दानापुर। भारतीय रेलवे का एक महत्वपूर्ण विभाग “कार्मिक” जिस पर रेल में नियुक्ति से लेकर अवकाश प्राप्त करने तक कर्मियों के कुंडली एवं कल्याण की महती जिम्मेदारी हैं, परन्तु भारतीय रेलवे का कार्मिक विभाग एक ऐसा विभाग हैं जिससे हरेक रेलकर्मी और रेल अधिकारियों को कोई न कोई शिकायत रहती ही हैं, कार्मिक विभाग की कार्यशैली से कोई भी रेलकर्मी संतुष्ट नजर नहीं आता।


रेलकर्मी कहते हैं कि कार्मिक विभाग में आपका कोई भी काम हो,ये आपको भी काम पर लगा देंगे कि अपना सारा पेपर लाओ,जो इनके पास है वो भी और जो नहीं है वो भी,जो भी संबंधित सर्कुलर हैं उन सबकी भी कॉपी लाओ और जब आप सब कर देंगे,ला देंगे, तो भी उस पके पकाए काम को भी आगे बढ़ाने के लिए हजारों बार चिरौरी-विनती कराएंगे और कुछ “दक्षिणा” पाने की अपेक्षा रखते हुए साथ में उपर से भारी एहसान भी जताएंगे। उनको जिनसे कुछ भी नहीं मिलना हैं,काम न होने के पचास नियम – बहाने बताएंगे, लेकिन जिससे लात गाली खाने का डर है या “दक्षिणा “मिलना हैं, उनके काम के लिए कोई भी नियम नहीं है और इसका मूल कारण है कार्मिक की आर्थिक नीति, इनका एक ही पैगाम है “पहले दाम तब काम चाहें कैसा भी हो काम चाहें जाना पड़े कृष्ण धाम।
कार्मिक की आर्थिक नीति ने कार्मिक विभाग को मार्मिक विभाग बना दिया है और कर्मचारियों की स्थिति को कारूणिक बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है,जो कि विचारणीय और चिंतनीय है।
ऐसा भी नहीं हैं कि कार्मिक की मार्मिक कहानी से रेल प्रशासन अवगत नहीं हैं, किसी ने प्रयास नहीं किया पर कार्मिक की आर्थिक नीति का मजा सबने मिलकर लिया।
रेलवे बोर्ड में मेम्बर इन्फ्रास्ट्रक्चर के पद पर पदासीन, भूतपूर्व महाप्रबंधक श्री ए के खंडेलवाल ने कार्मिक विभाग की दशा और दिशा से चिंतित होकर प्रत्येक मंगलवार को कर्मियों के समस्याओं के समाधान हेतु मिलने का समय निर्धारित किया था, बहुत सारे कर्मियों के समस्याओं का ऑन स्पाट निष्पादन भी हुआ, कर्मियों के समस्याओं का त्वरित निदान तो हुआ लेकिन कर्मियों को समस्या उत्पन्न करने वालों का निदान तो हुआ नहीं,जब तक उनका निदान नहीं होता है तब तक समस्या तो उत्पन्न होता ही रहेगा।
अब देखना महत्वपूर्ण यह है कि समस्या पैदा कौन कर रहा तो बीमारी का मूल जड़ हैं कार्मिक विभाग का “कल्याण शाखा”जहां वर्षों से पदस्थापित कर्मचारी कल्याण निरीक्षक “अत्याचार” का प्रतीक बन बैठे हैं, वर्षों से एक ही जगह पदस्थापना के कारण इनकी जडें मजबूत हो चुकी है और सिस्टम को दीमक की तरह खोखला कर दिया है।

पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर, के महाप्रबंधक कार्यालय में ही 09 कर्मचारी कल्याण निरीक्षक पदस्थापित हैं और 09 में से चार ऐसे हैं जिनका कार्यकाल 06 साल से ज्यादा हों चुका है, दानापुर मंडल मुख्यालय में 14 कर्मचारी कल्याण निरीक्षक पदस्थापित हैं, तीन को छोड़कर सभी अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं लेकिन रिचार्ज की बदौलत आनंद ही आनंद ले रहे हैं, सबसे बड़ा आश्चर्य तो इस बात का हैं कि श्री भूषण प्रसाद 28.03.1996 से ही दानापुर मंडल में पदस्थापित हैं, मतलब 28 साल से एक ही जगह पदस्थापना कार्मिक विभाग के किस कानून के तहत हैं?
ऐसा लगता है कि दानापुर मंडल के लिए इन्होंने लाईफ टाईम रिचार्ज करवा लिया है,लाईफ टाईम रिचार्ज करवाने वालों में श्री भूषण प्रसाद जी अकेले नहीं हैं, श्री ब्रजेश कुमार जी ने भी लाईफ टाईम रिचार्ज कराया हुआ है जो कि 08.06.2001 से ही दानापुर मंडल में पदस्थापित हैं, राजेश कुमार गुप्ता,10.05.2011 से, परवेज़ अहमद 18.03.2009 , कर्मचारी कल्याण निरीक्षक के स्टार श्री अशोक कुमार 29.08.2017 से दानापुर मंडल में कर्मचारियों का “स्पेशल कल्याण” कर रहे हैं।
स्पेशल कल्याण की फेहरिस्त लंबी है,पार्ट 2 शेष हैं और विशेष हैं।
Railwellwishers पूर्व मध्य रेलवे के नव नियुक्त महाप्रबंधक महोदय से निवेदन करता है कि कार्मिक विभाग की समीक्षा एवं आमूल बदलाव के बिना कर्मियों का कल्याण नहीं कर सकते, वर्षों से एक ही जगह “स्थिरमान”कर्मचारी कल्याण निरीक्षक को कीजिए गतिमान, तभी आयेंगी कर्मियों के चेहरे पर मुस्कान और तभी तो यात्रियों को सेवा मुस्कान के साथ।
जारी हैं…





Bahut accha hai jankari honi chahiya
Very good
दानापुर मंडल में भी वाणिज्य विभाग में बिलकुल ऐसी ही स्थिति है / इसका समाधान अभी तक नहीं हुआ है, आरक्षण कार्यालय में तो कई कर्मचारी 18 से 20 सालो से लगातार एक ही स्टेशन पर कार्यरत हैँ, जिसे अभी तक अधिकारी उनका ट्रांसफर नहीं करतें हैँ /जबकि अन्य कर्मचारी का ट्रांसफर 3 या 4 सालो पर कर दिया जाता है ऐसा क्यों ? दानापुर मंडल में कुछ भी असंभव नहीं है //
Thanks for work