“आईआरटीएस” अधिकारी द्वारा “मेटल पास” का दुरूपयोग! रेलमंत्री लें संज्ञान।

“आईआरटीएस” अधिकारी द्वारा “मेटल पास” का दुरूपयोग! रेलमंत्री लें संज्ञान।

पटना: अजीब विडंबना है सोच कर देखिए जिस अधिकारी पर अनाधिकृत टिकट पर यात्रा करने वालों पर रोक लगाने की जिम्मेदारी है वो खुद “मेटल पास”का दुरूपयोग कर रहे हैं।
प्रायः ऐसे देखने को मिलता है कि यदि कोई अनाधिकृत टिकट पर यात्रा करते मिल गया तो वाणिज्य कर्मी बिना भुगतान के कल्याण नहीं करते भले ही इफटी कटे या काला कोट के जेब में। खैर यह तो होना ही चाहिए क्योंकि आज़ भी जब रेल टिकट पर यह पढ़ने को मिलता है कि आपके यात्रा टिकट से रेलवे को आपके यात्रा लागत का मात्र 57% ही मिलता है और बाकी की भरपाई आमजनों के टैक्स से होती है तो शर्मिंदगी भी होती है कि हमारे यात्रा टिकट की भरपाई आमजनों के टैक्स से हो रही है लेकिन सबसे दुख और शर्मिंदगी की बात है जिन पर जिम्मेदारी है वहीं व्यवस्था के लिए बीमारी है!

विदित है कि मेटल पास का उपयोग रेलवे अधिकारी को आन ड्यूटी यात्रा करने के लिए जारी किया जाता है, मेटल पास तीन तरह का होता है, गोल्ड मेटल पास महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी एवं रेलवे बोर्ड के उच्च अधिकारी को मिलता है,वरीय प्रशासनिक अधिकारी ग्रेड वाले अधिकारियों को सिल्वर मेटल पास मिलता है और उससे नीचे वाले को ब्रोंज मेटल पास मिलता है, ध्यान रहे मेटल पास कोई भी हो रेल अधिकारी ड्यूटी के दौरान ही उपयोग कर सकते हैं।
जी हां यही हकीकत है पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर का जहां अमरेश कुमार,उप मुख्य परिचालन प्रबंधक, हाजीपुर, “मेटल पास”का दुरूपयोग धड़ल्ले से कर रहे हैं और करें भी तो क्यूं नहीं करें क्योंकि अभी तक यही करते आए हैं, मजबूरी भी है, हाजीपुर पदस्थापना के बाद भी रेलवे आवास धनबाद में ही रखे हुए हैं और इसके पीछे भी कारण हैं कि धनबाद का धन धनबाद छोड़ने का मन नहीं करता क्योंकि इन्होंने धनबाद मंडल में मंडल वाणिज्य प्रबंधक पद पर रहते हुए 29 कर्मचारियों का स्थानांतरण आदेश निर्गत कर अपनी मनमानी और तत्कालीन रेल मंत्री के ओएसडी वेद प्रकाश से संबंधों का फायदा उठाते हुए रेलवे बोर्ड के आदेशों का तार तार कर दिया था।

गवाही झूठी हो सकती है लेकिन तस्वीरें झूठ नहीं बोलती, प्रमाण संलग्न है।

अब देखने की बात यह होगी कि भारतीय रेल के टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रैट रेलमंत्री जो सदन में बढ़ते खर्च और कम राजस्व का रोना रोते हैं और लाल गाड़ी से बेटिकट यात्रियों पर लगाम लगाने एवं बेटिकट यात्रा न करने का जागरूकता फैला रहे हैं अपने ही अधिकारी द्वारा “मेटल पास” के धड़ल्ले से दुरूपयोग पर धड़ल्ले से क्या कारवाई करते हैं, वैसे जानकारी मिली है कि पूर्व में एक अधिकारी द्वारा मेटल पास का दुरूपयोग करने पर रेल प्रशासन द्वारा सेवा से मुक्त कर दिया गया था।अनजाने में की गई गलतियां को माफ़ किया जा सकता है लेकिन जो गलती जानबूझकर की गई है, न्याय तो होना ही चाहिए और उम्मीद करते हैं न्याय जल्दी ही होगा।
Railwellwishers आप सभी रेल उपभोक्ताओं से अनुरोध करता हैं कि आप सभी उचित टिकट लेकर ही यात्रा करें।
HAPPY JOURNEY

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2 Comments

  1. Rishabh Singh

    यह स्थिति वाकई शर्मनाक है। जिन अधिकारियों पर नियमों को लागू करने और अनियमितताओं को रोकने की ज़िम्मेदारी है, अगर वही लोग अपने पद और पास का दुरुपयोग करने लगें तो आम जनता का सिस्टम से भरोसा उठना लाज़मी है। रेलवे पहले से ही घाटे में चल रही है और यात्रियों से मिलने वाला किराया पूरी लागत को पूरा नहीं कर पाता, ऐसे में अगर अधिकारी ही मुफ्तखोरी और अनुचित लाभ उठाएँगे तो स्थिति और खराब होगी। आम जनता टैक्स और किराया भरती है ताकि सिस्टम सही से चले, लेकिन जब जिम्मेदार लोग ही नियम तोड़ते हैं तो यह सीधे-सीधे जनता के साथ अन्याय है। ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई अधिकारी अपनी शक्ति का दुरुपयोग न कर सके।

  2. Nitesh Ranjan

    Very corrupted person

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