AEN का Reversal. कहानी पूर्व मध्य रेल के “कुकर्मी” कार्मिक की!

AEN का Reversal. कहानी पूर्व मध्य रेल के “कुकर्मी” कार्मिक की!

पटना :

बचाने को आका की जान, करना 13 AEN को कुर्बान !

जी, सही पढ़ा आपने, अपनी-अपनी जान बचाने को सब कोई न कोई उपाय लगाता है, ऐसे उपाय लगाने वालों में कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो केवल अपनी जान बचाने में दूसरों की जान की बाज़ी लगा देते हैं, और इसमें उन्हें तनीक भी लज्जा नहीं आती!

जबसे Railwellwishers ने इस बात की आवाज उठाई है कि गलत प्रकिया अपनाने वाले तत्कालीन PCPO,CPO और Dy. CPO की भूमिका की जांच की जाए और उन्हें दण्डित किया तब से कार्मिक विभाग की नींद उड़ गई है, और अपने आकाओं को बचाने के लिए तिकड़म पर तिकड़म लगाये जा रहे हैं।
अपने आका और चहेते 2 Aen को बचाने के लिए 11 अन्य Aen की बलि ले रहे हैं, जैसा कि इससे पूर्व में लिखा गया है।

रेलवे में एक पुरानी परम्परा नहीं कहें, बल्कि एक बीमारी है कि जब ख़ुद फँस रहे हो या कोई अपना खास- खास फंस रहा हो तो उसे बचाने के लिये उसके साथ दो चार और को भी फंसा कर मूल रूप से फंसने वाले को बचा लो।

हम तो डूबे हैं सनम- तुझे भी ले डुबेंगे।

इसी कहावत को चरितार्थ करते हुए, पूर्व मध्य रेल के कार्मिक ने गलत प्रक्रिया से चुने गये 2 Aen की जगह अविवादित अन्य 11 Aen को Reversal करने का Show Cause Notice थमा दिया।

उलझनों को और उलझा दो कि
सुलझाने में बीत जाये जिंदगी।

पर Aen reversal के मामले को उलझाने वाले ख़ुद ही अपने बुने जाल में फंस गए और जानकारी मिली है कि मामले को ठण्डा करने के लिए Railway Board ने एक Dy CPO हाजीपुर की बलि ले ली और उनका Transfer ECR से ER कर दिया।

इतने के बावजूद भी कार्मिक की टेढ़ी चाल सीधी नहीं हुई है। अपनी जिम्मेदारी से बचने एवं मामले को और उलझाने के लिए मामले को अपने Law Department में भेज दिया है, जैसा कि विश्वस्त सूत्रों से पता चला है,

कहने को यह Law Department है पर मूल रूप से यह लाओ Department है , वहाँ जब कुछ ले जाइएगा- तभी कुछ पाईयेगा, नहीं तो पछताईयेगा।
लाओ Department, कहने को अलग है पर कहलाने को यह कार्मिक का सहोदर भाई जैसा ही है।

मामले को सुलझाने की जगह उसे और पेचीदा बनाता है- जलेबी नहीं इमरती की तरह गोल गोल घुमाता है।

ऐसे ही एक मामले को घुमाने के चक्कर में एक बार PCPO की नौकरी जाते जाते बची थी और तब के PCPO को कोर्ट की अवमानना से बचने और अपनी नौकरी बचाने के लिए कोलकाता के कोर्ट में सदेह उपस्थित होकर माफ़ी माँगनी पडी थी।

लाओ Department के अधिकारी स्वयं को CAT एवं Highcourt के माननीय Judge साहबों से ज्यादा ज्ञानी समझते है, एवं CAT और High Court के निर्णय में मीन- मेख निकालने के चक्कर में मामले को पेचीदा बना रेलवे का फलूदा बना देते हैं।

जैसी जानकारी मिली है कि इस AEN Reversal मामले में भी लाओ Department की सलाह से 2 की जगह 13 Aen की बलि ली जा रही थी पर बलि DY CPO की चढ़ गई है।

कार्मिक विभाग द्वारा अब इसका ठीकरा “लाओ Department” पर फोड़ा जा रहा कि इसी के सलाह पर ऐसा निर्णय लिया गया है और लाओ Department के ऊपर है कि वह अपने आप को कार्मिक के इस तिकड़म से खुद को कैसे बचाता है।

हमारी भी दृष्टी उधर ही है..
जहां तेरी ये नज़र है- मेरी जान मुझे ख़बर है……

सफ़र जारी है..

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