पटना: भले ही पूर्व मध्य रेलवे के आरपीएफ विभाग को माननीय रेल मंत्री महोदय द्वारा “सुरक्षा शील्ड” से नवाजा गया हो लेकिन हकीकत क्या है,सभी अवगत हैं! आरपीएफ विभाग जिस पर रेलवे की सम्पत्ति और यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था की महती जिम्मेदारी है लेकिन आरपीएफ विभाग की वर्तमान दिशा और दशा जो दुर्दशा में तब्दील हो चुका है यात्रियों और रेलवे सम्पत्ति की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गया है यह कोई अतिशयोक्ति नहीं हकीकत है जो कि एक कड़वा सच है!
पहले हास परिहास में आरपीएफ विभाग को लोग “राशन पानी फ्री” विभाग से संबोधित करते थे और आज़ “रूपया-पैसा फोर्स” के नाम से संशोधित हो गया है!
पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह के नेतृत्व में कुशलता से जो “लूट चले हम” अभियान चलाया जा रहा है, आरपीएफ विभाग के प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त अमरेश कुमार उस अभियान के एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं और उनके कारनामों ने उन्हें आरपीएफ विभाग का “बीमारी” साबित किया है!
प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त अमरेश कुमार ने अपने मनमानी कारनामों से विभाग को “महतो जी का दुकान” बना दिया है, और इसका दर्शन आरपीएफ विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश Force order No 38/2026 dated 09.06.2026 में परिलक्षित हो रहा है। उपरोक्त वर्णित आदेश के माध्यम से 19 निरीक्षकों का स्थानांतरण एवं पदस्थापना आदेश जारी किया गया है, आदेश का अवलोकन करने से यह परिलक्षित होता है कि लगभग आधा दर्जन ऐसे निरीक्षकों की पदस्थापना पोस्ट कंमाडर के रूप में की गई है जिन पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप है या विजिलेंस विभाग में केस लंबित है! आरपीएफ विभाग के विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर पदस्थापित प्रदीप कुमार रावत की पदस्थापना सोनपुर मंडल के हाजीपुर स्टेशन पर की गई है और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर इन्होंने क्या क्या गुल खिलाए हैं किसी से भी छिपा नहीं है लेकिन प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त अमरेश कुमार अनजान है, क्योंकि उन्हें सिर्फ रूपया पैसा का ध्यान है!
ठीक इसी तरह फतुहा आरपीएफ पोस्ट पर पदस्थापित चंदन पासवान, सासाराम आरपीएफ पोस्ट पर पदस्थापित राकेश रंजन एवं जपला आरपीएफ पोस्ट पर पदस्थापित संतोष कुमार झा का विवादों से नाता रहा है!कई और नाम है जिन्होंने अपनी मंशा को पूरा करने में आरपीएफ विभाग की साख को बट्टा लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है! लेकिन जब आरपीएफ विभाग रूपया पैसा फोर्स में तब्दील हो गया हों तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है।
पूर्व मध्य रेलवे के महामहिम महाप्रबंधक महोदय से तो कुछ उम्मीद नहीं की जा सकती है लेकिन आरपीएफ विभाग की प्रथम महिला महानिदेशक से इतनी उम्मीद तो की ही जा सकती है कि आरपीएफ विभाग की गिरती साख को खाक में मिलने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेंगी।
उम्मीद है तो जिंदगी है…
सफ़र जारी है..




