दानापुर मंडल के “टीआरएस विभाग” में चल रहा है “संस्पेंशन”का खेल, सीएलआई शौकत मियां भी किए गए संस्पेंड

दानापुर मंडल के “टीआरएस विभाग” में चल रहा है “संस्पेंशन”का खेल, सीएलआई शौकत मियां भी किए गए संस्पेंड

पटना: जब पुरा देश कुंभ की चर्चा में हो और रेल महकमा देर से ही सही अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में अस्त व्यस्त हो चलती ही जा रही है,तब पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल के “टीआरएस विभाग “के कार्यशैली की चर्चा कर्मचारियों के”संस्पेंशन” को लेकर हो रही है। चर्चा हो भी तो क्यूं ना हो जब बिना किसी अपराध के भी कर्मियों को संस्पेंड कर दिया जाए और उसके द्वारा कर दिया जाए जिनके कारनामों के चलते रेल प्रशासन को 08 फरवरी को पूर्व मध्य रेलवे सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित परीक्षा को रद्द करना पड़ा था । जब परीक्षा में खुलेआम धांधली हुई और धांधली भी ऐसा कि 10.00 बजे से शुरू होने वाला परीक्षा 13.35 बजे शुरू हुआ।

खैर जो होना चाहिए था वही हुआ लेकिन परीक्षा रद्द होने से वरीय मंडल विधुत अभियंता परिचालन श्री प्रशांत कुमार “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे” की तरह किसी को भी संस्पेंशन आदेश थमा कर अपनी भड़ास निकाल रहे है, भड़ास निकालने के चक्कर में इन्होंने सी एल आई शौकत मियां को भी संस्पेंशन आदेश थमा दिया और इसलिए थमा दिया क्योंकि उन्होंने अपनी अस्वस्थता के बाबजूद बक्सर स्टेशन पर भीड़ भाड़ नियंत्रण में अपने दायित्वों का निर्वहन किया लेकिन ट्रेन लेट हो जाने के कारण समय पर नहीं पहुंच सके। ठीक है विलम्ब से पहुंचे लेकिन अपनी ड्यूटी तो निभाईं लेकिन दूसरे सीएलआई जिनकी भी ड्यूटी साथ में ही बक्सर स्टेशन पर लगाई गई थी , ड्यूटी पर पहुंचे ही नहीं उनके साथ क्या हुआ?

ड्यूटी करने वाले को सजा
और
जी हजूरी करने वाले को मज़ा।
ऐसा कैसे हो सकता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आप भेदभाव करे। इसका तात्पर्य यह हुआ कि आप डर का माहौल बना कर भौकाल टाईट करना चाहते है।
खैर जो भी हो टीआरएस विभाग के कर्मियों के बीच भय एवं असुरक्षा का माहौल तो बना ही दिया है, कर्मियों का कहना है कि जिस तरह का माहौल बना हुआ है आने वाले दिनों में कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि दानापुर के वरीय मंडल विधुत अभियंता परिचालन को रेल की चिंता नहीं अपने खेल की चिंता है जो वो “हवाला” के माध्यम से कर रहे है और वो “हवाला” करने के लिए सिस्टम का हलाला कर दिया है। यह व्यवस्था के लिए शर्मशार करने वाला है। स्पाउज ग्राउंड पर अन्तर रेलवे स्थानांतरण पर आने वाले अभ्यर्थियों के पदस्थापना में कम से कम एक महीने से लेकर तीन महीने तक प्रतीक्षा कराना कहां तक न्यायसंगत है?

वरीय मंडल विधुत अभियंता परिचालन द्वारा पिछले आठ महीने के कार्यकाल में स्पाउज ग्राउंड पर अन्तर रेलवे स्थानांतरण पर आए अभ्यर्थियों के पदस्थापना में लगा समय जांच का विषय है क्योंकि तिलैया का भय दिखाकर बक्सर फतुहा बाढ़ में पदस्थापना कर “हवाला”को निवाला बनाया है जो कि सतर्कता विभाग के लिए जांच एवं कारवाई का विषय है लेकिन रेल प्रबंधन के लिए सीएलआई परीक्षा के रद्द होने के बाद इनके द्वारा लिए गए निर्णयों की समीक्षा भय के माहौल को दूर करने के लिए नितांत आवश्यक है, क्योंकि मामला रेलवे के सुरक्षा एवं संरक्षा से जुड़ा हुआ है।
व्यवस्था सुनिश्चित हो , उम्मीद तो किया ही जा सकता है।

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