- स्थानांतरण एवं पदस्थापना को अधिकारियों ने बनाया वसूली काअवैध जरिया
- रेलवे बोर्ड के निर्देशों को कर रहे दरकिनार, राजस्व क्षति करने से भी गुरेज नहीं
दानापुर: पूर्व मध्य रेलवे, दानापुर मंडल का “टीआरएस” विभाग जो कि लोकों पायलटों के परिचालन का संचालन करता है, लूट एवं भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है. यही नहीं विभाग इन दिनों कर्मचारियों के साथ अत्याचार का पर्याय बन गया है. टीआरएस विभाग की कार्यशैली ऐसी बन गई है कि स्थानांतरण एवं पदस्थापना अवैध कमाई का जरिया बन गया है और इस अवैध कमाई के लिए आमजनों के पैसे की लूट हो रही है और रेलवे को राजस्व का चपत लगाया जा रहा है.
बात सोचने वाली ही नहीं चिंता का विषय है, दो लोकों पायलट उत्तर रेलवे के फिरोजपुर मंडल से स्पाउज ग्राउंड पर दानापुर मंडल में योगदान देने के लिए 19.09.2024 को विरमित किए जाते हैं. अभ्यर्थी 23.09.2024 को दानापुर मंडल में योगदान देने हेतु रिपोर्ट करते हैं और पदस्थापना की प्रतीक्षा करते हैं और प्रतीक्षा ऐसी की 55 दिनों के बाद 18.11.2024 को तिलैया के लिए पदस्थापना आदेश जारी होता है. अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जब ई आफिस के माध्यम से सारा काम हो रहा है तब एक लोको पायलट के पदस्थापना में 55 दिन लगाना सिस्टम के डिरेलमेंट का दर्शन करने के लिए पर्याप्त है.
जब मंडल लोको पायलट की कमी से जूझ रहा हो और तब लोको पायलट की पदस्थापना में 55 दिन का समय लगाना भ्रष्ट अधिकारी के नियत का दर्शन कराता है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ इन्ही दो अभ्यर्थियों के पदस्थापना में 55 दिन लगे है, दर्जनों ऐसे अभ्यर्थी है जो स्पाउज ग्राउंड पर दानापुर मंडल में योगदान देने हेतु अन्य मंडल से स्थानांतरण पर आए हैं और पदस्थापना में चार-चार महीने का समय लगा है.
एक सप्ताह में होने वाली पदस्थापना में लग गये 55 दिन !, क्षतिपूर्ति कौन करेगा
सोचने वाली बात यह है कि जो पदस्थापना आदेश एक सप्ताह में जारी हो जाना चाहिए, 55 दिन से 120 दिनों में पदस्थापना आदेश जारी करना एक बड़े भ्रष्टाचार को चित्रित करता है. तो क्या यह खेल अवैध वसूली के लिए किया गया? क्या पदस्थापना आदेश जारी नहीं करने के टीआरएस विभाग के संकल्प के कारण रेलवे राजस्व को चपत लगाया गया है? अगर ऐसा हुआ है तो इसकी भरपाई पदस्थापना के खेल में शामिल कर्मचारियों और अधिकारियों से क्यों नहीं की जानी चाहिए?
अब आते है जमीनी हकीकत पर. रेलवे महकमे में इस बात की चर्चा हो रही है कि पदस्थापना आदेश जारी करने में 55 दिन से लेकर 120 दिन लगने के पीछे का मुख्य कारण वसूली का वह संकल्प है, जिससे स्पाउज ग्राउंड पर आने वाले अभ्यर्थियों को तिलैया का भय दिखाकर मोल-भाव किया जाता है और भुगतान करने पर ही पदस्थापना आदेश निर्गत किया जाता है. स्पाउज ग्राउंड पर आने वाले अभ्यर्थियों के पदस्थापना में रेलवे बोर्ड के आदेशों की अनदेखी चिंता का विषय तो है ही, कर्मचारियों के साथ भी अत्याचार का विषय है.
रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देश ठेंगे पर, आपदा को अवसर में बदले में माहिर हैं अधिकारी
रेलवे बोर्ड के आदेश संख्या RBE No 23/2010,PC No 185 के तहत जारी आदेश संख्या E(NG)1-2009/TR/29 New Delhi, दिनांक 02.02.2010 में स्पष्ट वर्णित है कि स्पाउज ग्राउंड पर आने वाले अभ्यर्थियों की पदस्थापना जहां तक संभव हो सके उनके स्पाउज के पदस्थापना के निकटतम स्टेशन पर की जाए लेकिन यहां तो आपदा को अवसर बदलने की फितरत है.
