दानापुर: पूर्व मध्य रेलवे का आरपीएफ विभाग ने अपने “अभूतपूर्व” कारनामों से व्यवस्था को शर्मशार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखी है, इनके कारनामों की फेहरिस्त लम्बी है । कहते हैं ना कि जब अति होता है तो अंत होता हैं।
सूत्रों से मिली पक्की और विश्वसनीय जानकारी के अनुसार, दानापुर मंडल में पदस्थापित एक नामी, चर्चित और प्रभावशाली निरीक्षक अब गंभीर संकट में फंसने वाला है। विभाग के शीर्ष अधिकारियों के हाथ इस निरीक्षक से जुड़ा एक ऐसा ठोस और अहम सुराग लगा है, जिसने पूरे मंडल में प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
जानकारी के मुताबिक, उक्त निरीक्षक वर्तमान में दानापुर मंडल के एक अत्यंत प्रमुख स्टेशन पर और संवेदनशील पद पर तैनात हैं। इससे पूर्व वह रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की आरा, दानापुर और पाटलिपुत्र पोस्टों पर भी पदस्थापित रह चुका है।उसकी हर पोस्टिंग के साथ विवादों का साया भी जुड़ा रहा है।
दिलचस्प पहलू यह है कि हर पदस्थापना के दौरान वह अपने एक विश्वस्त स्टाफ सदस्य “परमानंद आर्या” को अपने साथ लेकर चलता रहा। परमानंद आर्या उसकी सेवा में वर्षों से रहा है और विभाग में उसे नामी निरीक्षक का “साया” कहा जाता रहा है।
पोस्ट आफिस की सीसीटीवी फुटेज से खुली पोल
हाल ही में दानापुर मंडल के एक वरिष्ठ अधिकारी के विरूद्ध डाक विभाग (पोस्ट आफिस) के माध्यम से एक गंभीर शिकायत भेजी गई थी। प्रारंभ में यह एक सामान्य पत्र प्रतीत हुआ, किंतु जब इसकी जांच हुई तो बड़ा खुलासा सामने आया।
पोस्ट आफिस के सीसीटीवी कैमरों में परमानंद आर्या को तीन अलग-अलग लिफाफे पोस्ट करते हुए स्पष्ट रूप से देखा गया। फुटेज जब्त कर ली गई है, और पूछताछ के दौरान आर्या ने स्वीकार किया कि ये तीनों लिफ़ाफ़े उसे आरपीएफ पोस्ट पाटलिपुत्र में पदस्थ निरीक्षक हरिकेश मीणा द्वारा दिए गए थे।
“बली का बकरा” या “असली सूत्रधार?
जांच एजेंसियों का मानना है कि हरिकेश मीणा को इस पूरे प्रकरण में बली का बकरा बनाया जा रहा है।असली सूत्रधार वह नामी निरीक्षक बताया जा रहा है, जिसने पर्दे के पीछे से यह पूरा षड्यंत्र रचा और अपने वफादार स्टाफ परमानंद आर्या के माध्यम से इसे अंजाम दिलवाया।
परमानंद आर्या, जिसने वर्षों तक उस निरीक्षक के साथ
काम किया, पूछताछ में लगातार यही कहता रहा कि उसने केवल आदेश का पालन किया था और उसे नहीं पता कि उन लिफाफों में क्या था।
आर्या को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया
जांच में प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर विभाग ने सख्त क़दम उठाते हुए परमानंद आर्या को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspended) कर दिया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि निलंबन आदेश में “अनुशासनहीनता और संदिग्ध गतिविधियों” को मुख्य कारण बताया गया है।
आर्या से अब आगे भी गहन पूछताछ की जायेगी ताकि यह पता लगाया जा सके इस पूरे प्रकरण की योजना किस स्तर से बनाई गई थी और वास्तविक लाभ किसे मिलना था।
यह तो स्पष्ट प्रतीत होता हैं कि पूर्व मध्य रेलवे का आरपीएफ विभाग अपने “कालिख” से कलंकित है और रेल यात्री अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आरपीएफ की प्रथम महिला महानिदेशक आरपीएफ के नामी कालिख से कलंकित विभाग को किस तरह से आरपीएफ विभाग के मूल मंत्र “यशो लभस्व” का दर्शन करा पाती है, देखना दिलचस्प होगा।





