे के दीनदयाल उपाध्याय मंडल में पदस्थापित अमन कुमार, मंडल विद्युत अभियंता (परिचालन) टीआरएस का स्थानांतरण सीएलडब्ल्यू , चितरंजन किया जाता है, लेकिन आदेश का क्रियान्वयन नहीं होता है। पुनः पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर के आदेश संख्या GAZ/256/2025 dated 21.10.2025 के माध्यम से सीएलडब्ल्यू चितरंजन किया जाता है, लेकिन इस आदेश का क्रियान्वयन नहीं होना भी व्यवस्था पर सवाल उत्पन्न करता है।
अब सवाल यह उठता है कि स्थानांतरण आदेश का क्रियान्वयन समय पर क्यूं नहीं हो पाता! जब इस संबंध में बहुत सारे अवकाश प्राप्त अधिकारियों ने जो अनुभव और विचार साझा किए, विचारणीय है। अभी तक तो यही देखने को मिलता है कि भारतीय रेलवे में स्थानांतरण का कोई भी समय निर्धारित नहीं है जैसा कि बैंकिंग सेक्टर में है, प्रायः ऐसा देखने को मिलता है कि बैंकिंग सेक्टर में जो स्थानांतरण होता है, मार्च अप्रैल में होता है और ऐसा होने से स्थानांतरण होने वाले को भी कोई विशेष परेशानी नहीं होती, क्योंकि नए स्थान पर बच्चों के नामांकन में कोई परेशानी नहीं होती।
प्रायः ऐसा देखने को मिलता है कि जब कोई भी नया अधिकारी रेलवे में ज्वायन करता है ,तब उसकी इच्छा होती है कि डीआरएम (मंडल रेल प्रबंधक) और जीएम (महाप्रबंधक) बनें। लेकिन अभी पिछले दिनों एक अधिकारी द्वारा डीआरएम का पद लेने से सिर्फ इसलिए इंकार कर दिया गया क्योंकि उनके बच्चे की 10वी की परीक्षा होनी है।
रेलवे बोर्ड के आदेश संख्या E(O)03-2025/TR/165 dated 11.12.2025 के माध्यम से पश्चिम रेलवे में पदस्थापित उमेश कुमार को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल में मंडल रेल प्रबंधक के लिए आदेश जारी किया जाता है और अविलम्ब ही उमेश कुमार अपने बच्चे की 10वी की परीक्षा को लेकर डीआरएम का पद ग्रहण करने से इंकार करते हैं।
असमय स्थानांतरण होने से बच्चों का पढ़ाई लिखाई तो प्रभावित होता ही है, बहुत सारे अधिकारी अपने नियुक्ति स्थान पर योगदान तो देते हैं लेकिन पुराने पदस्थापना स्थल पर भी रेल आवास रखते हैं, और इससे व्यवस्था तो प्रभावित होता ही है, अधिकारियों का पारिवारिक जीवन भी प्रभावित होता है।
व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि स्थानांतरण एवं पदस्थापना नीति की समीक्षा हो, क्योंकि वर्तमान व्यवस्था में स्थानांतरण एवं पदस्थापना एक कारोबार बन गया है और जब स्थानांतरण एवं पदस्थापना कारोबार बन जाए तो भ्रष्टाचार की रफ्तार बढ़ना स्वाभाविक है और भ्रष्टाचार की अनियंत्रित रफ्तार ने रेलकर्मियों एवं रेल उपभोक्ताओं को परेशान कर रहा है।इस परेशानी से निजात दिलाने की जिम्मेदारी रेलमंत्री महोदय की है,अब देखने वाली बात यह होगी की भारतीय रेल के टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रेट रेलमंत्री नींद से कब जागेंगे।






भारतीय रेल्वे भ्रष्टाचार का खजाना है ऑन रिक्वेस्ट, म्यूचुअल ट्रान्सफर एवं अवकाश के लिए भी अधिकारियों द्वारा पैसे लिया जाता हैं