ECR : विधुत विभाग बना भ्रष्टाचार एवं भ्रष्टाचारियों का ऐशगाह, “माफिया” द्वारा विद्युत विभाग का “चीरहरण”

ECR : विधुत विभाग बना भ्रष्टाचार एवं भ्रष्टाचारियों का ऐशगाह, “माफिया” द्वारा विद्युत विभाग का “चीरहरण”

दानापुर. पूर्व मध्य रेलवे, दानापुर मंडल के विद्युत विभाग के परिभ्रमण से यह परिलक्षित होता हैं कि विधुत विभाग भ्रष्टाचार एवं भ्रष्टाचारियों का ऐशगाह बन गया है और विधुत विभाग की व्यवस्था कब्र में दफना दी गई है और व्यवस्था को दफनाने वाले लूट का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। दानापुर मंडल का विद्युत विभाग, बिना काम के भुगतान जिसकी पहचान बन चुकी है, अपने कारनामों से चर्चा के केंद्र में है।

विधुत विभाग, दानापुर द्वारा निविदा संख्या EL- 50 – DNR -OPEN – 04 -2024 -2025 जारी किया जाता है, जिसमें Electrical (G) related works for construction of sick line shed and others required facility at Ara coaching complex of Danapur division.करना था।
निविदा की राशि ₹ 1 करोड़, 92 लाख,93 हजार,419 रूपए है और निविदा हमेशा की तरह Bhagat Engineering works, Munger को आवंटित हुआ, जो भी काम Bhagat Engineering works Munger को आवंटित किया गया उसमें भेरियेशन होना शत-प्रतिशत तय है और इस निविदा में भी ₹ 93 लाख,09 हजार,20 रूपए का भेरियेशन किया गया।

यह कार्य आरा में एसी कोच के लिए सीक लाईन से संबंधित था।इस निविदा में 11500 मीटर केबुल के लिए भेरियेशन किया गया है, जबकि इस सीक लाईन की लम्बाई इतनी हैं ही नहीं! सीक लाईन का लम्बाई महज़ 600/700 मीटर होता है और जबकि पहले से ही Schedule में केबुल लिया गया है।
यदि 11500 मीटर केबुल खरीदने के लिए भेरियेशन किया गया है तो 11500 मीटर केबुल लेइंग का भी भेरियेशन किया जाना चाहिए था और जब केबुल लेइंग हुआ ही नहीं तो केबुल गया कहां! स्पष्ट है केबुल की खरीदारी कागजातों पर हुई।

जहां तक 11500 मीटर केबुल खरीदारी की बात है तो रेलवे बोर्ड की व्यवस्था एवं नियमानुसार कोई भी खरीदारी GEM Portal से होनी चाहिए लेकिन यहां तो 11500 मीटर केबुल ओपेन टेंडर के माध्यम से ही लिया जा रहा है जबकि आपातकालीन स्थिति में 1000 मीटर केबुल की खरीदारी ओपेन टेंडर से की जा सकती है ऐसा आदेश प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता, पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर द्वारा निर्गत है ऐसा विद्युत विभाग के एक वरीय अधिकारी का कहना है।
विधुत विभाग के एक संवेदक का कहना है कि इस सीक लाईन में लगभग तीन साल पहले भी इसी फर्म द्वारा कार्य किया जा चुका है।इस फर्म का तीन-चार और फर्म भी है जो नाम बदल कर काम करता है।

संवेदक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि Bhagat Engineering works Munger के हर निविदा में भेरियेशन तय है तब तो यह सवाल भी उठता है कि विधुत विभाग में चल रही “बिना काम के भुगतान” योजना के क्रियान्वयन एवं निष्पादन में वित्त विभाग के वरीय मंडल वित्त प्रबंधक की क्या भूमिका है क्योंकि ऐसी शिक़ायत बार बार सुनने और देखने को मिलता है कि भेरियेशन नहीं होने के कारण काम विलंबित हो गया,तब तो यह स्पष्ट है कि भेरियेशन के खेल में वित्त विभाग भी “आनन्द ही आनन्द” से आनंदित हैं।

भले ही विधुत विभाग में चल रही “माफिया” के “चीरहरण” से लूट खसोट में शामिल “आनंद ही आनंद” से आनंदित हैं लेकिन आमजन एवं कर्मयोगी कर्मचारी तो चिंतित हैं और इस चिंता से जिनकी निवारने की जिम्मेदारी है कहीं वो भी “आनंद ही आनंद” से आनंदित तो नहीं!

खैर यह सोचने का विषय है सोचते रहिए और इंतजार कीजिए “चीरहरण” की एक और कहानी का..
आप भी “आनंद ही आनंद” से आनंदित रहिए!

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