- व्यवस्था का हुआ अंतिम संस्कार: निर्माण संगठन का अनुपम उपहार, वसंतकुंज में आलीशान फ्लैट तो जयपुर में रेल मीनार!
हाजीपुर: भारतीय रेल का पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर इन दिनों रेल पटल पर चर्चा में हैं और चर्चा में रहने का कारण है, पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर में मनाया जा रहा “फेयरवेल पखवाड़ा”! भारतीय रेल संस्थाओं में अभी तक “सतर्कता पखवाड़ा” की ही चर्चा होती रही है, क्योंकि भारतीय रेल का सतर्कता विभाग “सतर्कता पखवाड़ा” मनाकर अपने होने का अहसास कराते आई है! एक कहावत है “करनी कुक्कुर नाम लखनदेई”! लेकिन आजकल पूर्व मध्य रेलवे का सतर्कता विभाग मुजरा करने वाली की भूमिका के कारण चर्चा में हैं!
“आगत का स्वागत” और “विगत की विदाई” भारतीय संस्कृति का परिचायक हैं लेकिन पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के वर्तमान महान् महाप्रबंधक श्रीमान छत्रसाल सिंह जो आजकल अपनी “धृतराष्ट्र” की भूमिका में चर्चित है और “लूटन सिंह” एवं “बटोरन सिंह” जैसे नामों से सम्मानित हैं, जो 31 अगस्त को भारतीय रेल सेवा से अवकाश प्राप्त करने वाले हैं या यह भी कहा जा सकता है कि 31 अगस्त को भारतीय रेल इनके “भार” से मुक्त होने वाला है, ने एक नई परम्परा की शुरुआत की है और वो है “फेयरवेल पखवाड़ा”!
पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक श्रीमान छत्रसाल सिंह ने अपने अविस्मरणीय कार्यकाल में पूर्व मध्य रेलवे की व्यवस्था को ध्वस्त ही नहीं बल्कि व्यवस्था का अंतिम संस्कार कर दिया है, क्योंकि इनके अविस्मरणीय कार्यकाल में सीबीआई की दस दस रेड पड़ी है और बहुत सारे अधिकारियों और कर्मचारियों को काल कोठरी का आनंद लेना पड़ा है फिर भी “साहब” के चेहरे पर “मोगाम्बो” वाली मुस्कान हैरान करने वाली है।
पूर्व मध्य रेलवे की व्यवस्था का अंतिम संस्कार करने में इन्हें अपने चार सहयोगियों का भरपूर सहयोग मिला है, कार्मिक विभाग के प्रमुख सुरेश चंद्र श्रीवास्तव,लेखा विभाग के प्रमुख एवं नटवरलाल को भी अपने कारनामों से शर्मिन्दा करने वाले श्रीमान नीरज वर्मा, आरपीएफ विभाग के प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त श्रीमान अमरेश कुमार एवं स्टोर विभाग के प्रमुख श्रीमान विजय कुमार ने व्यवस्था के अंतिम संस्कार की “अर्थी” को कंधा देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है और व्यवस्था की “अर्थी” को मुखाग्नि कौन देता है, परिवार का सबसे बड़ा ही तो मुखाग्नि देता है।
जब व्यवस्था का अंतिम संस्कार हो ही गया तो श्राद्ध कार्यक्रम भी होना ही चाहिए, क्योंकि बिना श्राद्ध कार्यक्रम के व्यवस्था के आत्मा को शांति कैसे मिलती तो सबने मिलकर तय किया कि 14 अगस्त से 31 अगस्त तक व्यवस्था का श्राद्ध कार्यक्रम मनाया जाएगा और इसका नाम दिया गया ” फेयरवेल पखवाड़ा”!
“फेयरवेल पखवाड़ा” की शुरुआत बाबा हरिहरनाथ की नगरी सोनपुर से हुई, पगड़ी एवं “चुमावन” कार्यक्रम तो शानदार हुआ लेकिन भोजन की व्यवस्था ने कुव्यवस्था की पोल खोल दी और भोजन से वंचित कर्मियों ने “भोजन प्रमुख” का उपचार कर दिया और बात थाने तक पहुंच गई।
धनबाद मंडल, समस्तीपुर मंडल एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय मंडल में पगड़ी एवं “चुमावन” कार्यक्रम अपेक्षाकृत सफल रहा और सफल होने के पीछे कारण यह रहा कि “फेयरवेल पखवाड़ा” की व्यवस्था को देखने वाले “शकुनी महोदय” पगड़ी कार्यक्रम आयोजित करने वालों को पूर्व में ही साहब की इच्छा से अवगत करा देते हैं और तब किसकी औकात है कि साहब की इच्छा का सम्मान नहीं करें,रोकर कीजिए या गाकर कीजिए, करना तो पड़ेगा ही।
पगड़ी एवं चुमावन कार्यक्रम में भीड़-भाड़ एवं अव्यवस्था न हो जाए, इसका ध्यान रखते हुए आठो विभागों के लिए अलग-अलग दिन निर्धारित किया गया है और यह कार्यक्रम पाटलिपुत्र रेल परिसर में अनवरत जारी है,सभी अधिकारी इस कार्यक्रम में शामिल हों आह्लादित है और बेहतर भविष्य के लिए आशान्वित भी और हो भी क्यों न, क्योंकि उन्होंने आदेशानुसार मनमाफिक “चुमावन” एवं भोज-भात की व्यवस्था की है।
29 अगस्त को पगड़ी एवं चुमावन कार्यक्रम दानापुर मंडल में निर्धारित है और इस कार्यक्रम को भव्य रूप देने की तैयारी है, वैसे भी अंतिम दिन का कार्यक्रम तो भव्य होता ही है,सावन माह की बाध्यता भी नहीं है, इसलिए दानापुर मंडल में पगड़ी कार्यक्रम आयोजित करने वाले आयोजकों के सामने भी चुनौती है कि “अंत भला तो सब भला”!
इस संसार में जो भी आया है सबको जाना है यह तो शाश्वत सत्य है लेकिन जाने के बाद कहां रूकेंगे इसकी चिंता पूर्व मध्य रेलवे के निर्माण संगठन ने की है और साहब की इच्छानुसार निर्माण संगठन के संवेदक Aadya Raj Developers Pvt Ltd ने दिल्ली के वसंतकुंज में एक आलीशान फ्लैट एवं गुलाबी शहर जयपुर में पुराने मकान के नवीनीकरण के साथ साथ रेल मीनार का निर्माण कर साहब को प्रफुल्लित किया है।
पगड़ी एवं चुमावन कार्यक्रम अभी जारी है..
शेष खबरों के लिए सफ़र जारी है..




