दानापुर. कहते हैं ना कि नेचर और सिग्नेचर कभी बदलता नहीं है और यह अकाट्य सत्य भी है कि कुत्ते के पूंछ में कितना भी घी लगा दिया जाए कुत्ते का पूंछ कभी सीधा नहीं हो सकता और ठीक यही हाल है दानापुर मंडल के टीआरएस विभाग का, जहां कर्मयोगी कर्मचारी त्राहीमाम त्राहीमाम कर रहे हैं और वर्षों से एक ही जगह स्थिरमान अपने आप को शक्तिमान समझ बैठे है और कर्मयोगी कर्मचारियों को शैतान और हैवान की तरह परेशान कर रहे हैं।
टीआरएस विभाग के प्रमुख शिशिर नागरिया पूर्व में दानापुर मंडल में ही टीआरडी विभाग के प्रमुख थे और टीआरडी विभाग प्रमुख रहते हुए इन्होंने अपने विभाग के ही कर्मयोगी कर्मचारी अमित मोहन को सेवा से बर्खास्त कर अपने विकोटिकृत मानसिकता का दर्शन कराया था क्योंकि अमित मोहन अपने आरटीआई के सवालों से व्यवस्था को दर्पण दिखाने का काम कर रहे थे।
खैर कर्मयोगी कर्मचारी अमित मोहन की बर्खास्तगी की कहानी की विस्तृत रिपोर्ट अगले अंकों में।

टीआरएस विभाग के प्रमुख बनें हुए शिशिर नागरिया लगभग एक साल का कार्यकाल पुरा करने वाले हैं लेकिन पिछले एक साल में इन्होंने कोई भी ऐसा सकारात्मक सुधारात्मक कदम नहीं उठाया है कि इन्हें ईमानदार कहा जा सकें लेकिन इन्होंने अपने कुकर्मों से व्यवस्था को शर्मशार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है जिसकी विवेचना आवश्यक है।

पिछले दिनों 23.01.2026 को “स्थापना” के आदेश संख्या 18/2026 के माध्यम से 34 ड्राफ्टेड कर्मियों का पदस्थापना आदेश जारी किया गया है जिसमें 10 कर्मियों को पदस्थापना टीएलसी दानापुर में किया गया है जिसमें यह बात ध्यान देने वाली है कि दस लोकों पायलट गुड्स का पदस्थापना टीएलसी दानापुर में किया गया है,दस लोकों पायलट गुड्स में से तीन लोकों पायलट गुड्स तिलैया में पदस्थापित है और उस इलाके के ही रहने वाले हैं, ऐसा स्पष्ट प्रतीत होता है कि तिलैया में पदस्थापित लोकों पायलट गुड्स दानापुर में ज्वायन क्यूं करेंगे और ऐसा साजिश जानबूझकर किया गया है क्योंकि टीएलसी दानापुर में पदस्थापित राजेश प्रसाद लगभग दो दशकों से टीएलसी में ही पदस्थापित है और अपने गुर्गों के माध्यम से वसूली करने में प्रथम स्थान रखता है, जहां रेलवे बोर्ड के आदेशानुसार मात्र तीन सालों के लिए ड्राफ्टेड रह सकता है लगभग दो दशकों से टीएलसी में कैसे पदासीन है और इस मामले टीआरएस प्रमुख क्यों उदासीन है,समझा जा सकता है लेकिन फिर भी टीआरएस प्रमुख शिशिर नागरिया ईमानदार है हास्यास्पद ही नहीं शर्मशार करने वाली बात है।
टीएलसी में राजेश प्रसाद लगभग दो दशकों से अकेले ही नहीं है लगभग दर्जनों ऐसे हैं जो अपने जुगाड़ टेक्नोलॉजी से बिना गाड़ी चलाए पदोन्नति पाए हैं और टीएलसी में राजेश प्रसाद के कुकर्मों में शामिल हैं।यह जानकर आश्चर्य होगा कि लगभग दो दशकों से टीएलसी में पदस्थापित राजेश प्रसाद ने मात्र 439 किलोमीटर ही गाड़ी चलाने का कार्य किया है तब तो यह बात सोचने वाली है कि शिशिर नागरिया कितने ईमानदार है! लेकिन ईमानदारी के मामले में सबसे “नामदार”है।

ड्राफ्टेड की सूची में एक महत्वपूर्ण नाम आलोक सिन्हा का है जो लोकों पायलट मेल राजेंद्रनगर में पदस्थापित है लेकिन पिछले दो दशकों से टीआरएस कार्यालय में ही पदस्थापित है और इनका मुख्य कार्य सभी क्रू कंट्रोलरों एवं रनिंग रूम इंचार्जों से वसूली करना है आप यह भी कह सकते हैं कि ये शिशिर नागरिया के “मुंशी”है!
एक और महत्वपूर्ण नाम है वेंकटेश नारायण जो कि टीआरएस कार्यालय का मुख्य कार्यालय अधीक्षक है,पद से विकोटिकृत तो ही, चरित्र से भी विकोटिकृत है, मानसिकता ऐसी कि सभी से यही कहता है कि रेलवे बोर्ड का आदेश कोई मायने नहीं रखता है जो मैंने कह दिया वहीं रेलवे बोर्ड का आदेश है। वैसे तो बहुत सारे इडियट्स है जो टीआरएस विभाग की दशा और दिशा को दुर्दशा में तब्दील करने में सतत् गतिमान है फिर भी शिशिर नागरिया ईमानदार अधिकारी हैं!
टीआरएस विभाग का एक चर्चित नाम है राजेश नंदन सहाय जिसका 07.04.2025 को ही लोकों पायलट गुड्स में पदोन्नति उपरांत तिलैया स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था आज़ भी टीआरएस विभाग में विराजमान हैं तो बात सोचने वाली है।
ऐसा भी नहीं है वरीय पदाधिकारी उपरोक्त मामलों से अवगत नहीं है, पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर में पदस्थापित सीईएलई पी के चक्रवर्ती टीआरएस की दशा और दिशा से अवगत होते हुए भी अपने को किंकर्तव्यविमूढ़ बने हुए हैं तो समझा जा सकता है कि टीआरएस विभाग की यथास्थिति क्या है!
अब सवाल यह उठता है कि जिन पर टीआरएस की व्यवस्था को सुदृढ़ करने की महती जिम्मेदारी है और वो ही अपने आप को किंकर्तव्यविमूढ़ बने हुए हैं तब तो यह कहा जा सकता है कि टीआरएस विभाग राम भरोसे ही चल रहा है और कर्मियों में व्याप्त असंतोष किसी बड़ी दुर्धटना को निमंत्रण दे रहा है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।





