पटना: पुरस्कार क्या है पुरस्कार किसी व्यक्ति के प्रयासों और उपलब्धियों को अधिकारिक तौर पर मान्यता देना है। भारतीय रेलवे के आरपीएफ विभाग में डीजी पुरस्कार रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के महानिदेशक स्तर से हर साल उत्कृष्ट और समर्पित सेवा के लिए चयनित अधिकारियों को दिया जाता है।
इस पुरस्कार के लिए अधिकारियों का चयन उनके कार्यों, सेवा के प्रति निष्ठा और रेल अपराधों को रोकने में उनके योगदान के आधार पर किया जाता है।
आप यह भी कह सकते हैं कि पुरस्कार पुरुषार्थ का प्रमाण है लेकिन 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महानिदेशक (डीजी) पुरस्कार कुछ ऐसे “दागी” और दागी में भी “विशिष्ट दागी” पा गए जिसको लेकर रेल महकमे में पुरस्कार में भी “दाम” का पैगाम चर्चा का विषय आज भी है और चर्चा हो भी तो क्यूं नहीं हो जब पुरस्कार ऐसे को मिल जाए जो अपने काले कारनामों के लिए चर्चा में रहा है।
एक ऐसे ही “महा सज्जन”आरपीएफ पटना के पोस्ट कमांडर शंकर अजय पटेल भी डीजी पुरस्कार पा गए जिन पर पटना जिला के पंडारक थाना में केस संख्या 161/24 दिनांक 29.06.2024 U/S 341,323,504 आईपीसी की धारा के तहत दर्ज है,तब तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल ही खड़ा नहीं कर रहा है बल्कि व्यवस्था को शर्मशार कर रहा है क्योंकि चयन प्रक्रिया में कहीं न कहीं तो चुक हुई है । आरपीएफ का रुल 247 में स्पष्ट वर्णित है कि अपने खिलाफ दर्ज शिकायतों का विवरण मुख्यालय को उपलब्ध कराना आवश्यक है, तो फिर चूक कहां हुई यह जांच का विषय है लेकिन यह स्पष्ट है कि चूक जानबूझ कर की गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि पुरस्कार में चयन का आधार क्या है! क्योंकि पुरस्कार प्राप्त करने वाले शंकर अजय पटेल पिछले दस सालों से दस किलोमीटर क्षेत्र में ही फतुहा,आरा, दानापुर, पाटलिपुत्र, और पटना जंक्शन पर पदस्थापित है, तो क्या लगातार पांच पोस्ट पर पदस्थापना भी पुरस्कार का आधार है क्योंकि इन्होंने अपने पांचों पोस्ट पदस्थापना में भ्रष्टाचार और अत्याचार के दर्शन से आरपीएफ विभाग की साख को खाक किया है।
पानी के अवैध कारोबार के साथ साथ शराब तस्करी में शामिल माफियाओं को संरक्षण तो जगजाहिर है लेकिन पटना जंक्शन पर आरपीएफ द्वारा “संरक्षित”अवैध वेंडर यात्रियों के सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है जो कि शासन एवं प्रशासन के लिए दुशासन बन चुका है।
खैर अपने “दागी” चरित्र के बाबजूद डीजी पुरस्कार पाने वाले शंकर अजय पटेल अकेले नहीं हैं, इनके जैसे ही “दागी” चरित्र के लिए चर्चित धनबाद के आरपीएफ पोस्ट कमांडर अजय प्रकाश भी डीजी पुरस्कार प्राप्त करने में सफल रहे है लेकिन इन पर अपने ही महिला आरक्षी द्वारा यौन शोषण का लगाया गया आरोप और विभाग द्वारा की गई जांच और न्यायालय में दर्ज केस पुरस्कार का अपमान नहीं तो क्या हैं!
खैर यह सोचना शासन एवं प्रशासन का विषय है कि अनुशासन विहीन आरपीएफ विभाग में अनुशासन की व्यवस्था कैसे होगी लेकिन आरपीएफ के नव नियुक्त महिला महानिदेशक से यह उम्मीद तो की ही जा सकती है कि आरपीएफ के मूल उद्देश्य “यशो लभस्व” को स्थापित कर आरपीएफ विभाग की गरिमा को पुनः स्थापित करेंगी।





