कर्मचारियों से लूट, अधिकारियों को छूट,लूट सको तो लूट : पूर्व मध्य रेलवे(पार्ट 2)

अब तक आपने देखा कि कर्मचारियों से डैमेज रेंट रिकवरी के मामले में लूट जारी हैं और अधिकारियों को डैमेज रेंट रिकवरी से छूट हैं, छूट तो मान लिया जाए कि एक निश्चित समय के लिए ही हैं,जब कर्मचारियों से कटौती हुई हैं तो अधिकारियों से भी डैमेज रेंट रिकवरी निश्चित ही हैं। Railwellwishers को आरटीआई से ऐसी जानकारी मिली है कि अधिकारियों को डैमेज रेंट निर्धारण में भी भारी छूट हैं! श्री रंजीत कुमार सिंह 29.05.2006 को दानापुर मंडल में जन सम्पर्क अधिकारी के पद पर योगदान देते हैं और ट्रांसिट आवास संख्या 899 बी पर कब्जा कर आवास की समस्या का निदान करते हैं, आवास समस्या का निदान ही नहीं करते हैं, रेलवे प्रशासन से जून 2006 से लेकर जुलाई 2007 तक आवास भत्ता के रूप में 21,264 रूपए का भुगतान भी पा जाते हैं,अब उन्हें किस आवास के लिए भत्ता दिया गया है यह तो जांच का विषय है क्योंकि इसके बाद उन्हें आवास भत्ता नहीं मिला है, एक बात ध्यान देने वाली है कि ट्रांसिट आवास का आवंटन नियुक्ति एवं पदभार ग्रहण करने के समय ही होता है तब फिर रंजीत कुमार सिंह ने जून 2006 से लेकर जुलाई 2007 तक आवास भत्ता कैसे प्राप्त किया?


खेल यहीं खत्म नहीं हुआ,20.03.2014 तक दानापुर मंडल में ही कार्यरत रहे,21.03.2014 से लेकर 15.03.2015 तक धनबाद मंडल में पदस्थापित रहे, फिर भी दानापुर में ट्रांसिट आवास संख्या 899 बी को अपने कब्जे में ही रखा, क्या इसके लिए उन्हें प्रशासन से अनुमति मिली थी, यदि अनुमति नहीं ली थी तो इस कालखंड में अवैध कब्जा जमाए रखने के लिए डैमेज रेंट रिकवरी पत्र जारी किया जाना चाहिए था, ऐसा कुछ तो नहीं किया गया फिर 16.03.2015 से लेकर 06.06.2017 तक दानापुर मंडल में ही कार्यरत रहे।06.06.2017 के बाद इनका तबादला हाजीपुर मुख्यालय और फिर हाजीपुर मुख्यालय से सोनपुर मंडल में स्थानांतरण हो गया, लेकिन इन्होंने अपना निवास ट्रांसिट आवास संख्या 899 बी को बनाएं रखा और तब तक रखा जब तक Railwellwishers ने आरटीआई के माध्यम से रेल प्रशासन को नहीं जगाया।20 अक्टूबर 2022 को आरटीआई से जानकारी मांगने पर ट्रांसिट आवास संख्या 899 बी (टाईप 4) को 15.11.2022 को खाली कर दिया , आरटीआई से जानकारी मिली कि अधिकारी विश्राम गृह का लाइसेंस फी के मद में जून 2007 से लेकर फरवरी 2014 तक कटौती हुई हैं तब फिर सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि मार्च 2014 से लेकर नवंबर 2022 तक के लाइसेंस फी की कटौती क्यों नहीं हुई? एक सवाल यह भी है कि जून 2006 से लेकर जुलाई 2007 तक के लाइसेंस फी की कटौती क्यों नहीं हुई?


Railwellwishers द्वारा लगातार प्रयास करने पर 08.09.2023 को डैमेज रेंट रिकवरी पत्र जारी किया गया है और इसे देखने पर स्पष्ट है कि डैमेज रेंट रिकवरी पत्र जारी करने में छूट प्रदान की गई है और छूट प्रदान करने के पीछे इनका कौन-सा ऐसा काम हैं जिसका इन्हें ईनाम दिया गया है! 06.06.2017 को दानापुर मंडल से हाजीपुर मुख्यालय तबादला हो जाने 23.06.2020 तक हाजीपुर मुख्यालय में पदस्थापित रहे,मान लिया जाए कि हाजीपुर मुख्यालय में पदस्थापना दौरान दानापुर में आवास रख सकते थे लेकिन क्या इसके लिए इन्होंने अनुमति ली?
Railwellwishers इस बात की पुष्टि करता है कि इन्होंने कोई अनुमति नहीं ली थी, क्योंकि इनसे लाईसेंस फी की कटौती आवास खाली करने पर हुआ है,06.07.2020 को इन्होंने सोनपुर में योगदान दिया है,तब फिर दानापुर मंडल में आवास रखने की छूट कैसे?
इनपर जारी डैमेज रेंट रिकवरी पत्र से यह स्पष्ट है कि 01.12.2014 से लेकर 15.03.2015 तक और 03.06.2022 से लेकर 14.11.2022 तक के लिए 2,27,084 रूपए का डैमेज रेंट रिकवरी पत्र जारी किया गया है, जबकि कायदे से इनपर मार्च 2014 से लेकर नवम्बर 2022 तक डैमेज रेंट रिकवरी पत्र जारी किया जाना चाहिए क्योंकि इनसे लाईसेंस फी की कटौती फरवरी 2014 तक ही की गई है।
सबसे बड़ा गड़बड़झाला तो इन्होंने यह किया है कि रेल आवास में रहते हुए इन्होंने रेल प्रशासन से हाजीपुर मुख्यालय एवं सोनपुर मंडल में पदस्थापना काल में आवास भत्ता भी प्राप्त किया है। अब आप ही बताइए इसे क्या कहेंगे “मुफ्त का चंदन तो भर ललाट रघुनंदन”, मुफ्त का आवास और साथ में आवास भत्ता भी, मानें की डबल मजा लेने में कोई संकोच नहीं!
महाप्रबंधक महोदय
सिर्फ जीना मायने नहीं रखता, सच्चाई से जीना मायने रखता है। क्योंकि जिंदगी और समय जो “शेष”है वहीं “विशेष” हैं, और यह मामला विशेष हैं लेकिन अभी डैमेज रेंट रिकवरी की कहानी शेष हैं।
सफ़र जारी हैं..

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  1. Suresh Kandwal

    बहुत बढ़िया। भ्रष्टाचार उजागर करते रहिये।

    शुभकामनाएं!

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