पटना: भारतीय दर्शन में ऐसा मानना है कि मति एवं संगति ही गति का निर्धारण करता है। लेकिन यदि मति भ्रष्ट हो और संगति में भ्रष्ट लोगों का जमावड़ा हो तो दुर्गति तय है, ठीक यही दुर्गति भारतीय रेल के एक अभूतपूर्व ज़ोन ECR में देखने को मिल रहा है जिसे अब आमजन Entire Corrupt Railway के नाम से संबोधित करने लगे हैं और ऐसा कहने के पीछे तथ्य भी है जो कि शत् प्रतिशत सत्य भी है।
10 मार्च 2026 को पूर्व मध्य रेलवे के लेखा विभाग द्वारा आदेश संख्या O/O No – NG/17 of 2026 के माध्यम से एकमुश्त स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था जिसमें 69 कर्मियों का स्थानांतरण आदेश स्व अनुरोध प्राथमिकता के आधार पर एवं शेष 41 कर्मियों का स्थानांतरण आदेश प्रशासनिक आधार पर किया गया, लेकिन जिस तरह से इस स्थानांतरण आदेश को प्रचारित किया गया उससे यह प्रतीत कराने की कोशिश की गई कि इन्हीं 110 कर्मियों के कारणों से पूर्व मध्य रेलवे में महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह के कार्यकाल में सीबीआई की सात सात रेड पड़ी।
जबकि हकीकत कुछ और ही है, एक कहावत है ” सूप हसलन चलनी के,जेकरा अपने में 72 गो छेद”, ठीक यही हाल है पूर्व मध्य रेलवे के मति भ्रष्ट एवं महाभ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह के साथ।
पूर्व मध्य रेलवे में महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह के कार्यकाल में जो सात सात सीबीआई रेड पड़ी है,उसका सबसे बड़ा कारण छत्रसाल सिंह की कार्यशैली है, ऐसा लगता है कि आजादी के “अमृत काल महोत्सव” को इन्होंने “लूट का अमृत महोत्सव” में तब्दील कर दिया है।
“लूट का अमृत महोत्सव” इसलिए क्योंकि पहले रेल को लूटा जा रहा था और इनके कार्यकाल में रेल कर्मचारी भी लूटे जा रहे हैं, यदि फिर भी इनके चेहरे पर जो कुटिल मुस्कान है वो हैरान करने वाली है।
यह तो सभी जानते हैं कि जब भी किसी व्यवस्था में बदलाव किया जाता है तो इसका ध्यान अवश्य ही रखा जाता है कि व्यवस्था ध्वस्त नहीं हो,पुल पुलिया के निर्माण के पहले डायवर्सन का निर्माण अवश्य ही किया जाता है लेकिन मति भ्रष्ट एवं महाभ्रष्ट महाप्रबंधक ने तो अपने आप को “हीरो” साबित करने में लेखा विभाग को “जीरो”बना कर लेखा विभाग की व्यवस्था को ही ध्वस्त कर दिया है, ऐसा कहने के पीछे कारण यह है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद निर्माण संगठन मुख्यालय में निर्माण संगठन से जुड़े संवेदकों का सैकड़ों विपत्र महीनों से भुगतान हेतु लंबित है और जब संवेदकों का भुगतान ही विलम्बित होगा तो स्वाभाविक है निर्माण कार्य भी विलम्बित होगा और वही हो रहा है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
पिछले दिनों 25 मार्च 2026 को डीडीयू – गया – प्रधानखांटा रेलखंड पर माॅनिटरिंग सिस्टम लैस ट्रायल ट्रेन से 180 किमी प्रतिघंटा तक की अधिकतम गति के साथ महाप्रबंधक द्वारा परिचालन का निरीक्षण किया गया था,इस उपलब्धि के लिए अभियंत्रण विभाग को वाहवाही मिलनी चाहिए थी लेकिन इसकी वाहवाही महाप्रबंधक महोदय ने खूब बटोरी,होना भी चाहिए, ताली कप्तान को ही मिलती है। लेकिन 110 लेखा कर्मियों के एकमुश्त स्थानांतरण से जो “लेखा” की व्यवस्था ध्वस्त हुई है और निर्माण संगठन से जुड़े संवेदक त्रस्त और पस्त है!इस ध्वस्त व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन है?
अब देखने वाली बात यह होगी कि भारतीय रेल के अभूतपूर्व टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रेट रेलमंत्री जो 52 सप्ताह में 52 सुधार की बात करते हैं, पूर्व मध्य रेलवे की दशा और दिशा सुधारने पर विचार करेंगे!
सुधार की उम्मीद के साथ सफर जारी है..





