- स्थानांतरण एवं पदस्थापना में डीआरएम की भूमिका भी संदिग्ध, किसी को राहत-किसी पर आफत
- दक्षिण पूर्व रेलवे का विजिलेंस विभाग भी खेल में शामिल, आदेश के बाद भी यथास्थान जमे हैं कर्मचारी
चक्रधरपुर : कहते हैं ना कि नियत ही नियति का निर्धारण करती है। लेकिन यदि नियत में खोट हो और उद्देश्य कमाना सिर्फ नोट हो तो नीति और सिद्धांत धरें के धरें रह जाते हैं, ठीक ऐसा ही परिदृश्य दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में देखने को मिल रहा है। या यूं कहें “उत्तम खेती मध्यम बान, निषिद चाकरी भीख निदान।।”.
दक्षिण पूर्व रेलवे का चक्रधरपुर मंडल जो यात्री ट्रेनों के लेट लतीफी के लिए चर्चा में तो हैं ही, स्थानांतरण आदेश के क्रियान्वयन में भी लेट लतीफी एवं मनमानी के लिए चर्चा का विषय बन गया है।
भारतीय रेलवे का वाणिज्य विभाग जिस पर रेलवे की आय की महती जिम्मेदारी है और जहां आय होगा वहां “अन्य आय” भी होगा और जहां “अन्य आय” होगा वहां अन्याय भी सुनिश्चित होगा ही, ऐसा ही अन्याय दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में वाणिज्य विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण आदेशों के क्रियान्वयन में देखने को मिल रहा है।

दक्षिण पूर्व रेलवे के सतर्कता विभाग द्वारा चक्रधरपुर मंडल के वाणिज्य विभाग को लम्बी अवधि से एक ही जगह संवेदनशील पदों पर आसीन वाणिज्य कर्मियों के स्थानांतरण के लिए जब स्मरण कराया गया, तब वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक आदित्य चौधरी द्वारा आदेश संख्या SER/PCKP/COMML/TRF/POSTING/168/2025 दिनांक 16.04.2025 के माध्यम से एकमुश्त 30 वाणिज्य कर्मियों का स्थानांतरण आदेश जारी किया गया।
सतर्कता विभाग के हड़काने पर वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक आदित्य चौधरी द्वारा प्रशासनिक आधार पर 30 वाणिज्य कर्मियों का स्थानांतरण आदेश तो जारी कर दिया गया लेकिन जानकार हैरानी होगी कि एक साल बीत जाने के बाद भी स्थानांतरण आदेश का क्रियान्वयन शत प्रतिशत सुनिश्चित नहीं हुआ है जो कि चक्रधरपुर मंडल की वाणिज्य विभाग की “ध्वस्त”व्यवस्था का परिचायक है और ऐसा क्यूं हुआ है संभवतः बताने की जरूरत नहीं! भले ही वाणिज्य विभाग की व्यवस्था वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक आदित्य चौधरी के कारनामों से ध्वस्त हो गई है लेकिन चौधरी के चौधराहट में कोई कोर कसर बाकी नहीं है।
स्थानांतरण आदेश का क्रियान्वयन तो शत् प्रतिशत सुनिश्चित नहीं हुआ लेकिन जिन 30 स्थानांतरित वाणिज्य कर्मियों में से कुछ ने आदेश जारी होने के लगभग दो महीने बाद नए जगह पर योगदान दिया, उनका स्थानांतरण पुनः पुराने स्थान पर वाणिज्य विभाग के आदेश संख्या SER/P-CKP/COMML/Transfer & posting/Staff/210/2025 dated 11.08.2025 के माध्यम से सक्षम प्राधिकारी के अनुमति से स्व अनुरोध पर कर दिया गया , जिनमें प्रमुख हैं, अनुप्रिया दास, संगीता स्वामी, शबिना खातून, एवं विश्वजीत चटर्जी। यह स्थिति चेकिंग कर्मचारियों के आदेश की भी रही. जो इस सूची में शामिल नजर आये.
दिलचस्प है कि बार-बार के ट्रांसफर आदेश के बाद भी कई रेलकर्मी तो विरमित ही नहीं किये गये. आज भी वह जहां काम रहे थे वहीं जमे हैं. इस पर न तो सीनियर डीसीएम कार्यालय कार्यवाही कर रहा न ही कार्मिक को ही अपने द्वारा जारी किये गये आदेश के अनुपालन की याद आ रही. अब नियमों के पालन का दायित्य डीआरएम पर आता है तो यहां कई आदेश तो डीआरएम की अनुमति से ही संशोधित कर दिये गये. आलम यह है कि स्थानांतरण एवं पदस्थापना में अब डीआरएम की भूमिका को भी संदिग्ध नजरों से देखा जाने लगा है. कहां तो यहां तक जा रहा है कि कोई झूठी कहानी गढ़कर पांच साल से अधिक समय से एक ही स्थान पर मजे मार रहा तो किसी की जायज परेशानी का अनुरोध तक सुनने को साहब तैयार नहीं. ऐसे एक दर्जन से अधिक मामले railwellwishers के संज्ञान में लाये गये है जिनकी पड़ताल लगातार की जायेगी.
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब सतर्कता विभाग द्वारा लम्बी अवधि तक एक ही जगह पदस्थापित रहने पर सवाल उठाया गया तो प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण आदेश जारी किया गया और नए जगह पर योगदान देने के दो महीने के अंदर ही पुराने स्थान पर स्व अनुरोध पर स्थानांतरण कर दिया जाना, किस नीति के तहत किया गया. जब स्थानांतरण आदेश प्रशासनिक आधार पर किया गया था तो स्वाभाविक है कमियों को सीटीजी (कंपोजिट ट्रांसफर ग्रांट) भी दिया ही गया होगा तब तो स्पष्ट प्रतीत होता है कि चक्रधरपुर मंडल में वाणिज्य विभाग द्वारा मंडल रेल प्रबंधक के संरक्षण में स्थानांतरण घोटाला को अंजाम दिया जा रहा है और वो भी संवेदनशील पदों के मामले में, यह कहां तक न्यायसंगत एवं तर्कसंगत है, इसका जबाब तो मंडल रेल प्रबंधक एवं वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक ही दे सकते हैं!
Railwellwishers दक्षिण पूर्व रेलवे के नव नियुक्त महाप्रबंधक से यह उम्मीद करता है कि चक्रधरपुर मंडल में चल रहे स्थानांतरण घोटाला को संज्ञान में लेते हुए न्यायोचित पहल कर वाणिज्य विभाग की ध्वस्त व्यवस्था को दुरुस्त कर अपनी भूमिका से न्याय करेंगे। रेलवे विजिलेंस और एसडीजीएम को भी चाहिए कि अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ईमानदार से करें न कि लोडिंग सेक्शन में सालों से जमे ‘VV’ की जोड़ी से नजराना वसूलने के लिए दलाली की हर सीमाएं लांघ जाये.
खैर यह कोई पहला मामला नहीं है जिसमें वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक आदित्य चौधरी द्वारा गड़बड़झाला किया गया है, मामले कई और है और सभी परत दर परत प्याज की छिलके की तरह बाहर आयेगा ! जल्द ही लोडिंग सेक्शन और तबादलों के खेल की परत हटेगी.
चक्रधरपुर मंडल का सफर जारी है..