बात सोचने वाली ही नहीं चिंता का विषय है,सोच कर देखिए एक अभ्यर्थी अन्य मंडल से स्पाउज ग्राउंड पर स्थानांतरित होकर आता है, उसकी पत्नी बक्सर में शिक्षिका के पद पर कार्यरत है, रेलवे बोर्ड के आदेशानुसार उसकी पदस्थापना बक्सर में होनी चाहिए यदि बक्सर में रिक्तियां नहीं है तो दानापुर पटना राजेंद्रनगर में किया जा सकता है लेकिन पदस्थापना आदेश तिलैया के लिए जारी किया जाता है अब आप सोच कर देखिए एक लोको पायलट जिसकी पत्नी बक्सर में पदस्थापित हो दो छोटे बच्चे हो, माता पिता वृद्ध हो और इलाजरत हो तो क्या लोकों पायलट अपनी ड्यूटी तन्मयता से कर पायेगा!
तो क्या यह सुरक्षा एवं संरक्षा से खिलवाड़ नहीं!
टीआरएस विभाग का सिस्टम सिर्फ पदस्थापना आदेश जारी करने में ही डिरेल नहीं हुआ है, स्थानांतरण आदेश जारी करने में भी टीआरएस विभाग का सिस्टम डिरेल है और डिरेल हुआ है दीमक की तरह सिस्टम को खाने वाले सीएलआई मुख्यालय पी कौशल की विकोटिकृत मानसिकता के कारण जिसने रद्द हुई सीएलआई परीक्षा में भी वसूली में मुख्य भूमिका निभाई थी.
पूर्व मध्य रेलवे के टीआरएस विभाग द्वारा आदेश संख्या 137/2025 दिनांक 07.04.2025 को जारी किया जाता है जिससे 87 अभ्यर्थियों को पदोन्नति उपरांत पदस्थापना आदेश जारी किया जाता है, जिसमें दानापुर के भी 27 लोकों पायलट शंटर का लोकों पायलट गुड्स में पदोन्नति होता है और यहां भी विरमित करने में सीएलआई मुख्यालय पी कौशल द्वारा अपने विकोटिकृत मानसिकता का परिचय दिया जाता है, नियमानुसार विरमित करने के बजाय पिक एंड चूज का फार्मूला तैयार किया गया है जिससे कर्मियों में व्यवस्था के प्रति भारी आक्रोश है.
“पलटीमार”प्रमुख मुख्य विधुत अभियंता की कौन कसेगा नकेल
आदेश संख्या 137/2025 दिनांक 07.04.2025 के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि कुछ अभ्यर्थी ऐसे भी हैं जिनका स्थानांतरण पदोन्नति उपरांत पूर्व में भी हुआ था लेकिन अनुपालन नहीं हुआ जो कि सिस्टम के डिरेलमेंट का दर्शन करने के लिए पर्याप्त है. ऐसा कैसे संभव हो सकता है कि एक ही अभ्यर्थी का नाम स्थानांतरण आदेश संख्या 450/2021 दिनांक 23.09.2021 में भी हो और आदेश संख्या 343/23 दिनांक 14.06.2023 में भी है .
खैर पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल का टीआरएस विभाग का सिस्टम तो डिरेल है ही, पूर्व मध्य रेलवे प्रशासन का सिस्टम तो डिरेल नहीं! डिरेल सिस्टम को ठीक करने की जिम्मेदारी महाप्रबंधक पूर्व मध्य रेलवे की है, क्या एक “पलटीमार”प्रमुख मुख्य विधुत अभियंता के रहते यह संभव दिखता है!
उम्मीद तो किया ही जा सकता है.






पूरा रेलवे सिस्टम लूट का अड्डा है ।
उरई जालौन उसका जीता जगता सबूत है
.. Vartaman me shishir nagariya jaisa koin imandar sr. Dee nhi
Without railway rule none run duty by railway LP&ALP in danapur division Ecr
Without railway rule none run duty by railway LP&ALP in danapur division Ecr