दानापुर: पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर में रेलवे बोर्ड के आदेशों की अनदेखी कोई नई बात नहीं है, आदेशों की अनदेखी में पूर्व मध्य रेलवे का कोई सानी नहीं हैं और कार्मिक विभाग तो इस मामले में अव्वल स्थान रखता है लेकिन यह मामला वाणिज्य विभाग का हैं। रेलवे का ऐसा विभाग जिस पर राजस्व संग्रह करने की महती जिम्मेदारी हैं जहां रेल का आय और अन्य आय के लिए अन्याय भी होता रहे तो कोई बड़ी बात नहीं।
रेलवे बोर्ड के आदेश संख्या IRTS Cadre/2024/2 policy dt 10.01.2024 का अनुपालन पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक आदेश के सात महीने बीत जाने के बाबजूद नहीं करा सकें हैं, ऐसा भी नहीं हैं कि आदेश का संज्ञान नहीं है। Railwellwishers ने भी 06 मई को आरटीआई के माध्यम से उपरोक्त आदेश के क्रियान्वित हेतु जगाने का प्रयास किया है।

उपरोक्त आदेश के क्रम संख्या 02 में स्पष्ट निर्देश है कि IRTS SG ग्रेड अधिकारियों की पदस्थापना मुख्यालय में होनी चाहिए, मंडल में पदस्थापना हेतु Additional Members Traffic की लिखित अनुमति आवश्यक है।तब क्या IRTS SG ग्रेड प्राप्त श्री अमरेश कुमार,वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक की धनबाद मंडल मुख्यालय में पदस्थापित रहने हेतु Additional Members Traffic से अनुमति ली गई हैं , यदि नहीं ली गई हैं तब किस आधार पर SG ग्रेड प्राप्त अधिकारी श्री अमरेश कुमार पिछले सात महीने से आदेश के अनुपालन में बाधक बने हैं कहीं ऐसा तो नहीं कि धनबाद का धन करने का मन को टाल देता हों!
ऐसा भी तो हों सकता हैं..
हम तुम्हारे लिए
तुम हमारे लिए
फिर जमाने का क्या हैं,हमारा न हो
आपके प्यार का जो मिलें आसरा
फिर ख़ुदा का भी बेशक सहारा न हो।
खैर, जो भी हो लेकिन रेलवे बोर्ड के आदेशों का अनुपालन नहीं होना सिस्टम पर गहरे सवाल उत्पन्न करता है और उन अधिकारियों में गहरी निराशा जो मंडल मुख्यालय में पदस्थापना हेतु अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। यह तो नैसर्गिक न्याय के साथ खिलवाड़ हैं और जब सोच लक्ष्मीवादी हो तो ऐसा होना तय है लेकिन नियति नहीं!
खैर जो होना था हो गया लेकिन जो होना चाहिए था हो जाना चाहिए और यह जिम्मेदारी महाप्रबंधक महोदय की बनती हैं,जो कि खुद भी एक IRTS अधिकारी हैं और IRTS Cadre की संवेदना को अच्छी तरह समझ सकते हैं, नैसर्गिक न्याय की व्यवस्था हेतु महाप्रबंधक महोदय व्यवस्था को दुरुस्त करेंगे, उम्मीद करते हैं।
पीसीसीएम और सीनियर डीसीएम की यारी पूर्व मध्य रेलवे पर है भारी…. क्या सरकार को यही पसंद है!






Sab dhan ka khel hai dhanbad ka nahi
Yaha ddu division me bhi bahut ghafla chal raha h …
ये कोई नई बात नहीं है, जब रेलवे बोर्ड के आदेश को पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारी खुलेआम चुनौती देते हैँ चाहे मामला वाणिज्य विभाग का हो या पर्सनल विभाग का?? इनका एक अलग ही साम्राज्य चलता है इनको न कर्मचारी के समय से प्रमोशन से मतलब है न ही ट्रांसफर पोस्टिंग मे पारदर्शिता से हाँ जबाब देने मे एक दूसरे पर पल्ला जरूर झारते हैँ .