बड़े इंजिनीयर का
बड़ा दावत चल रहा था
उड़ा रहे थे मज़ा बड़े लोग,
जूनियर टुकुर टुकुर देख रहा था।
लोग पी रहे थे दारू व्हिस्की
वह खून का घूंट पी रहा था
क्यों न हो
दावत का इंतज़ाम उसी ने किया था
सारा खर्चा वही भर रहा था।
पूछा किसी ने बड़े साहब से
अरे ये तुम क्या कर रहे हो,
जूनियर से खर्चा करा रहे हो ।
इंजिनीरिंग कॉलेज मे जूनियर खाता था
सीनियर पैसा चुकाता था
पहले नही कमाते थे
फिर भी जूनियर को खिलाते थे
अब क्यो बदल गए हो,
जूनियर से खर्चा करा रहे हो ।
इंजीनीयरिंग सर्विस मे आ गए हो
अच्छा ओहदा पा गए हो.
खूब कमा रहे हो.
शर्म नही आती तुम्हे.
फिर भी जूनियर का खा रहे हो।
बोला बड़े साहब ने.
इंजीनियरिंग कॉलेज में,
पहले वो मुफ़्त का खाता था.
मैं रो रो कर पैसा चुकाता था.
उस समय का बदला चुका रहा हूँ
इसलिए जूनियर से खा रहा हूँ ।





Ji mere ko n****** chahie
छोटे बड़े स्टेशनों का काया कल्प करना ,नव निर्माण पर जोर देना, अवैध वेंडरों पर रोक लगाया जाए, नवनिर्माण पर गुणवत्ता का ध्यान देने की जरूरत है, गाड़ियों का समय पालन से चलाया जाय, आईआरसीटीसी द्वारा खानपान स्टॉल का गुणवत्ता समय पर जांच कराया जाए। पैंट्री कार का नियमित जांच, तथा रेट से ज्यादा पैसा लिया जाता है।
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