पटना: किसी भी निर्णय पर पहुंचने के पहले इतिहास और विरासत को स्मरण करना आवश्यक होता है। पूर्व मध्य रेलवे के कार्मिक विभाग का इतिहास दागदार रहा है और कार्मिक विभाग के कारनामों से पूर्व मध्य रेलवे शर्मशार हुआ है, कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है क्योंकि इतिहास में ज्यादा पीछे जाने की जरूरत नहीं है।
04 फरवरी 2025 को दीनदयाल उपाध्याय मंडल में चीफ लोकों इंस्पेक्टर के आयोजित पदोन्नति परीक्षा में दो अधिकारी समेत 26 आरोपियों को जेल भेजकर सीबीआई ने कार्मिक विभाग की दशा और दिशा का दर्शन कराया था। सीबीआई की धमक से कार्मिक विभाग की दशा एवं दिशा का दर्शन तो हुआ ही रेल प्रशासन की भी नींद खुली और रेलवे बोर्ड ने सख्त निर्णय लेते हुए विभागीय पदोन्नति परीक्षा लेने की जिम्मेदारी रेलवे भर्ती बोर्ड को देने का फैसला लिया।
लेकिन बहुत सारे विभागीय पदोन्नति परीक्षा की प्रक्रिया जारी थी, कहीं परीक्षा हो गया था, परिणाम भी घोषित हो गया था, लेकिन अंतिम पैनल नहीं बना था तो कहीं परीक्षा परिणाम नहीं निकला था , ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए और कर्मचारियों के पदोन्नति जैसे मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने अपने आदेश संख्या E/(NG)I/2025/PM 1/3 New Delhi दिनांक 28.03.2025 के माध्यम से एक आदेश जारी किया और निर्देशित किया कि जो अंतिम परिणाम जारी किया जाएगा उस पर प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी या ज़ोनल यूनिट के हेड का व्यक्तिगत हस्ताक्षर अवश्य ही होगा।
19.06.2025 को रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ पटना द्वारा सामान्य विभागीय प्रतियोगी परीक्षा 2023 का परिणाम रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ के सूचना संख्या 21/2023 दिनांक 19.06.2025 के माध्यम से किया गया लेकिन परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों द्वारा परीक्षा परिणाम में रेलवे बोर्ड के आदेशानुसार मेघा सूचकांक फार्मूला का पालन नहीं करने की शिकायत पर रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ पटना द्वारा अपने आदेश संख्या 22/2023 दिनांक 26.06.2025 को परीक्षा परिणाम को निरस्त कर दिया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि रेलवे बोर्ड के 28.03.2025 के आदेशानुसार प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी के व्यक्तिगत हस्ताक्षर से ही परीक्षा परिणाम जारी होना था तब तो यह तय है कि परीक्षा परिणाम जारी करने में मेघा सूचकांक फार्मूला पालन नहीं करने में भी उनकी ही भूमिका रही होगी!रेल सूत्रों से Railwellwishers को ऐसी जानकारी मिली है कि परीक्षा लेने एवं परिणाम जारी करने वाली एजेंसी का चयन मुख्यालय स्तर पर ही हुआ है और तब इतनी बड़ी चूक किसी बड़े खेल का इशारा करती है क्योंकि मामला 94 कनीय अभियंता की नियुक्ति का हैं।
पूर्व मध्य रेलवे का कार्मिक विभाग जिसकी आर्थिक नीतियों के कारण कर्मियों की स्थिति कारूणिक है, इतिहास को देखते हुए कहा जा सकता है कि बड़े खेल को अंजाम दिया गया है और खेल को अंजाम देने के लिए ही नियमों की अनदेखी की गई है।
रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ, पटना द्वारा जारी सूचना संख्या 21/2023 दिनांक 19.06.2025 में उल्लेखित नोट भी विवाद का विषय है। नोट में लिखा गया है – यद्धपि उक्त परिणाम को बनाने में पूर्ण सावधानी बरती गई है, फिर भी मानवीय भूल या टंकण भूल के कारण हुई किसी भी त्रुटि को सुधारने का अधिकार रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ, पूर्व मध्य रेल, पटना के पास सुरक्षित हैं। रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ, पूर्व मध्य रेल किसी भी अभ्यर्थी से किसी भी प्रकार के पत्राचार को संज्ञान में लेने में खेद प्रकट करता है। रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ, पटना, पूर्व मध्य रेल का उपरोक्त संदेश कहां तक उचित है!
शासन एवं प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। लेकिन एक बात तो तय है कि सामान्य विभागीय प्रतियोगी परीक्षा 2023 के परीक्षा परिणाम में रेलवे बोर्ड के आदेशों की अनदेखी जानबूझकर की गई है और मामले की सीबीआई जांच ही बड़े खेल का पर्दाफाश कर सकती है क्योंकि परीक्षा परिणाम में हुई अनियमितता पूर्व मध्य रेलवे की नियति है।






डी डी यू यानी मुगलसराय डिवीजन में रेलवे कर्मचारियों कि समस्या बिकराल रूप धारण किए हुए है।
मैं खुद और मेरे कलिक कई समस्याओं से जूझ रहे है, जिसमें एक समस्या का जिक्र करता हूं।
रेलवे बोर्ड का पत्र के अनुसार जिनकी भी पदोन्नति 2016 से 2018 के बीच हो, वे अपने रिफिक्सेसन के लिए आवेदन कर सकते हैं, आवेदन अगस्त 2023 में किया, कितने विनती कि बड़ा बाबू सच्चे लाल यादव से बोला कर दुंगा, कम्पलेन किया आनलाइन और सि पी ग्राम पे फिर भी अभी तक कुछ नहीं हुआ और अन्य स्टाफ से बोला कि हमें कम्पलेन करने से मना करे, मेरा फ़ोन नहीं उठाता।
मैं अब क्या करूं, उस आवेदन में उपरी उपस्कर बिभाग डेहरी आन सोन से 1- रामायण राय 2- आशुतोष कुमार 3- पृथ्वीराज चौहान 4- कोमल सिंह
चारो एक हीं प्यून बुक से कार्मिक विभाग डी डी यू के लिए भेजा था, आज लगभग दो वर्ष हो गए हैं।
डी डी यू यानी मुगलसराय डिवीजन में रेलवे कर्मचारियों कि समस्या बिकराल रूप धारण किए हुए है।
मैं खुद और मेरे कलिक कई समस्याओं से जूझ रहे है, जिसमें एक समस्या का जिक्र करता हूं।
रेलवे बोर्ड का पत्र के अनुसार जिनकी भी पदोन्नति 2016 से 2018 के बीच हो, वे अपने रिफिक्सेसन के लिए आवेदन कर सकते हैं, आवेदन अगस्त 2023 में किया, कितने विनती कि बड़ा बाबू सच्चे लाल यादव से बोला कर दुंगा, कम्पलेन किया आनलाइन और सि पी ग्राम पे फिर भी अभी तक कुछ नहीं हुआ और अन्य स्टाफ से बोला कि हमें कम्पलेन करने से मना करे, मेरा फ़ोन भी नहीं उठाता।
मैं अब क्या करूं, उस आवेदन में उपरी उपस्कर बिभाग डेहरी आन सोन से 1- रामायण राय 2- आशुतोष कुमार 3- पृथ्वीराज चौहान 4- कोमल सिंह
चारो एक हीं प्यून बुक से कार्मिक विभाग डी डी यू के लिए भेजा था, आज लगभग दो वर्ष हो गए हैं।
Very bad
Ye konsi nai baat he pura sarkaari mahkama bhrasht he bharat me
I remained over this railways for over 20 years. I suffered various apprehension during my service being so dirty feudal corrupt sycophantic working culture.
A booking clerk shot dead from fake ticket racketeers for not accepting fake tickets to book to innocent labourers going to Amritsar Surat Delhi Kolkata Ahmedabad etc. A cashier shot dead from momey lender for his disbursing monthly salary to the GrD staff on due date & time fixed as per norms. Since he had told him to pay salary to the staff only most particularly sweepers etc when he will be present on counter to get interest money from them for money lent. Since they are liquor addict & take money from l unscrupulous rowdy money lenders from local dominating caste. Cashier had joined in Barauni Jn recently who was not aware about the system there in vogue. In it cashier makes good money too from money lenders who take even over 20% interest from the rly GrD staff mostly liquor addict sweepers. A GrA officer got threatened from goons attached with minister for Rail for unearthing fake ticket printing racketeering. Officer got transferred to other zone from railway board as so considered being GrA officer.
An IRSE officer was compelled to stay underground for three months being threatened from mafia cum leader cum contractor whose representative was bullied from officer at track finding substandard track works being done to be vulnerable to derailment.
A Jr clerk attached to CPO/SrDPO used to attend his duties by car. He was most corrupt bribe addict as well middleman too for various jobs viz recruitment promotion transfer even appointment of APO GrB officers. He got also promoted to APO. For APO post Rs 4lacs to 5lacs was bribed at that time.
An IPF took Rs One lac from a villager to oppress his enemy being implicated in false case under 3UPRP acts&how much that man & his wife were harassed assaulted & extorted money that I don’t like to write. He filed case against IPF in Begusarai court. But compelled to withdraw case too. An appeal was required to be drafted to give Rly board. None dared even to draft it. I was also asked & denied being scared from so notorious personnel of notorious department of RPF.
Good decision